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हाथरस/सासनी- रबड़ की फेक्ट्री द्वारा फैलाया जा रहा प्रदूषण बना जन स्वास्थ्य को खतरा, यही क्षेत्र ही क्यो चुनते है प्रदूषण माफिया

हाथरस/सासनी (मनोज दीक्षित/राजेश त्रिगुणायत)। समूची मानवजाती का जानी दुश्मन बना प्रदूषण का दैत्य सासनी क्षेत्र में खूब फल फूल रहा  है और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान को पलीता लगा रहा है । आगरा रोड हो या इगलास रोड या क्षेत्र का कोई भी रिहायशी इलाका सभी तो इस प्रदूषण के जाल में फंस कर रह गए है। पंखे की फेक्ट्री हो या स्क्रेब की आग उगलती फेक्ट्री सभी के मूल में प्रदूषण की समस्या गहरा गई है । जिसका समय रहते समाधान नहीं खोजा गया तो जन स्वास्थ्य को गंभीर खतरा पैदा हो जाएगा। इगलास रोड पर भी एक प्रदूषण की जन्म दात्री के रूप में एक रबड़ की फेक्टरी स्थित है। जहां से निकलने वाले विशेले धुऐ से लोगो का स्वास्थ्य खतरे में पढ़ गया है। अब सवाल यह है की आगरा के ताजमहल की चमक को बचाने के लिए वहाँ के आग उगलती फेक्टरीयो को प्रदूषण फैलाने के लिए स्थानतरित कर सासनी क्षेत्र को ही क्यो चुना गया। अगर ये मान लिया जाए की क्षेत्र की बेरोजगारी दूर करने के लिए ऐसा किया गया है तो ऐसा भी नहीं है क्यूंकी यहा के पढे लिखे बेरोजगार युवको का पलायन अभी भी नहीं रोका है। फेक्ट्री मालिक ज्यादातर श्रमिक कर्मचारी बाहर के क्षेत्र से ही लाते है इस प्रकार बेरोजगारी की समस्या भी ज्यो की त्यो  बनी हुई है। आखिर प्रदूषण उत्पन करने इन फेक्टरी मालिको को सासनी क्षेत्र ही क्यो पसंद आता है । इसका मुख्य कारण यह है की आसानी से उपलब्ध होने वाली ट्रांसपोर्ट की सुविधा जिससे से यातायात समस्याये भी नहीं होती और अधिकारी भी इस तरफ द्रष्टिपात नहीं कर पाते बिकाओ द्रष्टिकोण रखने वाले जनप्रतिनिधि व अधिकारीगण भी अपने दायित्व के प्रति गम्भीर नहीं रहते इस प्रकार प्रदूषण फैलाने वाले उधयमी प्रदूषण माफिया बनकर वातावरण को तो प्रदूषित करते है समूची मानवजाती के स्वास्थ्य के साथ बेखोफ खिलवाड़ भी करते है ऐसा भी इस क्षेत्र में काफी समय से होता आ रहा है । परिणामस्वरूप प्रदूषण फैलाने वाली फेक्टरियों पर पूरी तरह से लगाम नहीं कसी जा सकी है। अगर ऐसा ही रहा तो मोदी जी के स्वच्छ भारत कल्पना को मूर्तरूप कैसे प्रदान किया जा सकेग यह एक ऐसा सवाल है जिसका उत्तर शासन व प्रशासन स्तर से खोजन जरूरी है।

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