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वे रूकेंगें, थकेंगें, झुकेंगे नहीं, जिनके सर पर बुजुर्गो का आशीष है.....


सिकन्दराराव। हनुमान जयन्ती के अवसर पर नगर के मौहल्ला हुरमतगंज स्थित बिमल बाजार पर एक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी की अध्यक्षता डा0 हरिमोहन यादव ने तथा संचालन विवेकशील राघव ने किया। कार्यक्रम का शुभारम्भ मां सरस्वती एवं हनुमान जी के छवि चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलन कर किया गया। कवि गोष्ठी में वरिष्ठ कवि कुंवरपाल शर्मा कुंवर ने मां सरस्वती एवं हनुमान जी की वन्दना प्रस्तुत की। इसके पश्चात सतेन्द्र भारद्वाज ने भक्तिमय काव्य पाठ करते हुये कहा कि
                 किसी ने फिर कहा मुझसे, अनारी कुछ और आगे चल
                 मिलेगा श्याम का दर्शन यहां तुझको जरा सा है।
इसके बाद ओमप्रकाश सिंह ने व्यंग्यात्मक कविता पढकर श्रोताओं को इस प्रकार से गुदगुदाया-
                 छोटे-छोटे बन्दर हनुमान हो गये
                 माटी के पुतले भी भगवान हो गये।
राजबहादुर सिंह ने अपनी कविता कुछ यूं पढी-
                 पता नहीं संचित कर्मो का, कब कैसे चुकतान हुआ
                 सारा खेल मेरे कर्मो का, फिर र्इश्वर क्यों बदनाम हुआ।
वहीं युवा कवि एवं पत्रकार विवेकशील राघव ने बुजुर्गो के महत्व पर कुछ इस प्रकार से प्रकाश डाला-
                 गर्व से उनका तनता सदा शीश है, साथ देता सदा उनका जगदीश है।
                 वे रूकेंगें, थकेंगें, झुकेंगे नहीं, जिनके सर पर बुजुर्गो का आशीष है।
वातावरण को बदलते हुये प्रमोद विशधर ने नारी अस्मिता से खिलवाड करने वालों को इस प्रकार से धिक्कारते हुये कहा कि-
                 जिससे जन्म पुरूष ने पाया, उसकी लाज मिटी कैसे।
                 बोलो गंगा जल में से अब, मदिरा गंध उठी केसे।।
बलवीर सिंह पौरूष ने हनुमान जयंती के अवसर पर अपनी रचना यूं गुनगुनायी-
                 साल दर साल यू ंतो मनती है बात बिगडी हुयी भी बनती है।
                 देखो घर-घर में और मन्दि में, आज हनुमान की जयन्ती है।।
कवि गोष्ठी के अन्त में साहित्य मंडल श्रीनाथ द्वारा ब्रजभाषा विभूषण से सम्मानित कवि कुंवरपाल शर्मा कुंवर ने ब्रजभाषा के छन्दों के माध्यम से हनुमान की मां अंजनि के दूध का गुणगान कुछ इस अंदाज में किया-
                  हनुमान तेरौ धिक जीवन है तेरे होते भये प्रभु कष्ट उठायौ।
                  इनके ही लिए मैं ने जायौ लला इनके हित ही निज दूध पिलायौ।।
                  फिर करहे रावन मारि अकेले ही लंक उखारि सियै संग लायौ।
                  बल तेरौ कपूत कहां पै गयौ बनि कायर जो मेरौ दूध लजायौ।।
कवि गोष्ठी में कवियों की रचनाएं सुनकर श्रोता मुग्ध हो गये और उनके मुंह से बार-बार बहुत सुन्दर बहुत सुन्दर एवं बाह वाह की आवाजे आती रही। कवि गोष्ठी में प्रमुख रूप से प्रशान्त विक्रम शाह, ज्ञानेन्द्र सिंह पौरूष, राजवीर सिंह फौजी, महावीर सिंह यादव, रवेन्द्र सिंह, छोटेलाल शर्मा, ओमप्रकाश वर्मा, वैभव, श्रेयस आदि लोग उपस्थित थे।

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