हाथरस (हाथरस लाइव डोट कोम ब्यूरो)। पहले सुपारी, फिर पानमसाला, पान और तम्बाकू कब मुँह लग गया पता ही नहीं पड़ता। बार-बार किया अभ्यास ऐसा पक्का हो जाता है कि एक बार भोजन न मिले तो चल जायेगा लेकिन गुटखा या तम्बाकू न मिले तो जैसे कि जान निकल जायेगी। यह काम निरक्षर ही नहीं अच्छे साक्षर भी आज कर रहे हैं। आत्मबल बढे़ और संग में सुधार हो तो यह आदत छूट सकती है। शिक्षकों का पहला कत्र्तव्य तो स्वयं उदाहरण बनना है यदि शिक्षक ही व्यसनों का उपयोग करेंगे तो उन्हें देखकर हजारों करेंगे। उक्त उदगार प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईष्वरीय विष्व विद्यालय के अलीगढ़ रोड स्थित आनन्दपुरी केन्द्र की राजयोग षिक्षिका बी.के. षान्ता बहिन ने बागला महाविद्यालय के बी.एड. प्रभाग में राश्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में व्यक्त किये।
उन्होंने कहा कि भारत में कैंसर का एक प्रमुख कारण तम्बाकू ही है। हांलाकि किसी भी षिक्षण संस्थान के 100 मीटर के दायरे में कोई भी तम्बाकू उत्पाद बेचना अपराध है फिर भी ये पदार्थ आज की युवा पीढ़ी को सहज ही उपलब्ध हो जाते हैं। बच्चे भी बड़ों से देखकर सीखते हैं। फिर चोरी छिपे षुरू हुआ यह सिलसिला अन्तिम यात्रा के साथ सम्पन्न होता है। उन्होंने व्यसनों से बचने के लिए जीवन में अध्यात्म को धारण करने का आव्हान करते हुए सभी को आत्मदर्षन और परमात्म दर्षन प्रदर्षनी का अवलोकन कराते हुए हिन्दू मुस्लिम सिक्ख इसाई आत्मा रूप में भाई भाई की प्रेरणा प्रदान की।
इससे पूर्व मेडीकल विंग की चित्र प्रदर्षनी एवं वीडियो फिल्मों के माध्यम से भावी षिक्षकों को व्यसनों से होने वाली हानियों को बताया गया। विद्यार्थियों द्वारा इन उत्पादों का उपयोग न करने तथा सामाजिक चेतना जागृति के लिए अपने आसपास और भविश्य में भी बच्चों को इस सम्बन्ध में जागृत करने का संकल्प व्यक्त किया।
इस अवसर पर विभाग प्रमुख डाॅ0 रमा षर्मा ने आगंतुक ब्रह्मावत्सों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जो भी षिक्षायें दी गईं वह आत्मसात हों तब जीवन में परिवर्तन आयेगा। बी0के0 गजेन्द्र भाई ने सभी को विभिन्न स्लोगनों - ‘‘ढाई इंच की बीड़ी है, यही मौत की सीढ़ी है’’, बीड़ी सिगरेट और षराब जीवन को करते खराब’’, सर्वश्रेश्ठ नषा नारायणी नषा’’ आदि दिखाये।
इससे पूर्व मेडीकल विंग की चित्र प्रदर्षनी एवं वीडियो फिल्मों के माध्यम से भावी षिक्षकों को व्यसनों से होने वाली हानियों को बताया गया। विद्यार्थियों द्वारा इन उत्पादों का उपयोग न करने तथा सामाजिक चेतना जागृति के लिए अपने आसपास और भविश्य में भी बच्चों को इस सम्बन्ध में जागृत करने का संकल्प व्यक्त किया।
इस अवसर पर विभाग प्रमुख डाॅ0 रमा षर्मा ने आगंतुक ब्रह्मावत्सों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जो भी षिक्षायें दी गईं वह आत्मसात हों तब जीवन में परिवर्तन आयेगा। बी0के0 गजेन्द्र भाई ने सभी को विभिन्न स्लोगनों - ‘‘ढाई इंच की बीड़ी है, यही मौत की सीढ़ी है’’, बीड़ी सिगरेट और षराब जीवन को करते खराब’’, सर्वश्रेश्ठ नषा नारायणी नषा’’ आदि दिखाये।
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