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हाथरस- देवोत्थान पर ब्रह्माकुमारी बहिनों ने दिया आत्म जागृति का संदेश, विष्णु के अलंकारों का हुआ गुणगान, शिव शक्तियों का हुआ सम्मान

हाथरस। देवताओं की महिमा गाई जाती है कि वे सोलह कला सम्पन्न, सम्पूर्ण निर्विकारी मर्यादा पुरुषोत्तम और सम्पूर्ण अहिंसक होते हैं। पौराणिक आख्यानों पर न जाकर मौलिक अर्थ पर ध्यान देने से मनुष्य के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आ सकता है। यह अभिव्यक्ति लहरा रोड स्थित श्री बाँके बिहारी मंदिर पर देवोत्थान एकादशी के अवसर पर आयोजित तुलसी विवाह समारोह में उपस्थित भक्तजनों को सम्बोधित करती हुईं राजयोग शिक्षिका ब्रह्माकुमारी शान्ता बहिन ने व्यक्त किये।
बाॅंके बिहारी मंदिर पर कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि विष्णु को चार अलंकारों में शंख, चक्र, गदा, पदम वास्तव में दैवीय गुणों के धारणा को दर्शाता है। शंख गंभीर और मीठी वाणी का प्रतीक है, स्वदर्शन चक्र स्वयं का दर्शन करने का प्रतीक है, जब व्यक्ति स्वयं का दर्शन करता है तो अन्तःकरण शुद्ध हो जाता है। ज्ञान की गदा द्वारा आसुरी संस्कारों का संहार किया जाता है। जब मनुष्य का जीवन कमल के समान पवित्र बन जाता है तो वह देवतुल्य हो जाता है। इसलिए देवताओं के हर अंग की तुलना कमल से की जाती है। उनके मुख को मुख कमल, हस्त कमल, पदम कमल, नेत्र कमल आदि से विभूषित किया जाता है। विष्णु को पालनहार बताया गया है। परमपिता परमात्मा शिव ने प्रजापिता ब्रह्मा द्वारा स्थापना, विष्णु द्वारा पालना और श्ंाकर द्वारा कलियुगी आसुरी दुनिया का संहार किया जाता है।
   इस अवसर पर मंदिर के ट्रस्टी रवि चैहान ने ब्रह्माकुमारी बहिनों बी.के. कोमल बहिन, बी.के. मोनिका बहिन, बी.के. दुर्गेश बहिन, बी.के. वंदना बहिन को सम्मानित किया।

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