हाथरस/सादाबाद। दो दिन की रामकथा के पड़ाव के बाद आज तीसरे दिन श्रीराम कथा का शुभारम्भ पूर्व मंत्री ठा0 जयवीर सिंह एवं उपाध्याय परिवार ने दीप प्रज्वलित कर एवं पूज्य विजय कौशल जी महाराज को पुष्प अर्पित कर किया। ट्रैफिक व्यवस्था के लिए प्रभारी निरीक्षक बलवीर सिंह खुद फोर्स के साथ लगे रहे। वही भगवान श्रीराम जन्म कथा के उपरान्त आये भक्तों को रामगंगा में डुबकी लगाते हुए पूज्य संत विजय कौशल जी महाराज द्वारा रामविवाह की कथा कही पूजन की कर तैयारी आयी जनक की लली बहुत ही सुन्दर वर्णन किया। उपस्थित माता, बहनें, युवा व बुजुर्ग बीच-बीच में झूमने और नाचने को मजबूर हो जाते थे। ऐसा दृश्य सामने आता था कि मानों सादाबाद की पावन भूमि जनकपुरी हो गयी।
महाराज जी ने भगवान श्रीराम के बाल चरित्र का भी वर्णन किया। बचपन से ही भगवान श्रीराम बहुत ही मर्यादावादी थे। वह सुबह उठकर ही अपने मातापिता के चरण स्पर्श किया करते थे गुरूजनों को भी प्रणाम किया करते थे।
इसी पर ही महाराज जी ने कहा कि जिसने माता पिता का आर्शीवाद लिया उन्हें किसी तीर्थ की जरूरत नही। भगवान कहते है कि जीवित भगवान को ठुकरा कर पत्थर की मूर्ती से कैसा आर्शीवाद। प्रथम माता ने चरणों से आर्शीवाद मिलता, दूसरा पिता के चरणों से आर्शीवाद मिलता तथा तीसरा आर्शीवाद गुरू के चरणों से प्राप्त होता है और चैथा आर्शीवाद कहीं से नही मिलता।
‘‘प्रातः काल उठके रघुनाथा, मात पिता गुरू नावही माथा’’
बहुत ही मार्मिक वर्णन माॅ और पिता के रिश्तों पर चित्रण किया। जितने श्रद्धालु थे सभी कई बार भावुक हुए।
गुरू महिमा पर भी प्रकाश डालते हुए कहा किसी न किसी छत्रछाया अपने ऊपर रखनी चाहिए अगर आप रखते तो माता पिता को सिर पर रखे अगर आप विवाहित है तो अपने बच्चों को सिर पर रखे अगर आप साठ वर्ष के ऊपर है तो किसी ऐसे सन्त को जिनके प्रति आपके मन में श्रद्धा है, आदर है या अपने गुरू को अपने सिर पर रखे तो आप इस संसार में विषय वासनाओं से बच जायेगे।
‘‘पाप खत्म करने में ताकत मत लगाइयें, पुण्य प्रारम्भ कर देने चाहिए पाप अपने आप खत्म हो जायेगा’’
‘‘भजन करना है, तो जवानी में करों बुजुर्ग होने पर स्वास्थ्य अनुमति नही देता है’’
भक्तों को सचेत करते हुए कहा कि आज कल गुरू कम गुरूघन्टाल ज्यादा मिलता है, जो कष्ट तो नही काट सकते लेकिन जेब कष्ट काट लेते है। प्रतिदिन प्रति व्यक्ति को गंगा स्नान करना चाहिए। गंगा कैसे आपके घर आयेगी स्नान की बाल्टी जब सामने हो तो बोलो हर हर गंगे, जय शिवशंकर आपको गंगा नहाने का प्रसाद प्राप्त होगा।
ठा0 जयवीर सिंह ने कहा कि बड़े सौभाग्यशाली है रामवीर उपाध्याय जी जिन्हें विश्वविख्यात संत कथा वाचक पूज्य श्री विजय कौशल जी महाराज का आर्शीवाद प्राप्त हुआ है। रामवीर उपाध्याय किसी राज परिवार या जंमीदार न होते हुए भी अपने कार्यो एवं साहस के बल पर संघर्ष करते हुए प्रदेश में एक बहुत बड़ा नाम हासिल किया है।
कथा में सतेन्द्र शर्मा, बौबी पहलवान (जि.पं.स.), इन्द्रजीत कुशवाह (जि.पं.स.), प्रमोद कुमार संजय (जि.पं.स.), गप्पू गौतम, डा0 ज्वाला सिंह, सुभाष शर्मा, सतीश शर्मा, अरूण शर्मा, शिब्बों पण्डित, शिवनारायण तिवारी, दामोदर प्रधान, जगदीश गौतम, विन्टा गौतम, रामवती बघेल, ओमप्रकाश बघेल, सुरेन्द्र पाराशर, कुंजल सिंह एड0, विष्णु अग्रवाल, रामवीर गौतम, रमेश चन्द्र गौतम, नीरज मिश्रा (पूर्व मंत्री), महावीर गौतम, चै0 रामवीर फौजी, चै0 सुल्तान सिंह, चै0 लक्ष्मीनारायन, चै0 श्यामवीर सिंह, चै0 प्रेमपाल सिंह, चै0 कृष्णमुरारी, चै0 सत्यवीर ठैनुआ, विजय गौतम, चै0 बच्चू सिंह, चै0 लक्ष्मण सिंह प्रधान, चै0 दीपचंद, चै0 वर्मा जी, चै0 वीरी सिंह, गुलाब कुशवाह, दिनेश भारती, बौबी, भटेले, अमित शर्मा (कान्हा), चै0 राहुल, चै0 नौरंग, चै0 बहाव सिंह, चै0 लाल बहादुर एवं हजारों की संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे।
