हाथरस (हाथरस लाइव डोट कोम ब्यूरो)। हाथुरसी माता, वीरेश्वर महादेव तथा ब्रज की देहरी का पूजन आज राष्ट्रीय कवि संगम के बैनर तले कवियों ने किया। संस्था के जिला संयोजक आशु कवि अनिल बौहरे के विचार को सह संयोजक श्यामबाबू चिन्तन ने कवियों के साथ देहरी पूजन कराया।
मुख्य अतिथि गाफिल स्वामी इगलास ने कहा ‘मैया के दरबार में अर्जी लगाकर देख ले’। सुरेन्द्र शर्मा कबाडी बाबा की अध्यक्षता में इस कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि अमृत सिंह पौनियां, सुभाष ठैंनुआ बसवां, सोमदत्त भारद्वाज ऐंहन, गौरीशंकर गौड, राजू बौहरे का सम्मान किया गया। कार्यक्रम में बनीसिंह राना, सुरेन्द्र बांठिया ने समीक्षा की। कवियों के काव्य पाठ में बाबा देवी सिंह निडर-ब्रज देहरी कूं पूज के, जो पहुंचे ब्रज धाम, योगीराज श्री कृष्ण, पूरन करते हैं काम।
काव्य पाठ कर देहरी पूजन करने वाले कवियों में केशवदेव सहयोगी, प्रभूदयाल प्रभू, दीपक रफी, रामजीलाल शिक्षक, रामभजनलाल, चांद हुसैन चांद, गाफिल स्वामी, श्याम बाबू चिंतन, बाबा रमेशानन्द इगलास, उजाला सर, जसवीर सिंह, मुनी सिसौदिया मस्त, महेश पागल, चाचा हाथरसी, दिनेश कटारा, बासुदेव उपाध्याय, मनोज द्विवेदी, नाना हाथरसी, सुरेशचन्द्र शर्मा, निर्मोही आदि थे। संचालन रामजीलाल शिक्षक ने तथा देहरी पूजन पं. मनोज द्विवेदी तथा हाथरसी मैया पुजारी प्रेम पुजारी ने कराया। आभार आशु कवि अनिल बौहरे ने प्रगट किया।
मुख्य अतिथि गाफिल स्वामी इगलास ने कहा ‘मैया के दरबार में अर्जी लगाकर देख ले’। सुरेन्द्र शर्मा कबाडी बाबा की अध्यक्षता में इस कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि अमृत सिंह पौनियां, सुभाष ठैंनुआ बसवां, सोमदत्त भारद्वाज ऐंहन, गौरीशंकर गौड, राजू बौहरे का सम्मान किया गया। कार्यक्रम में बनीसिंह राना, सुरेन्द्र बांठिया ने समीक्षा की। कवियों के काव्य पाठ में बाबा देवी सिंह निडर-ब्रज देहरी कूं पूज के, जो पहुंचे ब्रज धाम, योगीराज श्री कृष्ण, पूरन करते हैं काम।
काव्य पाठ कर देहरी पूजन करने वाले कवियों में केशवदेव सहयोगी, प्रभूदयाल प्रभू, दीपक रफी, रामजीलाल शिक्षक, रामभजनलाल, चांद हुसैन चांद, गाफिल स्वामी, श्याम बाबू चिंतन, बाबा रमेशानन्द इगलास, उजाला सर, जसवीर सिंह, मुनी सिसौदिया मस्त, महेश पागल, चाचा हाथरसी, दिनेश कटारा, बासुदेव उपाध्याय, मनोज द्विवेदी, नाना हाथरसी, सुरेशचन्द्र शर्मा, निर्मोही आदि थे। संचालन रामजीलाल शिक्षक ने तथा देहरी पूजन पं. मनोज द्विवेदी तथा हाथरसी मैया पुजारी प्रेम पुजारी ने कराया। आभार आशु कवि अनिल बौहरे ने प्रगट किया।
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