हाथरस। उत्तर भारत के प्रसिद्ध व ब्रज क्षेत्र के ऐतिहासिक लक्खी मेला श्री दाऊजी महाराज के 106 वें वार्षिक महोत्सव में अब मात्र 40 दिन ही शेष रह गये हैं तथा मेला की विधिवत व समय पूर्व तैयारियों को लेकर आज श्याम धारा संस्था के पदाधिकारियों ने जिलाधिकारी/मेला रिसीवर से मिलकर मेला तैयारियों को शुरू कराने की मांग की है।
श्यामधारा संस्था के मुख्य संचालक आशु कवि अनिल बौहरे के नेतृत्व में एक प्रतिनिधि मण्डल आज जिलाधिकारी/मेला रिसीवर से मिला और उन्हें बताया कि 106 वें ऐतिहासिक लक्खी मेला श्री दाऊजी महाराज महोत्सव 25 अगस्त से शुरू होगा तथा मेला तैयारियों के लिये अब मात्र 40 दिन का समय शेष है। उन्होंने बताया कि मेला की आय का श्रोत बाजार तथा तमाशे आदि हैं जिनके ठेका उठाने की प्रक्रिया परम्परानुसार कराने का आदेश जारी करें लेकिन मेला ठेका में प्रमुख जनभावना के अनुरूप खाने के चाट आदि अन्य भोज्य पदार्थों की महंगाई पर नियंत्रण करें और ठेकेदार की नियमावली में इस दर का समावेश करायें।
प्रतिनिधि मण्डल ने उन्हें यह भी कहा कि ब्रज क्षेत्र में हाथरस नगरी को ब्रज की देहरी कहा जाता है तथा उ.प्र. सरकार ब्रज पर्यटन प्रसार हेतु ब्रज विकास परिषद का गठन कर रही है। ब्रज के सशक्त व ऐतिहासिक नगर हाथरस जो कि कवियों की खान है को भी ब्रज पर्यटन में महत्वपूर्ण स्थान है जो किसी धार्मिक स्थली की देहरी को मिलता है उसे दिलाया जाये। उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण के जन्म के नन्दोत्सव में कैलाश से पधारे महादेव ने मां पार्वती को ब्रज की देहरी पर विश्रात कराया व रसपान कराया और वर्ष 1952 में राष्ट्रपति डा. राजेन्द्र प्रसाद ने हाथरस को ब्रज का द्वार/ब्रज की देहरी मानने पर अपनी पूर्ण सहमति दी थी। प्रतिनिधि मण्डल में प्रवक्ता जयशंकर पाराशर व मतेन्द्र सिंह गहलौत एड. शामिल थे।
श्यामधारा संस्था के मुख्य संचालक आशु कवि अनिल बौहरे के नेतृत्व में एक प्रतिनिधि मण्डल आज जिलाधिकारी/मेला रिसीवर से मिला और उन्हें बताया कि 106 वें ऐतिहासिक लक्खी मेला श्री दाऊजी महाराज महोत्सव 25 अगस्त से शुरू होगा तथा मेला तैयारियों के लिये अब मात्र 40 दिन का समय शेष है। उन्होंने बताया कि मेला की आय का श्रोत बाजार तथा तमाशे आदि हैं जिनके ठेका उठाने की प्रक्रिया परम्परानुसार कराने का आदेश जारी करें लेकिन मेला ठेका में प्रमुख जनभावना के अनुरूप खाने के चाट आदि अन्य भोज्य पदार्थों की महंगाई पर नियंत्रण करें और ठेकेदार की नियमावली में इस दर का समावेश करायें।
प्रतिनिधि मण्डल ने उन्हें यह भी कहा कि ब्रज क्षेत्र में हाथरस नगरी को ब्रज की देहरी कहा जाता है तथा उ.प्र. सरकार ब्रज पर्यटन प्रसार हेतु ब्रज विकास परिषद का गठन कर रही है। ब्रज के सशक्त व ऐतिहासिक नगर हाथरस जो कि कवियों की खान है को भी ब्रज पर्यटन में महत्वपूर्ण स्थान है जो किसी धार्मिक स्थली की देहरी को मिलता है उसे दिलाया जाये। उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण के जन्म के नन्दोत्सव में कैलाश से पधारे महादेव ने मां पार्वती को ब्रज की देहरी पर विश्रात कराया व रसपान कराया और वर्ष 1952 में राष्ट्रपति डा. राजेन्द्र प्रसाद ने हाथरस को ब्रज का द्वार/ब्रज की देहरी मानने पर अपनी पूर्ण सहमति दी थी। प्रतिनिधि मण्डल में प्रवक्ता जयशंकर पाराशर व मतेन्द्र सिंह गहलौत एड. शामिल थे।
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