हाथरस। जिला हाथरस टैंट लाईट, कैटर्स, फूल डैकोरेटर्स व्यापारी एसोसियेशन के जिलाध्यक्ष व प्रदेश संगठन सचिव हरीमोहन शर्मा गुरूजी ने ग्राम चंदपा के पुलिस चैकीदार श्रीनिवास के अवैधानिक कृत्यों के विरूद्ध कोई भी कार्यवाही न होने पर तीखा आक्रोश व्यक्त करते हुये कहा है कि यदि चैकीदार के विरूद्ध समुचित विधिक कार्यवाही शीघ्र न की गई तो जिले के प्रभारी मंत्री उपेन्द्र तिवारी के जनपद आगमन के समय ज्ञापन देकर प्रभारी मंत्री को समूचे प्रकरण से अवगत कराया जोगा। साथ ही आवश्यकता पड़ने पर आन्दोलन भी किया जायेगा।
एसोसियेशन के प्रदेश संगठन सचिव ने कहा है कि ग्राम चन्दपा के चैकीदार ने दबंगई के बल पर कुछ परिजनों, रिश्तेदारों व असामाजिक तत्वों को साथ में लेकर सरकारी नल के फाउंडेशन को तोड़ने के साथ ही चाहरदीवारी के माध्यम से सरकारी नल को अवैध कब्जे में लकर नल पर जल हेतु निर्भर लोगों के समक्ष भीषण गर्मी में गंभीर जल संकट उत्पन्न कर समाज में भय व्याप्त किया है। उन्होंने कहा है कि जिन्दगी के लिये जल की महत्ता सर्वविदित है। श्री शर्मा ने कहा है कि चैकीदार ने सार्वजनिक रास्ते पर खड़े नीम के हरे सरकारी पेड़ के भी एक हिस्से को अवैध तरीके से काट डाला। उन्होंने कहा है कि श्रीनिवास खुद तो चैकीदार है ही, उसके भतीजे के ससुर पुलिस विभाग से सेवानिवृत्त हैं और पूर्व में चन्दपा थाने में तैनात रह चुके हैं। जिसके चलते चन्दपा थाने में तैनात कुछ लोग उससे सहानुभूति रखते हैं।
जिलाध्यक्ष ने कहा है कि एक तरफ प्रदेश के मुख्यमंत्री यह कहते हैं कि किसी को भी कानून से खिलवाड़ नहीं करने दिया जायेगा। दूसरी ओर कानून से खिलवाड़ करने वाले पुलिस चैकीदार के विरूद्ध कोई भी कार्यवाही न होने से उसके हौंसले बुलन्द हैं और वह खुद को कानून से ऊपर समझ रहा है। उन्होंने कहा है कि चैकीदार के विरूद्ध लोकसम्पत्ति क्षति निवारण अधिनियम, वृक्ष संरक्षण अधिनियम, पद का दुरूपयोग व समाज विरोधी क्रियाकलाप निवारण अधिनियम के तहत सीधा मामला बनता है। श्री शर्मा ने कहा है कि इससे ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण और क्या होगा कि इतना गम्भीर प्रकरण होने के बाद भी न तो चैकीदार को पद से हटाया गया, न ही चाहरदीवारी तोड़कर सरकारी नल को अवैध कब्जा मुक्त कराया गया और न ही चैकीदार के विरूद्ध मुकद्दमा दर्ज कराया गया। उन्होंने कहा है कि पूरा प्रकरण पुलिस, प्रशासन, जल निगम, विकास विभाग व वन विभाग के कई आला अधिकारियों के संज्ञान में है व मीडिया में भी उछल चुका है। श्री शर्मा ने कहा है कि श्रीनिवास पुलिस चैकीदार नियुक्त होने से पूर्व एक मामले में कोतवाली सदर पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया था और इस मामले में वह जेल भी गया था। उन्होंने कहा है कि इस बिन्दु की भी जांच होनी चाहिये कि क्या चैकीदार पद पर नियुक्त होने से पूर्व श्रीनिवास इस मामले में अदालत से दोषमुक्त हो चुका था या फिर चैकीदार के पद पर नियुक्ति के समय यह मामला अदालत में विचाराधीन था।
एसोसियेशन के प्रदेश संगठन सचिव ने कहा है कि श्रीनिवास की पत्नी व उसकी भाभी द्वारा नसबन्दी आपरेशन कराये जाने के फलस्वरूप 100-100 वर्ग मीटर के दो प्लाट आवंटित होने का दावा किया जाता है। इन दोनों प्लाटों के आवंटन की विविध पहलुओं पर गहन जांच की आवश्यकता है। ताकि सच सामने आ सके और स्पष्ट हो सके कि इन दोनों प्लाटों का आवंटन विधि सम्मत है या नहीं। उन्होंने कहा है कि इन दोनों प्लाटों के आवंटन की बारीकी से जांच होने पर कई चैंकाने वाले तथ्य सामने आने की संभावना है।
