सिकन्दराराव। जहाँ एक ओर केंद्र सरकार पूरे भारत को खुले में शौच मुक्त करने को लेकर गंभीर नजर आ रही है। सरकार इसके लिए हर आवश्यक कदम उठा रही है। लेकिन सरकार का मखौल उड़ाने में स्थानीय रेलवे विभाग पीछे नहीं हट रहा है।
बता दे कि स्थानीय रेलवे स्टेशन पर रेलवे द्वारा यात्रियों के लिए लाखों की कीमत के स्टेशन पर शौचालय बनाए गए हैं। किंतु यह लाखों की कीमत के शौचालय लोगों के लिए शो पीस बने हुए है। स्टेशन मास्टर की तानाशाही के चलते शौचालयों पर ताले लटका दिए गए हंैं। शौचालयों पर ताला लटका होने के कारण महिला व पुरुष यात्रियों को भारी समस्याओं से जूझना पड़ता है। शौचालयों पर ताला लगा होने के कारण महिला यात्रियों को मजबूरन स्टेशन परिसर के बाहर खुले में शौच आदि करना पड़ता है। यही नहीं स्टेशन मास्टर ने शौचालयों बंद कर उस पर एक सूचना चस्पा की है कि यात्री को शौच आदि के लिए शौचालय का प्रयोग करना है तो वह पहले स्टेशन मास्टर के पास आकर अपना यात्री टिकट दिखाएं तब बाद में उसे शौचालय की चाबी दी जाएगी। स्टेशन मास्टर की इस तानाशाही के चलते दैनिक यात्रियों में स्टेशन मास्टर व विभाग के प्रति भारी रोष व्याप्त है। लोगांे का कहना है कि शायद सरकार ने ये शौचालयों का निर्माण धूल फाँकने को कराया है।
बता दे कि स्थानीय रेलवे स्टेशन पर रेलवे द्वारा यात्रियों के लिए लाखों की कीमत के स्टेशन पर शौचालय बनाए गए हैं। किंतु यह लाखों की कीमत के शौचालय लोगों के लिए शो पीस बने हुए है। स्टेशन मास्टर की तानाशाही के चलते शौचालयों पर ताले लटका दिए गए हंैं। शौचालयों पर ताला लटका होने के कारण महिला व पुरुष यात्रियों को भारी समस्याओं से जूझना पड़ता है। शौचालयों पर ताला लगा होने के कारण महिला यात्रियों को मजबूरन स्टेशन परिसर के बाहर खुले में शौच आदि करना पड़ता है। यही नहीं स्टेशन मास्टर ने शौचालयों बंद कर उस पर एक सूचना चस्पा की है कि यात्री को शौच आदि के लिए शौचालय का प्रयोग करना है तो वह पहले स्टेशन मास्टर के पास आकर अपना यात्री टिकट दिखाएं तब बाद में उसे शौचालय की चाबी दी जाएगी। स्टेशन मास्टर की इस तानाशाही के चलते दैनिक यात्रियों में स्टेशन मास्टर व विभाग के प्रति भारी रोष व्याप्त है। लोगांे का कहना है कि शायद सरकार ने ये शौचालयों का निर्माण धूल फाँकने को कराया है।
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