हाथरस। दिल्ली पब्लिक स्कूल अलीगढ़ में सिनेमा के सफ़र की तैयारियाँ जोर-शोर से चल रही हैं। सौ वर्षों 1813 से 2016 के सफ़र को चार भागों में विभाजित किया गया है।
प्रथम भाग में डीपीएस जूनियर विंग के छात्रों द्वारा 1813 से 1960 के बीच की फिल्मों के सुपरस्टार नायक, नायिकाओं, सहनायक, सहनायिकाओं, अभिनायकों व खलनायकों को चुना गया है। जिनमें राजकपूर, नरगिस, सुनील दत्त, राजेन्द्र कुमार, दिलीप कुमार, बैजन्ती माला, बहीदा रहमान, पृथ्वीराज कपूर, दुर्गा खोटे तथा मधुबाला आदि नायक नायिकाओं के जीवन्त चरित्रों से समाज के दर्पण को दर्शाया जाएगा। दर्शकों को यह भी दिखाया जाएगा कि भारतीय सिनेमा ने कैसे हम सबकी ज़िन्दगियों को रंगीनियत प्रदान की है।
मूक फिल्म राजा हरिश्चंद्र के बाद देदे खुदा के नाम पर देदे......, दूर हटो ये दुनिया वालो हिन्दुस्तान हमारा है..., प्यार हुआ इकरार हुआ प्यार से फिर क्यों डरता है दिल...., ओ गाड़ी वाले गाड़ी धीरे हाँक रे......, ये देश है वीर जवानों का......, दैया रे दैया..... , अरे जा रे हट नटखट....., कहीं दीप जले कहीं दिल कौन सी है मंजिल...., मोहे पनघट पै नन्दलाल छेड़ गयौ रे...., प्यार किया तो डरना क्या..., जिंदबाद मोहब्बत जिंदबाद.... आदि गीतों के माध्यम से विद्यालय के छात्र सभी आगन्तुकों को थिरकने के लिए मजबूर करने की पूरी तैयारी में जुटे हुए हैं।
डीपीएस हाथरस की प्रधानाचार्या श्रीमती नीना चाको ने बताया कि सभी छात्र बडे़ ही साहस एवं उत्साह के साथ तैयारियाँ कर रहे हैं, फिल्म जगत की रंगीनियत अपनी अनूठी छटा बिखेरे हुए हो। कार्यक्रम में चार चाँद लगाने के लिए सभी छात्रों एवं शिक्षकों द्वारा अतुलनीय प्रयास किए जा रहे हैं। इस महोत्सव का उद्देश्य भारतीय सिनेमा के इतिहास व महत्त्व को प्रदर्शित कर भारत की भावी पीढ़ी में कल्पनाशीलता, रचनात्मकता, मनोरंजकता तथा बौद्धिक स्तर को सुदृढ़ करके विचारों का व्यवहारीकरण प्रदान करना है।
प्रथम भाग में डीपीएस जूनियर विंग के छात्रों द्वारा 1813 से 1960 के बीच की फिल्मों के सुपरस्टार नायक, नायिकाओं, सहनायक, सहनायिकाओं, अभिनायकों व खलनायकों को चुना गया है। जिनमें राजकपूर, नरगिस, सुनील दत्त, राजेन्द्र कुमार, दिलीप कुमार, बैजन्ती माला, बहीदा रहमान, पृथ्वीराज कपूर, दुर्गा खोटे तथा मधुबाला आदि नायक नायिकाओं के जीवन्त चरित्रों से समाज के दर्पण को दर्शाया जाएगा। दर्शकों को यह भी दिखाया जाएगा कि भारतीय सिनेमा ने कैसे हम सबकी ज़िन्दगियों को रंगीनियत प्रदान की है।मूक फिल्म राजा हरिश्चंद्र के बाद देदे खुदा के नाम पर देदे......, दूर हटो ये दुनिया वालो हिन्दुस्तान हमारा है..., प्यार हुआ इकरार हुआ प्यार से फिर क्यों डरता है दिल...., ओ गाड़ी वाले गाड़ी धीरे हाँक रे......, ये देश है वीर जवानों का......, दैया रे दैया..... , अरे जा रे हट नटखट....., कहीं दीप जले कहीं दिल कौन सी है मंजिल...., मोहे पनघट पै नन्दलाल छेड़ गयौ रे...., प्यार किया तो डरना क्या..., जिंदबाद मोहब्बत जिंदबाद.... आदि गीतों के माध्यम से विद्यालय के छात्र सभी आगन्तुकों को थिरकने के लिए मजबूर करने की पूरी तैयारी में जुटे हुए हैं।
डीपीएस हाथरस की प्रधानाचार्या श्रीमती नीना चाको ने बताया कि सभी छात्र बडे़ ही साहस एवं उत्साह के साथ तैयारियाँ कर रहे हैं, फिल्म जगत की रंगीनियत अपनी अनूठी छटा बिखेरे हुए हो। कार्यक्रम में चार चाँद लगाने के लिए सभी छात्रों एवं शिक्षकों द्वारा अतुलनीय प्रयास किए जा रहे हैं। इस महोत्सव का उद्देश्य भारतीय सिनेमा के इतिहास व महत्त्व को प्रदर्शित कर भारत की भावी पीढ़ी में कल्पनाशीलता, रचनात्मकता, मनोरंजकता तथा बौद्धिक स्तर को सुदृढ़ करके विचारों का व्यवहारीकरण प्रदान करना है।
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