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हाथरस- नोटबंदी के बाद बिजली बंदी से पावरलूम उद्योग ठप्प, फैक्ट्रियों के विद्युत कनैक्शन काटे जाने से आक्रोशित मजदूरों व संचालकों ने की हायतौबा

हाथरस । नोटबंदी की मार से टूट चुके पावरलूम उद्योग पर अब बिजली बंदी की मार पड़ने से पावरलूम उद्योग बंद के कगार पर है और बुनकर मजदूर भुखमरी के मुंहाने पर है और विद्युत विभाग द्वारा पावरलूम फैक्ट्रियों के विद्युत कनैक्शन काटे जाने से आक्रोशित व्यापारियों व मजदूरों ने आज विद्युत अधिशासी अभियंता प्रथम के कार्यालय को घेर लिया और जमकर हायतौबा कर हंगामा किया।
ओढ़पुरा स्थित विद्युत वितरण खण्ड प्रथम के अधिशासी अभियन्ता के कार्यालय को आज दर्जनों पावरलूम फैक्ट्री संचालकों व सैकड़ों बुनकर मजदूरों ने घेर लिया और फैक्ट्रियों के विद्युत कनैक्शन काटे जाने के विरोध में जमकर नारेबाजी, हंगामा व हायतौबा की। इन लोगों का कहना था कि उद्योग धंधों की नोटबंदी पहले ही कमर तोड चुकी है और अब बिजली बंदी से रही-सही कसर पूरी हो जायेगी और व्यापारी व मजदूर सड़क पर आ जायेंगे और भुखमरी के कगार पर पहुंच जायेंगे।
हाथरस पावरलूम बुनकर एसोसियेशन के पदाधिकारियों का कहना है कि शासन द्वारा बुनकर विधा योजना के तहत 14 जून 2006 को फैक्ट्रियों में विद्युत कनैक्शन दिये गये थे और उसी के आधार पर पावरलूम फैक्ट्रियों में कार्य हो रहा था तथा विद्युत विभाग द्वारा जारी पासबुकों पर बिल भुगतान किया जा रहा था और कोई देय बकाया नहीं है। लेकिन विद्युत विभाग द्वारा गत 3 दिसम्बर को 5 फैक्ट्रियों के विद्युत संयोजन काट दिये गये और अन्य फैक्ट्रियों को विद्युत अधिकारियों द्वारा कनैक्शन काटने की धमकी दी जा रही है।
फैक्ट्री संचालकों का कहना है कि सभी फैक्ट्रियों में विद्युत संयोजन एलएमवी-2 या एलएमवी-6 श्रेणी के हैं। फैक्ट्री मालिकानों का आरोप है कि विद्युत अधिकारियों द्वारा फैक्ट्रियों का शोषण किये जाने की नीयत से जहां लाखों के बिल बनाकर भेज दिये हैं वहीं बिना किसी नोटिस के कनैक्शन भी काट दिये हैं जिससे पावरलूम उद्योग व बुनकर मजदूरों पर नोटबंदी के बाद बिजली बंदी से दोहरी मार पड़ रही है और रोजी रोटी की समस्या खड़ी हो गई है।
पावरलूम व्यापारियों व मजदूरों ने ज्ञापन सौंपकर विद्युत अधिशासी अभियंता से शासन की मंशा के अनुरूप विद्युत संयोजनों को पुनः चालू कराने की मांग की है। जिससे कि बुनकर मजदूरों को रोजी रोटी मिल सके और उत्पीड़नात्मक कार्यवाही पर अंकुश लगे। इस दौरान अरविन्द कुमार अग्रवाल, अशोक कुमार अग्रवाल, कुमोद माहेश्वरी, पूरनचन्द्र, मानवेन्द्र रावत, बुद्धसैन, विजय पंडित, शिवकुमार पंडित, महेश नेताजी, नरेन्द्र बंसल, अमित अग्रवाल, कल्पना दुबे, इन्द्रजीत के अलावा सैकड़ों बुनकर मजदूर थे।

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