Top News

अस्तित्व की लड़ाई लड़ने को मजबूर हाथरस का हैंडलूम कारोबार

हाथरस। देश में कभी लघु उद्योगोंं के लिए हाथरस का नाम बहुत ही चर्चित था । जनपद हाथरस के लघु उद्योगोंं में हैंडलूम उद्योग का भी बड़ा नाम था । किसी समय में घर-घर में चलने वाला हैंडलूम का उद्योग मौजूदा हालात में सिसक कर दम तोड़ने को मजबूर है । इस उद्योग को अब केवल वहीं लोग कर रहे है, जो इसके अलावा और कोई काम नही जानते या फिर अपने बुजुर्गों के नाम को आगे बढ़ा रहे है । हैंडलूम का कारोबार करने वाले उप्र और केन्द्र सरकार पर इस और कोई ध्यान न देकर अपने साथ अन्याय करने का आरोप लगाते दिखाई दे रहे है । आप को बता दे कि करीब छह दशको से हाथरस में हैंडलूम का कारोबार होता आ रहा है । बढ़ती महगाई और योजनाओ के अभाव में इस उद्योग से लोग मुँह मोड़ रहे है । शहर से बुनकर मजदूर अन्य कार्यो के लिए दूसरे राज्यों में पलायन कर रहे है । हैंडलूम कारोबारियों को भी व्यापार के लिए राजनेताओ का सहयोग न मिलना किसी असहनीय पीड़ा से कम नहीं है । इस कारोबार को करने वाले लोगो का कहना था कि माल बहुत महंगा मिलता है, जिसके कारण जनपद हाथरस में उद्योग तरक्की नही कर पा रहा है । उप्र और केन्द्र सरकार से सहायता की दरकार थी लेकिन अब ये उम्मीद भी धूमिल होती दिखाई दे रही है । जनपद के करीब पांच हजार मजदूर और करीब दस हजार से ज्यादा लोग प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से हैंडलूम उद्योग से जुड़े है । हैंडलूम उद्योग से बड़ी संख्या में महिलाएं भी जुड़ी हुए है । हाथरस के पुराने हैंडलूम व्यापार से जुड़े लोगो को अब जीविका चलाने के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है । मजदूरों को मंहगाई का सामना करने के साथ ही कम मेहनताना मिलने जैसी समस्याओं से भी दो-चार होना पड़ता है । हैंडलूम कारोबार से जुड़कर जीवन-यापन करने वाले मजदूरों का कहना था कि अब इस कारोबार में मजदूरी मजबूरी में ही करना पड़ रही है । लम्बे समय से इससे जुड़े मजदूर जिन्हे अन्य कार्य भी नही आता वे इससे जुड़े रहना चाहते है । लेकिन ऐसे बुनकर कारीगरों को अपनी गरीबी और सरकारी सहायता न मिलने का मलाल भी है । एक मजदूर बताते है कि 15 साल से यही काम कर रहे है, और कोई काम आता ही नही है । कारोबार से मिलने वाली मजदूरी से ढ़ग से परिवार का पेट पालना भी मुश्किल होता जा रहा है । कुछ समय पहले तक देश के दूर-दराज इलाको में हाथरस की पहचान हैंडलूम के कारोबार से भी हुआ करती थी । हाथरस का हैंडलूम कारोबार अब अपनी पहचान और अस्तित्व को बचाने के लिए जूझता नजर आ रहा है । केंद्र सरकार हो या यूपी सरकार उद्योगोंं को बढ़ावा देने की बात कहती तो है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई सुविधा ऐसे कारोबारों को नही मिल पाती है । जिससे सरकार के दावे महज औपचारिकता बनते दिखाई दे रहे है ।

Post a Comment

जयहिंद मीडिया नेटवर्क में अपनी बात रखने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद।

और नया पुराने