Top News

हाथरस/सासनी- अक्रूर विद्यालय पथवारी मंदिर के निकट श्रीमदभागवत कथा के दौरान आचार्य ने किया जडभरत की कथा का रोचक वर्णन

हाथरस/सासनी। कस्बा में अक्रूर विद्यालय पथवारी मंदिर के निकट चल रहे श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव के दौरान आचार्य पं0 राकेश शर्मा शास्त्री जी द्वारा जडभरत की कथा का रोचक वर्णन कर श्रीमद्भागवत कथा श्रवण को ही मोक्ष मार्ग बताया।

शुक्रवार की कथा में आचार्य ने सुनाया कि प्राचीन समय में भरत नाम के एक राजर्षि हुए थे। समय रहते नश्वरता का बोध होने पर राज-पाट त्याग कर ब्रह्म-ज्ञान की प्राप्ति हेतु वे वन को चले गये। वन में एक मृग के साथ रहते उन्हें उससे मोह पैदा हो गया जिससे वे भगवतभक्ति से दूर हो गये। मृग के बच्चे से अत्यन्त लगाव के कारण उनका अगले जन्म में वह मृग बने । मगर भक्ति नहीं छोडी और दूसरे जन्म में फिर से मनुष्य तन मिल गया। एक बार राजा रहूगण पालकी में बैठकर आत्म-ज्ञान के लिए कपिल मुनि के पास जा रहे थे। रास्ते में एक कहार की मृत्यु होने पर रास्ते में तप में लीन जड़-भरत को बुलवा कर पालकी उठाने को कहा, वे सहर्ष तैयार हो गये। पालकी उठाकर वे चलने तो लगे, तो मार्ग में जीव जंतुओं को बचाने के कारण राजा की पालकी टेडी हो गईं इस पर राजा ने जडभरत को डांट लगा दी। तब जडभरत ने राजा रहुगण को भवाटवी का उपदेश दिया कि जो तुम हो वही मैं हूं इस दुनिया में अमीर-गरीब, राजा-प्रजा, मनुष्य-पशु, बुद्धिमान-मूर्ख सारे भेद बाहरी हैं। आन्तरिक रूप से सभी आत्मा हैं, सभी में ब्रह्म का वास है। हमें उस परम ब्रह्म की प्राप्ति के लिए ही सदा प्रयासरत रहना चाहिएय इसी में मानव जीवन की सार्थकता है। आत्म-ज्ञान की ऐसी बातें सुनकर भरी बातें सुनकर तृप्ति का अनुभव करते हुए  उनसे अपने चरणों में जगह देने का निवेदन किया। आचार्य ने कथा का भावार्थ बताते हुए कहा कि जिसने इस ‘ब्रह्म-लीला’ को समझ लिया, वही वास्तविक रूप से सुख-शान्ति का अधिकारी होता है। उन्होंनंे कहा कि जड़भरत अपने पिछले जन्म में ऋषभदेव के वही पुत्र (भरत) थे, जिनके नाम पर हमारे देश का नाम ‘भारतवर्ष पडा। इस दौरान राजा परीक्षित बने पन्नालाल जैसवाल तथा उनकी पत्नी इंदिरा देवी के साथ-साथ रामकृष्ण, ब्रजेश कुमार, ओमप्रकाश, मोरमुकुट शर्मा, विशाल कुमार, सोनू, बबलू, योगेश दीक्षित, भोला शंकर अनीता देवी, पूजा, आरती, माया देवी, सुनीता देवी, राजकुमारी, विनीता देवी, आदि मौजूद थे।
इस दौरान राजा परीक्षित बने एमपी कुशवाहा तथा रानी बनी उनकी पत्नी के साथ-साथ पन्नालाल उपाध्याय, उदयवीर सिंह, राजूसेठ गोतना, कमला प्रसाद, नारायण मैम्बर, राजेश कुमार, संजीव कुमार, नवीन कुमार, महक वाष्र्णेय, नकुल कुमार, विजय कुमार एवं कस्बा के श्रोतागण मौजूद थे।

Post a Comment

जयहिंद मीडिया नेटवर्क में अपनी बात रखने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद।

और नया पुराने