हाथरस। आदर्श समायोजित शिक्षक (शिक्षामित्र) वेलफेयर एसोसियेशन के जिलाध्यक्ष ब्रजेश वशिष्ठ ने विगत फरवरी के बाद से असमायोजित शिक्षामित्रों को समय से मानदेय न मिल पाने पर उ.प्र. शासन व बेसिक शिक्षा विभाग के आलाधिकारियों की कार्यप्रणाली पर तीखा आक्रोश व्यक्त किया है।
उन्होंने कहा कि एक तरफ तो वह पहले से ही समायोजन से वंचित होकर कष्ट का सामना कर रहे हैं और इस आशायें हैं कि शीघ्र ही सुप्रीम कोर्ट का निर्णय हमारे पक्ष में आयेगा और हमारा भी समायोजन होगा। जबकि दूसरी ओर 3500 रू. के अल्प मानदेय भोगी शिक्षामित्रों को तीन माह से मानदेय नहीं मिला है। आज के दौर में पहले से ही मात्र 3500 रू. में परिवार चलाना मुश्किल है। इस प्रकार घर की आर्थिक स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। परिवार भुखमरी के कगार पर आ गये हैं। शिक्षामित्र कभी भी आंदोलन को उतारू हो सकते हैं।
उ.प्र. में नई सरकार के गठन के बाद विभाग द्वारा संगठन की मांग पर समायोजन न होने तक शिक्षामित्रों का मानदेय 3500 रू. से बढाकर 10 हजार रूपये किये जाने के प्रस्ताव को मार्च 2017 में केन्द्र सरकार की बजट सम्बंधी उच्च स्तरीय समिति पी.ए.वी. ने मंजूरी दे दी थी किन्तु उ.प्र. शासन द्वारा आज तक मानदेय वृद्धि का शासनादेश जारी नहीं किया गया। ठीक उसके विपरीत उ.प्र. सरकार का बजट हो जाने के बावजूद 3500 रू. प्रतिमाह के हिसाब से ही मानदेय की ग्रांट (सर्व शिक्षा अभियान) दी गई है।
बेसिक योजना के शिक्षामित्रों के मानदेय की ग्रांट होने के बावजूद भी विभागीय लापरवाही के चलते ब्लाकों से समय से बिल प्रस्तुत न करने के कारण उन्हें भी मानदेय नहीं मिला है। तीन माह से इनमें भी आक्रोश व्याप्त है। जिलाध्यक्ष ब्रजेश वशिष्ठ ने बी.एस.ए से उक्त प्रकरण को गम्भीरता से लेकर शिक्षामित्रों को यथाशीघ्र मानदेय दिलाये जाने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि एक तरफ तो वह पहले से ही समायोजन से वंचित होकर कष्ट का सामना कर रहे हैं और इस आशायें हैं कि शीघ्र ही सुप्रीम कोर्ट का निर्णय हमारे पक्ष में आयेगा और हमारा भी समायोजन होगा। जबकि दूसरी ओर 3500 रू. के अल्प मानदेय भोगी शिक्षामित्रों को तीन माह से मानदेय नहीं मिला है। आज के दौर में पहले से ही मात्र 3500 रू. में परिवार चलाना मुश्किल है। इस प्रकार घर की आर्थिक स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। परिवार भुखमरी के कगार पर आ गये हैं। शिक्षामित्र कभी भी आंदोलन को उतारू हो सकते हैं।उ.प्र. में नई सरकार के गठन के बाद विभाग द्वारा संगठन की मांग पर समायोजन न होने तक शिक्षामित्रों का मानदेय 3500 रू. से बढाकर 10 हजार रूपये किये जाने के प्रस्ताव को मार्च 2017 में केन्द्र सरकार की बजट सम्बंधी उच्च स्तरीय समिति पी.ए.वी. ने मंजूरी दे दी थी किन्तु उ.प्र. शासन द्वारा आज तक मानदेय वृद्धि का शासनादेश जारी नहीं किया गया। ठीक उसके विपरीत उ.प्र. सरकार का बजट हो जाने के बावजूद 3500 रू. प्रतिमाह के हिसाब से ही मानदेय की ग्रांट (सर्व शिक्षा अभियान) दी गई है।
बेसिक योजना के शिक्षामित्रों के मानदेय की ग्रांट होने के बावजूद भी विभागीय लापरवाही के चलते ब्लाकों से समय से बिल प्रस्तुत न करने के कारण उन्हें भी मानदेय नहीं मिला है। तीन माह से इनमें भी आक्रोश व्याप्त है। जिलाध्यक्ष ब्रजेश वशिष्ठ ने बी.एस.ए से उक्त प्रकरण को गम्भीरता से लेकर शिक्षामित्रों को यथाशीघ्र मानदेय दिलाये जाने की मांग की है।
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