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हाथरस- नोट बंदी को लेकर नेताओ की हाय तौबा क्यो ?, आम जनता परेशान मगर सरकार से नाराज नही, राजनैतिक दलो के पेट मे दर्द क्यो ?

हाथरस। देश के प्रधान मंत्री नरेद्र मोदी द्वारा अचानक पांच सौ और हजार के नोटो को बंद कर देने के बाद देश भर मे तूफान सा आ गया यह तो सही है, हजारो की तादात मे महिला पुरूष बैंको मे लायन लगा कर खडे़ अपने नोटो को बदलबाने के लिये जूझ रहे है। पूछे जाने पर अधिक तर लोगो के मुंह से एक ही आबाज निकलती है कि परेशानी तो है मगर देश हित मे अगर काला धन निकल कर आता है अथवा धनकूबेरो पर अंकुश लगेगा तोे हम इस दुख को झेलने को तैयार है, मारा मारी भी खुब हो रही है। एसा लगने लगा है कि देश भर मे भूचाल आ गया है। दूसरी ओर भाजपा को छोड़ कर सभी राजनैतिक दल कह तो रहे है कि काले धन के बिरोध मे है और भाजपा के साथ है और दूसरी ओर नोट बंदी को बिरोध करते हुए जनता के हितो के लिये संसद से सड़क तक आर पार की लड़ाई लड़ने का एलान भी कर रहे है, इन सभी राजनैतिक दलो के पेट मे दर्द क्यो हो रहा है यह लोगो की समझ मे नही आ रहा। अब तो एसा लगने लगा है कि कंही पार्टीया काले धन कुबेरो को बचाने के लिये लांव बंद तो नही हो रही, एसा हम नही कह रहे यह तो जनता खुद कह रही है।
जो लोग प्रातः से बिना कुछ खाये पीये बैको मे अपने पैसो को निकलाने के लिये लगे है और पेसे भी नही निकल रहे जो लोग काफी परेशान है इसमे कोई दोहराय नही है बाबजूुद इसके कोई यह नही कह रहा कि नरेद्र मोदी ने देश हित मे जो फैसला लिया है वह सही है लोग परेशानी झेलने को तैयार है। जब देश की जनता दुख झेलने को तैयार है तो फिर नेताओ को क्या दुख हो रहा है यह लोगो की समझ मे नही आ रहा। एसा लगने लगा है कि कंही यह पार्टीया काले धन वालो को बचाने के लिये नोट बंदी के लिये आंदलोन करने को तैयार हो रहा है कंही एसा न हो कि इस पार्टीयो को आने वाले चुनाबो मे जनता के कोप का भाजन न होना पड़े और भाजपा को फायदा जरूर होने के आसार नजर आ रहे है।

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