हाथरस/सासनी। कस्बा में अक्रूर विद्यालय पथवारी मंदिर के निकट हवन यज्ञ एवं भव्य कलश शोभायात्रा के साथ श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव का आयोज शुरू किया गया। इस दौरान आचार्य पं0 राकेश शर्मा शास्त्री जी द्वारा धंुधकारी और गोकर्ण की कथा का रोचक वर्णन कर श्रीमद्भागवत कथा श्रवण को ही मोक्ष मार्ग बताया।
बुधवार को मोहल्ला पथवारी से निकाली गई भव्य कलश शोभायात्रा कस्बा के विभिन्न मागों से होते हुए पुनः श्रीमद्भागवत कथा स्ािल पर पहुंची जहां आचार्य द्वारा गोकर्ण एवं धुंधकारी की कथा का वर्णन करते हुए कहा कि धंुधंकारी आतंकी स्वभावक का था वह हर वक्त कुछ न कुछ पाप करने को तत्पर रहता था और भाई गोकर्ण एक सत्पुरूष की भांति अपने जीवन को व्यतीत करते हुए श्री हरि में ध्यान लगाए रहता था। जब धुंधकारी की मौत हुई तो उसे मोक्ष नहीं मिल सका। तब गोकर्ण ने श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया। जिसे धुंधकारी ने एक खोखले बांस में बैठकर सुना क्यों कि पापी होने के कारण उसको कथा श्रवण की जगह नहीं मिली थी। कथा श्रवण कर धुंधकारी को मोक्ष प्राप्त हुआ। तब आचार्य ने बताया कि कथा श्रवण ही मोक्ष का सरल और सुलभ मार्ग है। इस दौरान राजा परीक्षित बने एमपी कुशवाहा तथा रानी बनी उनकी पत्नी के साथ-साथ पन्नालाल उपाध्याय, उदयवीर सिंह, राजूसेठ गोतना, कमला प्रसाद, नारायण मैम्बर, राजेश कुमार, संजीव कुमार, नवीन कुमार, महक वाष्र्णेय, नकुल कुमार, विजय कुमार एवं कस्बा के श्रोतागण मौजूद थे।
बुधवार को मोहल्ला पथवारी से निकाली गई भव्य कलश शोभायात्रा कस्बा के विभिन्न मागों से होते हुए पुनः श्रीमद्भागवत कथा स्ािल पर पहुंची जहां आचार्य द्वारा गोकर्ण एवं धुंधकारी की कथा का वर्णन करते हुए कहा कि धंुधंकारी आतंकी स्वभावक का था वह हर वक्त कुछ न कुछ पाप करने को तत्पर रहता था और भाई गोकर्ण एक सत्पुरूष की भांति अपने जीवन को व्यतीत करते हुए श्री हरि में ध्यान लगाए रहता था। जब धुंधकारी की मौत हुई तो उसे मोक्ष नहीं मिल सका। तब गोकर्ण ने श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया। जिसे धुंधकारी ने एक खोखले बांस में बैठकर सुना क्यों कि पापी होने के कारण उसको कथा श्रवण की जगह नहीं मिली थी। कथा श्रवण कर धुंधकारी को मोक्ष प्राप्त हुआ। तब आचार्य ने बताया कि कथा श्रवण ही मोक्ष का सरल और सुलभ मार्ग है। इस दौरान राजा परीक्षित बने एमपी कुशवाहा तथा रानी बनी उनकी पत्नी के साथ-साथ पन्नालाल उपाध्याय, उदयवीर सिंह, राजूसेठ गोतना, कमला प्रसाद, नारायण मैम्बर, राजेश कुमार, संजीव कुमार, नवीन कुमार, महक वाष्र्णेय, नकुल कुमार, विजय कुमार एवं कस्बा के श्रोतागण मौजूद थे।
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