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हाथरस/सादाबाद- माता-पिता की सेवा से बड़ा कोई तीर्थ नहीः विजय कौशल जी, श्रीराम कथा में उमड़ रहा है भक्तों का सैलाव

हाथरस/सादाबाद। आगरा-अलीगढ़ रोड स्थित रामवती भवन के बराबर विशाल पंडाल में श्री रामकथा के तीसरे दिन प्रख्यात संत विजय कौशल जी महाराज ने श्रीराम कथा को जीवन में आत्मसात करने पर बल दिया। रामायण के आदर्श चरित्रों का जिक्र करते हुए माता-पिता की सेवा के साथ नारी के सम्मान को लेकर ऐसी कथा सुनाई कि हर कोई भाव विभोर हो गया।
श्रीराम कथा का रसपान करने के लिए पूर्व मंत्री ठाकुर जयवीर सिंह भी पहुंचे और उन्होंने दीप जलाकर व विजय कौशल जी महाराज का सम्मान कर कथा का शुभारम्भ किया। लोकलेखा समिति के सभापति व विधायक एवं पूर्व ऊर्जा ंमंत्री रामवीर उपाध्याय व पूर्व सांसद सीमा उपाध्याय ने विशिष्ट अतिथियों का स्वागत किया।
धर्मसंघ अध्यक्ष सुरेश चन्द्र मिश्र के सानिध्य में पंडित हरिबल्लभ वेदपाठी, पंडित बागीश दत्त गौड़, पंडित पवन कुमार पालीवाल, पंडित नितिन वेदपाठी, पंडित योगेश वेदपाठी, पंडित अंकित वेदपाठी, पंडित विशाल वेदपाठी, पंडित अमित वेदपाठी, अध्यक्ष वेद भगवान सनातन धर्मसभा पंडित जितेन्द्र स्वरूप शर्मा फौजी आदि ने श्रीराम महायज्ञ सम्पन्न कराया। विजय कौशल महाराज ने भक्तों को आशीर्वाद  दिया।
कथा में विजय कौशल जी महाराज ने माता-पिता की सेवा के महत्व पर प्रकाश डाला व नारी सम्मान पर भी श्रोताओं को आईना दिखाया। मकान को घर बनाने के लिए नारी की अहमियत बताई। विजय कौशल जी ने कहा कि भगवान शास्त्र के लिए जन्म लेते हैं। यज्ञ में व्यवधान पर राक्षसों का वध, सीता स्वयंवर आदि लीलाओं तथा भगवान श्रीराम के बाल चरित्र का रोचक वर्णन किया। उन्होंने कहा कि बचपन से ही भगवान श्रीराम मर्यादावादी थे। वह सुबह उठकर सबसे पहले माता-पिता के चरण स्पर्श किया करते थे व गुरुजनों को प्रणाम किया करते थे। श्रीराम के विवाह वर्णन के दौरान उपस्थित माताएं, बहनें, युवा व बुजुर्ग बीच-बीच में झूमने और नाचने को मजबूर हो जाते थे। आचार्य ने कहा कि माता-पिता की सेवा से बड़ा कोई तीर्थ नहीं। जीवित भगवान को ठुकरा कर मंदिर जाकर किसी इच्छापूर्ति की कामना करना व्यर्थ है। प्रथम माता के चरणों से व दूसरा पिता व तीसरा आशीर्वाद गुरु के चरणों से प्राप्त होता है और चैथा आशीर्वाद कहीं से नहीं मिलता।
गुरु की महिमा पर प्रकाश डालते हुए आचार्य ने कहा किसी न किसी की छत्रछाया अपने ऊपर रखनी चाहिए। पापों को नष्ट करने के प्रयास से बेहतर है कि आप पुण्यार्जन पर ध्यान दें। पुण्यों से पाप अपने आप नष्ट हो जाएंगे। स्नान से पहले मां गंगा का स्मरण करना, गंगा स्नान सरीखा पुण्य प्रदान करता है।
इस अवसर पर सतेन्द्र शर्मा, जिपं सदस्य बौबी पहलवान, जिपं सदस्य इन्द्रजीत कुशवाहा, जाकिर खान, जि.पं.सदस्य प्रमोद कुमार संजय, गप्पू गौतम, डा. ज्वाला सिंह, सुभाष शर्मा, सतीश शर्मा, अरुण शर्मा, शिब्बों पण्डित, शिवनारायण तिवारी, दामोदर प्रधान, जगदीश गौतम, मई प्रधान रामेश्वर सारस्वत, बीएस उपाध्याय, नागेश शर्मा, योगेश गौतम, रामवती बघेल, ओमप्रकाश बघेल, सुरेन्द्र पाराशर, कुंजल सिंह एड., विष्णु अग्रवाल, रामवीर गौतम, रमेश चन्द्र गौतम, नीरज मिश्रा (पूर्व मंत्री), महावीर गौतम, चै. रामवीर फौजी, चै. सुल्तान सिंह, चै.लक्ष्मीनारायन, चै. श्यामवीर सिंह, चै. प्रेमपाल सिंह, चै. कृष्णमुरारी, चै.सत्यवीर ठेनुंआ, विजय गौतम, चै. बच्चू सिंह, चै. लक्ष्मण सिंह प्रधान, चै. दीपचंद आदि मौजूद थे।

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