महाराज जी ने भगवान श्रीराम के बाल चरित्र का भी वर्णन किया। बचपन से ही भगवान श्रीराम बहुत ही मर्यादावादी थे। वह सुबह उठकर ही अपने मातापिता के चरण स्पर्श किया करते थे गुरूजनों को भी प्रणाम किया करते थे।
इसी पर ही महाराज जी ने कहा कि जिसने माता पिता का आर्शीवाद लिया उन्हें किसी तीर्थ की जरूरत नही। भगवान कहते है कि जीवित भगवान को ठुकरा कर पत्थर की मूर्ती से कैसा आर्शीवाद। प्रथम माता ने चरणों से आर्शीवाद मिलता, दूसरा पिता के चरणों से आर्शीवाद मिलता तथा तीसरा आर्शीवाद गुरू के चरणों से प्राप्त होता है और चैथा आर्शीवाद कहीं से नही मिलता।
‘‘प्रातः काल उठके रघुनाथा, मात पिता गुरू नावही माथा’’
बहुत ही मार्मिक वर्णन माॅ और पिता के रिश्तों पर चित्रण किया। जितने श्रद्धालु थे सभी कई बार भावुक हुए।
गुरू महिमा पर भी प्रकाश डालते हुए कहा किसी न किसी छत्रछाया अपने ऊपर रखनी चाहिए अगर आप रखते तो माता पिता को सिर पर रखे अगर आप विवाहित है तो अपने बच्चों को सिर पर रखे अगर आप साठ वर्ष के ऊपर है तो किसी ऐसे सन्त को जिनके प्रति आपके मन में श्रद्धा है, आदर है या अपने गुरू को अपने सिर पर रखे तो आप इस संसार में विषय वासनाओं से बच जायेगे।
‘‘पाप खत्म करने में ताकत मत लगाइयें, पुण्य प्रारम्भ कर देने चाहिए पाप अपने आप खत्म हो जायेगा’’
‘‘भजन करना है, तो जवानी में करों बुजुर्ग होने पर स्वास्थ्य अनुमति नही देता है’’
भक्तों को सचेत करते हुए कहा कि आज कल गुरू कम गुरूघन्टाल ज्यादा मिलता है, जो कष्ट तो नही काट सकते लेकिन जेब कष्ट काट लेते है। प्रतिदिन प्रति व्यक्ति को गंगा स्नान करना चाहिए। गंगा कैसे आपके घर आयेगी स्नान की बाल्टी जब सामने हो तो बोलो हर हर गंगे, जय शिवशंकर आपको गंगा नहाने का प्रसाद प्राप्त होगा।
ठा0 जयवीर सिंह ने कहा कि बड़े सौभाग्यशाली है रामवीर उपाध्याय जी जिन्हें विश्वविख्यात संत कथा वाचक पूज्य श्री विजय कौशल जी महाराज का आर्शीवाद प्राप्त हुआ है। रामवीर उपाध्याय किसी राज परिवार या जंमीदार न होते हुए भी अपने कार्यो एवं साहस के बल पर संघर्ष करते हुए प्रदेश में एक बहुत बड़ा नाम हासिल किया है।
कथा में सतेन्द्र शर्मा, बौबी पहलवान (जि.पं.स.), इन्द्रजीत कुशवाह (जि.पं.स.), प्रमोद कुमार संजय (जि.पं.स.), गप्पू गौतम, डा0 ज्वाला सिंह, सुभाष शर्मा, सतीश शर्मा, अरूण शर्मा, शिब्बों पण्डित, शिवनारायण तिवारी, दामोदर प्रधान, जगदीश गौतम, विन्टा गौतम, रामवती बघेल, ओमप्रकाश बघेल, सुरेन्द्र पाराशर, कुंजल सिंह एड0, विष्णु अग्रवाल, रामवीर गौतम, रमेश चन्द्र गौतम, नीरज मिश्रा (पूर्व मंत्री), महावीर गौतम, चै0 रामवीर फौजी, चै0 सुल्तान सिंह, चै0 लक्ष्मीनारायन, चै0 श्यामवीर सिंह, चै0 प्रेमपाल सिंह, चै0 कृष्णमुरारी, चै0 सत्यवीर ठैनुआ, विजय गौतम, चै0 बच्चू सिंह, चै0 लक्ष्मण सिंह प्रधान, चै0 दीपचंद, चै0 वर्मा जी, चै0 वीरी सिंह, गुलाब कुशवाह, दिनेश भारती, बौबी, भटेले, अमित शर्मा (कान्हा), चै0 राहुल, चै0 नौरंग, चै0 बहाव सिंह, चै0 लाल बहादुर एवं हजारों की संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे।
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