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हाथरस- अंतर्राष्ट्रीय कवि डा. वीरेन्द्र तरूण स्मृति सम्मान डा. राजू तथा प्रताप पुरस्कार आशु कवि अनिल बौहरे को

हाथरस। मेला श्री दाऊजी महाराज के विशाल पंडाल में हिन्दी दिवस पर अन्तर्राष्ट्रीय कवि डा. वीरेन्द्र तरूण की स्मृति में आयोजित विशाल जनपदीय कवि सम्मेलन में हाथरस लोकसभा क्षेत्र के 5 दर्जन कवियों ने काव्य पाठ कर धूम मचा दी।
जनपदीय कवि सम्मेलन का उद्घाटन पूर्व केन्द्रीय मंत्री  रामजीलाल सुमन ने दीप प्रज्जवलित कर किया। मुख्य अतिथ बी.के. शांता बहिन, श्री वेद भगवान सनातन धर्मसभा के अध्यक्ष डा. जितेन्द्र स्वरूप शर्मा फौजी थे। मुख्य संचालक डा. गुरूदत्त भारतीय, अमृतसिंह पौनियां, चित्रकार थानसिंह कुशवाहा, श्यामधारा चैन्नई के अध्यक्ष हरीश अरोरा (बी.बी.जी.), राजेश सिंह गुड्डू, ब्रजेश वशिष्ठ, राज पचैरी, ताराचन्द्र माहेश्वरी आदि साथ थे।
मां सरस्वती की वंदना  संयोजक श्याम बाबू चिन्तन ने कर कवि सम्मेलन का शुरूआत की। डा. गुरूदत्त भारतीय के साथ संचालन का भार आशुकवि अनिल बौहरे, सुकवि चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य, कवयित्री मनु दीक्षित ने पूरी रात संभाल कर कवियों से कार्यक्रम में समां बंधवा दिया।
प्रत्येक वर्ष की भांति काव्य मंच विकास को समर्पित कवि को दिया जाने वाला 5100 रूपया की राशि प्रताप पुरस्कार इस वर्ष आशुकवि अनिल बौहरे को गवर्नमेंट पेंशनर्स वैलफेयर आर्गेनाइजेशन के अध्यक्ष अमृतसिंह पौनियां द्वारा जबकि 1100 रूपये का अन्तर्राष्ट्रीय कवि डा. वीरेन्द्र तरूण स्मृति सम्मान डा. एस. के. राजू को सहसंयोजक बालकवि विष्णु द्वारा तथा श्यामधारा प्रतियोगिता की सर्वश्रेष्ठ कवयित्री मनु दीक्षित को 1100 रूपये का दाऊ-रूकमनी सम्मान, राजा दयाराम स्मृति सम्मान सुकवि सुरेशचन्द्र पूर्व एबीएसए को, तहसीलदार श्यामलाल स्मृति विष्णुदयाल बजाज को, आचार्य रघुवीर प्रसाद त्रिवेदी स्मृति सम्मान बाबा देवीसिंह निडर को तथा अति श्रेष्ठ कवि विजय प्रकाश भारद्वाज को पं. मदन मोहन मिश्र स्मृति सम्मान पूर्व केन्द्रीय मंत्री रामजीलाल सुमन ने मेला मजिस्टेªट व एस.डी.एम. सदर राकेश कुमार गुप्ता तथा समन्यवक भूमि संरक्षण अधिकारी डा. राम प्रवेश के साथ प्रदान किये।
कवि सम्मेलन में मनु दीक्षित ने काव्य पाठ करते हुये कहा-‘देश की डूबती नैय्या कौन बचायेगा, घर-घर दुःशासन एक कृष्ण क्या कर पायेगा’।
उपजिलाधिकारी सदर सुकवि राकेश कुमार गुप्ता खूब जमे-‘मुझे खिलौना समझ के मम्मी बहलाओ, फुसलाओ ना, मुझे किसी बेजान वस्तु का, झूला समझ कर झुलाओ ना’।
समन्यवक भूमि संरक्षण अधिकारी डा. राम प्रवेश ने पढ़ा-‘हर चैराहे पर शमशान बनाया तो लोग सुधर जावेंगे’।
आशुकवि अनिल बौहरे-‘अनजान लाश को सर झुकाते, जान पहचान की लाश से नजरें चुराते’।
सहसंयोजक बालकवि विष्णु ने आशुकवि अनिल बौहरे के लिये यूं पढ़ा-‘धन्य-धन्य गुरू के चरण, इनकी धूल से खिले ज्ञान के फूल’।
चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य-‘दाऊ बाबा धरा पै आ जाइये, आग घर-घर बुझा जाइये।
कवयित्री कामिनी ठाकुर-‘इंसान में इंसानियत न रही, दुनिया मतलबी हुई’।
कवयित्री पूनम ठाकुर-‘मालिक मेरे जीवन की डोर तुम्हारे हाथों में, जीत-हार तुम्हारे हाथों में’। कवयित्री प्रियांशी ढाकरा-‘तब हमको अंगेजों ने लूटा, अब अपनों ने हमको लूटा’।
चित्रकार थानसिंह कुशवाहा-‘सब जानें मुझको पेंटर, पर हूं कवियों का भी सेंटर’।
अमृत सिंह पौनियां-‘सैकडों हाथ साथ श्यामधारा बढ रही है’।
तोताराम सरस इगलास-‘पैर जमीं पर टिके...हिन्दी से प्यार करें’।
श्रीप्रकाश सृजन इगलास-‘हाई सोसाइटी की बुराई हो गई, हिन्दी पराई हो गई’।
रसराज-‘सावन में घर-घर आता घेवर, खुश होती भाभी खिलाता देवर’।
जसवीर विधीपुर-‘जीवन में सुख चाहो तो धीरज में रहना सीखो’।
प्रमोद गोला-‘रिश्वत खोरी हर जगह, आज सरेआम हो गई’।
एस.के. वशिष्ठ-‘एक छोटा सा दीप जलाओ, अंधकार मिट जावेगा’।
ब्रजेश पंडित-‘बगिया की फुलवारी हिन्दी हमारी प्यारी’।
नूर मोहम्मद नूर सादाबाद-‘मान जाओ कहीं बैठकर बात करें’।
इनके अलावा सीमा अग्रवाल, गाफिल स्वामी, प्रदीप पंडित, सिकन्द्राराऊ से विवेकशील राघव, देवेश आंसू, प्रमोद विषधर, अवशेष कुमार, शिवकुमार, सादाबाद से सुरेश ठाकुर, हरिमान सिंह, बालकवि नैतिक दीक्षित, नाना हाथरसी, प्रभूदयाल दीक्षित, सुरेशचन्द्र शर्मा, देवी सिंह निडर, मनोज द्विवेदी, रमेश धमाका, मंगल पाण्डे, डा. प्रतिमा पांडेय, आर.के. काकू, चांद हुसैन, चांद, डा. वी.एम. भावुक, ब्रजेश मोहन रावत, किशोर कुमार शर्मा, महेश पागल, डा. कयूम खां, राकेश धूंआधार, रामभजनलाल, राकेश रसिक आदि ने काव्य पाठ किया।
व्यवस्था में बीना गुप्ता, जयशंकर पाराशर, नत्थीलाल पाराशर, सोमप्त भारद्वाज, संदीप जैन आदि थे। मंच व्यवस्था सह संयोजक कपिल नरूला ने की।

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