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हाथरस- भैया दूज के अवसर पर मातृछाया के बच्चों के भाल को किया गुलजार, ब्रह्माकुमारी केन्द्र पर भी मनाया गया भैया दूज

हाथरस। अवसर था भैया दूज का और प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की ब्रह्मचारिणी बहिनों के आगे बैठे थे अपने-अपने घरों से दूर रहने वाले मातृछाया के बाल व किशोरवय बच्चे जिनके भाल को वर्षों से चले आ रहे निरन्तर क्रम में ब्रह्माकुमारी बहिनों द्वारा इस वर्ष भी आसाम, नागालैण्ड, मिजोरम, त्रिपुरा, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आये हुए बच्चों को आत्मिक स्मृति का तिलक लगाया और सदैव ही स्वच्छ, स्वस्थ और सबल बनने की आशीष दी।
मन में सभी के लिए प्रेम हो, कटुता के भाव सम्पन्न हो जायें, सभी को अपना समझकर आगे बढ़ाने की भावना हो भारतीय सनातन संस्कृति के सभी पर्व यही सिखाते हैं। यदि जीवन का लक्ष्य दैवीय गुणों से सम्पन्न बनने का है तो नर में नारायण है। उक्त विचार मातृछाया केन्द्र पर बच्चों को सम्बोधित करते हुए बी.के. अलीगढ़ रोड स्थित आनन्दपुरी कालोनी की बी.के. शान्ता बहिन ने व्यक्त किये।
नेचर्स इन्टीग्रेटेड वाल्युन्टीयर्स ओर्गेनाईजेशन के अध्यक्ष प्रदीप शर्मा ने बच्चों में स्वच्छता के संस्कार धारण करने के साथ-साथ शरीर की ड्रेस आदि भी स्वच्छ रखने की प्रेरणा प्रदान की। बहिन राजकुमारी ने भी गुरूओं की आज्ञा पर चलने का आव्हान किया। तदुपरान्त ‘‘जिन्दगी का खेल हँसते - हँसते खेलिए’’ गीत की मधुर ध्वनि के मध्य बी.के. शान्ता बहिन ने बच्चों के भाल को आत्मिक स्मृति के तिलक से गुलजार किया।
इससे पूर्व आनन्दपुरी केन्द्र पर भाईदूज के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में प्रातःकाल नजदीकी गीतापाठशालाओं के ब्रह्मावत्सों ने सहज राजयोग का अभ्यास किया तथा ईश्वरीय महावाक्यों की प्रेरणा देते हुए बी.के. शान्ता बहिन ने कहा कि परमपिता परमात्मा शिव द्वारा जो ज्ञान मिला है उसे कायम रखने के लिए ब्रह्ममहूर्त में जागरण कर विचार सागर मंथन करना है। इस ईश्वरीय पढ़ाई का नियम है कि कभी भी पढ़ना नहीं छोड़ना। जैसे लोग दीपावली पर लक्ष्मी का आव्हान करते हैं आप अपने अन्दर दैवीय गुणों का आव्हान करो तो अवगुण समाप्त हो जायेंगे।

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