हाथरस। उ.प्र. उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मण्डल के शहराध्यक्ष एवं प्रदेश उपाध्यक्ष मदन मोहन अपना वाले एवं जिलाध्यक्ष एवं प्रदेश मंत्री राधेश्याम अग्रवाल ने संयुक्त रूप से कहा है कि वाणिज्य कर विभाग (जीएसटी) नयु प्रावधान अनुसार रजिस्ट्रेशन हेल्प अगर कोई छोटा व्यापारी कार्यालय जाता है तो उसको गुमराह किया जा रहा है। छोटा व्यापारी इस जीएसटी के कारण परेशानी महसूस कर रहा है। प्रदेश के विभाग के अधिकारी एक तरफ यह प्रचार कर रहे हैं कि जनपद में रजिस्ट्रेशन कराने के उद्देश्य से जनसुविधा केन्द्र (46) खुलवा दिये गये हैं न तो इनकी कोई सूची है और ना ही कोई प्रचार प्रसार है।
उक्त व्यापारी नेताओं का कहना है कि रिटेल व्यापारी रजिस्ट्रेशन हेतु वाणिज्य कर कार्यालय पर रजिस्ट्रेशन कराने जाता है, रजिस्ट्रेशन काउण्टर पर कोई अधिकारी नहीं होता है मात्र नामित कार्यालय लिपिक वहां मिलते हैं और कर्मचारी। अधिकारी 10 बजे के बाद जब आते हैं तो कार्यालय में हेल्प डक्स पर कार्यरत लिपिक व्यापारी जिसने कभी पंजीयन न कराया हो वह पंजीयन कराने पहुंचता है वहां पर उससे 80 प्रकार के प्रश्न बताकर व्यापारी को डराया जाता है ताकि वह यहां से जाकर अन्य केन्द्रीत स्थान पर सुविधा शुल्क देकर कार्य करा सकें।
उनका कहना है कि यही व्यवस्था बनी हुई है। कार्यालय में सुविधा शुल्क की मांग की जाती है। वाणिज्य कर अधिकारी यदि सत्यता से छोटे व्यापारी का सहयोग करना चाहते हैं तो वह कार्यालय के सुविधा केन्द्र रजिस्ट्रेशन हेतु अधिकारी एवं कर्मचारी के नाम की घोषणा करें। 46 जन सुविधा केन्द्र जो जीएसटी का कार्य कर रहे हैं उनकी कस्बा स्तर पर नामों की घोषणा करें ताकि तहसील नगरों को व्यापारी अपना रजिस्ट्रेशन सुविधाजनक बनवा सकें और कौन-कौन से प्रपत्र लाने हैं घोषित करें। सहयोग की आवश्यकता है तो उन्हें संगठन सहयोग देने को तैयार है। शासन की मंशानुसार अधिकारियों को सहयोग करने की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी।
उक्त व्यापारी नेताओं का कहना है कि रिटेल व्यापारी रजिस्ट्रेशन हेतु वाणिज्य कर कार्यालय पर रजिस्ट्रेशन कराने जाता है, रजिस्ट्रेशन काउण्टर पर कोई अधिकारी नहीं होता है मात्र नामित कार्यालय लिपिक वहां मिलते हैं और कर्मचारी। अधिकारी 10 बजे के बाद जब आते हैं तो कार्यालय में हेल्प डक्स पर कार्यरत लिपिक व्यापारी जिसने कभी पंजीयन न कराया हो वह पंजीयन कराने पहुंचता है वहां पर उससे 80 प्रकार के प्रश्न बताकर व्यापारी को डराया जाता है ताकि वह यहां से जाकर अन्य केन्द्रीत स्थान पर सुविधा शुल्क देकर कार्य करा सकें।
उनका कहना है कि यही व्यवस्था बनी हुई है। कार्यालय में सुविधा शुल्क की मांग की जाती है। वाणिज्य कर अधिकारी यदि सत्यता से छोटे व्यापारी का सहयोग करना चाहते हैं तो वह कार्यालय के सुविधा केन्द्र रजिस्ट्रेशन हेतु अधिकारी एवं कर्मचारी के नाम की घोषणा करें। 46 जन सुविधा केन्द्र जो जीएसटी का कार्य कर रहे हैं उनकी कस्बा स्तर पर नामों की घोषणा करें ताकि तहसील नगरों को व्यापारी अपना रजिस्ट्रेशन सुविधाजनक बनवा सकें और कौन-कौन से प्रपत्र लाने हैं घोषित करें। सहयोग की आवश्यकता है तो उन्हें संगठन सहयोग देने को तैयार है। शासन की मंशानुसार अधिकारियों को सहयोग करने की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी।
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