हाथरस। जी.एस.टी कर प्रणाली में ईंट भट्टों पर समाधान योजना लागू करने तथा स्वच्छता प्रमाण पत्र लेने की बाध्यता को समाप्त करने की मांग को लेकर आज हाथरस जिला ब्रिक क्लिन एसोसियेशन के बैनरतले ईंट भट्टा व्यापारियों ने मुख्यमंत्री व वित्तमंत्री के नाम कलेक्ट्रेट प्रभारी को ज्ञापन सौंपा गया और उत्पीड़न व शोषण से मुक्ति दिलाने की मांग की।
जिले भर के ईंट भट्टा व्यवसायी आज उ.प्र. ईंट निर्माता समिति लखनऊ के प्रदेश उपाध्यक्ष कमल गोयल व हाथरस जिला ब्रिक क्लिन एसोसियेशन के जिलाध्यक्ष मुकेश दीक्षित के नेतृत्व में कलेक्ट्रेट प्रभारी से मिले और उन्हें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं वित्त व राजस्व मंत्री राजेश अग्रवाल के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कहा गया है कि ईंट भट्टों पर बिक्री कर/व्यापार कर समाधान योजना सीजन वर्ष 1988-89 से 2016-17 तक लगातार सफलतापूर्वक प्रभावी है। योजना स्वीकार करने वाली भट्टा इकाई पाये की संख्या के अनुसार निर्धारित समाधान कर राशि योजना अंतर्गत निर्देशों के अधीन जमा करती है। वर्ष 2008 में मूल्य संवर्द्धित कर प्रणाली लागू होने पर प्रारम्भ में विभाग द्वारा ईंट भट्टों पर समाधान योजना लागू नहीं किये जाने पर सरकार को ईंट उद्योग से प्राप्त होने वाला राजस्व आधा हो गया था।
ईंट निर्माता सीधे ग्राहकों को अपना उत्पाद अर्थात ईंटों की बिक्री करता है। इसमें कोई बिचैलिया नहीं होता। ईंटों की बिक्री का क्षेत्र मुख्यतः इकाई के स्थापना स्थल से समीपवर्ती जनपदों के सीमावर्ती क्षेत्र तक ही सीमित होता है। यह दि जीएसटी के अन्तर्गत 75 लाख तक के टर्न ओवर पर स्वतः समाधान योजना प्रभावी रहने का प्रावधान किया गया है। भट्टा ग्रामीण प्रकृति का सीजनल व्यापार है जिसे चलाने वाले लोग कम पढे लिखे होते हैं। आॅन लाइन प्रतिमाह तीन और वार्षिक रिटर्न सहित वर्ष में 37 रिटर्न दाखिल करना बहुत ही मुश्किल, पीडादायी व अव्यवहारिक है ऐसी दशा में समाधान योजना लागू होने से जहां एक और सरकार को सुनिश्चित राजस्व की प्राप्ति होती रहेगी। वहीं दूसरी ओर विभाग में अपीलीयवादों, वसूली खर्चो, अभिलेखीय जांच परताल आदि से भी पूरी तरह निजात मिलेगी।
केन्द्रीय वन पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय भारत सरकार के मामलों में पर्यावरणीय अनापत्ति की अपेक्षा से छूट का प्रावधान है जिसके बिन्दु 11 के अनुसार ऐसे कार्यकलाप जिन्हें राज्य सरकार द्वारा विधान व नियमों के अधीन गैर खननकारी घोषित किया गया हो पर पूर्व पर्यावरणीय अनापत्ति की अपेक्षा नहीं होगी और ऐसे नियमों की सहमति एम.ओ.ई.एफ. से ली गई हो।
उन्होंने मांग की है कि उद्यमियों का विभागीय उत्पीडन से बचाव और सरकार के सुरक्षित राजस्व संग्रह हित में जीएसटी कर प्रणाली में ईंट भट्टों पर समाधान योजना लागू किये जाने तथा प्रावधान के अनुसार उ.प्र. माइनर मिनरल कंसेशन रूल्स 1963 के 33 वें व 37 वें संशोधन के तहत विनिर्मित नियमों पर केन्द्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से अनुमोदन प्राप्त करने हेतु यथा योग्य को निर्देशित कर ईंट भट्टों को पर्यावरणीय स्वच्छता प्रमाण पत्र लेने की बाध्यता से मुक्त होने के मार्ग को प्रशस्त करें। जिससे प्रदेश का ईंट भट्टा व्यापार सुचारू रूप से चलते हुये प्रदेश के विकास में अपना योगदान कर सके।