एसोसियेशन के प्रदेश संगठन सचिव ने कहा है कि ग्राम चन्दपा के चैकीदार ने दबंगई के बल पर कुछ परिजनों, रिश्तेदारों व असामाजिक तत्वों को साथ में लेकर सरकारी नल के फाउंडेशन को तोड़ने के साथ ही चाहरदीवारी के माध्यम से सरकारी नल को अवैध कब्जे में लकर नल पर जल हेतु निर्भर लोगों के समक्ष भीषण गर्मी में गंभीर जल संकट उत्पन्न कर समाज में भय व्याप्त किया है। उन्होंने कहा है कि जिन्दगी के लिये जल की महत्ता सर्वविदित है। श्री शर्मा ने कहा है कि चैकीदार ने सार्वजनिक रास्ते पर खड़े नीम के हरे सरकारी पेड़ के भी एक हिस्से को अवैध तरीके से काट डाला। उन्होंने कहा है कि श्रीनिवास खुद तो चैकीदार है ही, उसके भतीजे के ससुर पुलिस विभाग से सेवानिवृत्त हैं और पूर्व में चन्दपा थाने में तैनात रह चुके हैं। जिसके चलते चन्दपा थाने में तैनात कुछ लोग उससे सहानुभूति रखते हैं।
जिलाध्यक्ष ने कहा है कि एक तरफ प्रदेश के मुख्यमंत्री यह कहते हैं कि किसी को भी कानून से खिलवाड़ नहीं करने दिया जायेगा। दूसरी ओर कानून से खिलवाड़ करने वाले पुलिस चैकीदार के विरूद्ध कोई भी कार्यवाही न होने से उसके हौंसले बुलन्द हैं और वह खुद को कानून से ऊपर समझ रहा है। उन्होंने कहा है कि चैकीदार के विरूद्ध लोकसम्पत्ति क्षति निवारण अधिनियम, वृक्ष संरक्षण अधिनियम, पद का दुरूपयोग व समाज विरोधी क्रियाकलाप निवारण अधिनियम के तहत सीधा मामला बनता है। श्री शर्मा ने कहा है कि इससे ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण और क्या होगा कि इतना गम्भीर प्रकरण होने के बाद भी न तो चैकीदार को पद से हटाया गया, न ही चाहरदीवारी तोड़कर सरकारी नल को अवैध कब्जा मुक्त कराया गया और न ही चैकीदार के विरूद्ध मुकद्दमा दर्ज कराया गया। उन्होंने कहा है कि पूरा प्रकरण पुलिस, प्रशासन, जल निगम, विकास विभाग व वन विभाग के कई आला अधिकारियों के संज्ञान में है व मीडिया में भी उछल चुका है। श्री शर्मा ने कहा है कि श्रीनिवास पुलिस चैकीदार नियुक्त होने से पूर्व एक मामले में कोतवाली सदर पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया था और इस मामले में वह जेल भी गया था। उन्होंने कहा है कि इस बिन्दु की भी जांच होनी चाहिये कि क्या चैकीदार पद पर नियुक्त होने से पूर्व श्रीनिवास इस मामले में अदालत से दोषमुक्त हो चुका था या फिर चैकीदार के पद पर नियुक्ति के समय यह मामला अदालत में विचाराधीन था।
एसोसियेशन के प्रदेश संगठन सचिव ने कहा है कि श्रीनिवास की पत्नी व उसकी भाभी द्वारा नसबन्दी आपरेशन कराये जाने के फलस्वरूप 100-100 वर्ग मीटर के दो प्लाट आवंटित होने का दावा किया जाता है। इन दोनों प्लाटों के आवंटन की विविध पहलुओं पर गहन जांच की आवश्यकता है। ताकि सच सामने आ सके और स्पष्ट हो सके कि इन दोनों प्लाटों का आवंटन विधि सम्मत है या नहीं। उन्होंने कहा है कि इन दोनों प्लाटों के आवंटन की बारीकी से जांच होने पर कई चैंकाने वाले तथ्य सामने आने की संभावना है।
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