हाथरस। जो खुद ही जन्म मरण और दुःख, सुख के चक्कर में आने वाले हैं वह दूसरों की गति और सद्गति कर नहीं सकते और जो हानि, लाभ, जय पराजय, के बंधन में बँधे हुए हैं वह दूसरों को बंधन से छुड़ा कैसे सकते हैं। जो खुद ही शान्ति के इच्छुक हों, जो खुद ही मुक्ति और जीवन मुक्ति के आकांक्षी हों वह दूसरों को कैसे शान्ति और सुख, मुक्ति, जीवनमुक्ति की राह दिखा सकते हैं। सभी की गति सद्गति करने वाले, अजन्मा, अभोक्ता, शरीरधारी गुरूओं की भी सद्गति करने वाले परम सद्गुरू तो एक परमात्मा शिव ही हैं। कुछ इस प्रकार का संदेश चैपाल सागर में कर्मचारियों के लिए गुरूपूर्णिमा एवं श्रावण मास के आरम्भ होने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में ब्रह्मावत्सों ने दिया।
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के आनन्दपुरी कालोनी केन्द्र के आमंत्रित ब्रह्मावत्सों बी.के. दिनेश एवं बी.के. गजेन्द्र द्वारा सभी धर्मों के इष्ट परमपिता परम शिक्षक, परम सद्गुरू परमात्मा शिव की महिमा का गुणगान किया। उन्होंने कहा कि परमात्मा एक ही हैं जो सभी जीवात्माओं की सद्गति करते हैं। कोई भी देहधारी मनुष्य को सद्गुरू नहीं कहा जा सकता। एक ही शिव भोलेनाथ हैं जो भवसागर विषय सागर से छुड़ाकर क्षीर सागर यानि सतयुग की स्थापना कराते हैं। वे कल्पान्त के इस कल्याणकारी पुरूषोत्तम संगमयुग पर प्रजापिता ब्रह्मा द्वारा नये कल्प का आरम्भ कराते हैं। कहा गया है पानी पीना छान के, गुरू बनाना जान के। स्टेज पर बैठकर भाषण करना तो सरल है लेकिन जीवन से गुणों की खुशबू आये, हर कर्म श्रेष्ठ और दिव्य हो ऐसा व्यक्तित्व तो उसके हर कर्म को देखने पर ही पता चलता है।
कार्यक्रम के आयोजक ऋषि कुमार द्वारा ब्रह्मावत्सों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में विवेक शुक्ला, संदीप कुमार, अभिषेक कुमार, सतीशचन्द्र, गौरव आदि समस्त कर्मचारीगण उपस्थित थे।
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के आनन्दपुरी कालोनी केन्द्र के आमंत्रित ब्रह्मावत्सों बी.के. दिनेश एवं बी.के. गजेन्द्र द्वारा सभी धर्मों के इष्ट परमपिता परम शिक्षक, परम सद्गुरू परमात्मा शिव की महिमा का गुणगान किया। उन्होंने कहा कि परमात्मा एक ही हैं जो सभी जीवात्माओं की सद्गति करते हैं। कोई भी देहधारी मनुष्य को सद्गुरू नहीं कहा जा सकता। एक ही शिव भोलेनाथ हैं जो भवसागर विषय सागर से छुड़ाकर क्षीर सागर यानि सतयुग की स्थापना कराते हैं। वे कल्पान्त के इस कल्याणकारी पुरूषोत्तम संगमयुग पर प्रजापिता ब्रह्मा द्वारा नये कल्प का आरम्भ कराते हैं। कहा गया है पानी पीना छान के, गुरू बनाना जान के। स्टेज पर बैठकर भाषण करना तो सरल है लेकिन जीवन से गुणों की खुशबू आये, हर कर्म श्रेष्ठ और दिव्य हो ऐसा व्यक्तित्व तो उसके हर कर्म को देखने पर ही पता चलता है।
कार्यक्रम के आयोजक ऋषि कुमार द्वारा ब्रह्मावत्सों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में विवेक शुक्ला, संदीप कुमार, अभिषेक कुमार, सतीशचन्द्र, गौरव आदि समस्त कर्मचारीगण उपस्थित थे।
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