ज्ञापन देने वालों में विनोद माहेश्वरी, संजीव अग्रवाल, सुरेश यादव, सुल्तान सिंह, मुकेश पण्डित, विकास यादव, जितेन्द्र पंडित, ललित गौतम आदि शामिल थे।
जिले भर के ईंट भट्टा व्यवसायी आज उ.प्र. ईंट निर्माता समिति लखनऊ के प्रदेश उपाध्यक्ष कमल गोयल व हाथरस जिला ब्रिक क्लिन एसोसियेशन के जिलाध्यक्ष मुकेश दीक्षित के नेतृत्व में कलेक्ट्रेट प्रभारी से मिले और उन्हें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं वित्त व राजस्व मंत्री राजेश अग्रवाल के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कहा गया है कि ईंट भट्टों पर बिक्री कर/व्यापार कर समाधान योजना सीजन वर्ष 1988-89 से 2016-17 तक लगातार सफलतापूर्वक प्रभावी है। योजना स्वीकार करने वाली भट्टा इकाई पाये की संख्या के अनुसार निर्धारित समाधान कर राशि योजना अंतर्गत निर्देशों के अधीन जमा करती है। वर्ष 2008 में मूल्य संवर्द्धित कर प्रणाली लागू होने पर प्रारम्भ में विभाग द्वारा ईंट भट्टों पर समाधान योजना लागू नहीं किये जाने पर सरकार को ईंट उद्योग से प्राप्त होने वाला राजस्व आधा हो गया था।
ईंट निर्माता सीधे ग्राहकों को अपना उत्पाद अर्थात ईंटों की बिक्री करता है। इसमें कोई बिचैलिया नहीं होता। ईंटों की बिक्री का क्षेत्र मुख्यतः इकाई के स्थापना स्थल से समीपवर्ती जनपदों के सीमावर्ती क्षेत्र तक ही सीमित होता है। यह दि जीएसटी के अन्तर्गत 75 लाख तक के टर्न ओवर पर स्वतः समाधान योजना प्रभावी रहने का प्रावधान किया गया है। भट्टा ग्रामीण प्रकृति का सीजनल व्यापार है जिसे चलाने वाले लोग कम पढे लिखे होते हैं। आॅन लाइन प्रतिमाह तीन और वार्षिक रिटर्न सहित वर्ष में 37 रिटर्न दाखिल करना बहुत ही मुश्किल, पीडादायी व अव्यवहारिक है ऐसी दशा में समाधान योजना लागू होने से जहां एक और सरकार को सुनिश्चित राजस्व की प्राप्ति होती रहेगी। वहीं दूसरी ओर विभाग में अपीलीयवादों, वसूली खर्चो, अभिलेखीय जांच परताल आदि से भी पूरी तरह निजात मिलेगी।
केन्द्रीय वन पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय भारत सरकार के मामलों में पर्यावरणीय अनापत्ति की अपेक्षा से छूट का प्रावधान है जिसके बिन्दु 11 के अनुसार ऐसे कार्यकलाप जिन्हें राज्य सरकार द्वारा विधान व नियमों के अधीन गैर खननकारी घोषित किया गया हो पर पूर्व पर्यावरणीय अनापत्ति की अपेक्षा नहीं होगी और ऐसे नियमों की सहमति एम.ओ.ई.एफ. से ली गई हो।
उन्होंने मांग की है कि उद्यमियों का विभागीय उत्पीडन से बचाव और सरकार के सुरक्षित राजस्व संग्रह हित में जीएसटी कर प्रणाली में ईंट भट्टों पर समाधान योजना लागू किये जाने तथा प्रावधान के अनुसार उ.प्र. माइनर मिनरल कंसेशन रूल्स 1963 के 33 वें व 37 वें संशोधन के तहत विनिर्मित नियमों पर केन्द्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से अनुमोदन प्राप्त करने हेतु यथा योग्य को निर्देशित कर ईंट भट्टों को पर्यावरणीय स्वच्छता प्रमाण पत्र लेने की बाध्यता से मुक्त होने के मार्ग को प्रशस्त करें। जिससे प्रदेश का ईंट भट्टा व्यापार सुचारू रूप से चलते हुये प्रदेश के विकास में अपना योगदान कर सके।
ज्ञापन देने वालों में विनोद माहेश्वरी, संजीव अग्रवाल, सुरेश यादव, सुल्तान सिंह, मुकेश पण्डित, विकास यादव, जितेन्द्र पंडित, ललित गौतम आदि शामिल थे।
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