हाथरस/सासनी (सुनील कुमार)। गांव नगला गढू में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा प्रवचन के दौरान आचार्य पं0 मुकेश शास्त्री ने भगवान श्री कृष्ण के जन्म की कथा का रोचक वर्णन किया। जिसे सुन श्रोता भाव विभोर हो झूम उठे
आचार्य श्री ने सुनाया कि जब भगवान के अवतरण का समय हुआ तो प्रकृति का रूप ही बदल गया। भगवान के अवतरण के साथ ही कारागार में पहरे पर लगे पहरेदार सो गये, ताले स्वयं खुल गये। तब पिता वसुदेव एक सूप नुमा डलिया में रखकर भवगवान श्रीकृष्ण को गोकुल नंद बाबा के यहां ले गये। मगर रास्ते में यमुना नदी ने उफान लेना शुरू कर दिया इंद्रदेव ने वर्षा शुरू कर दी। यमुना में थोडा आगे चलने पर जैसे ही यमुना ने भगान श्री कृष्ण के चर्णस्पर्श किए तो यमुना जल घटने लगा।
गोकुल पहुंचकर वासुदेव ने मां यशोदा जो गहरी नींद थीं वहां कृष्ण भगवान को सुला दिया। और वहां से कन्या को ले आए। जैसे ही वासुदेव जेल में आए तो सबकुछ पहले की भांति हो गया। जब कन्या रोने लगी तो इसकी जानकारी कंस को दी गई। कंस ने कन्या को मारने के लिए जैसे ही पैर पकडकर जमीन पर पटकना चाहा वैसे ही कन्या हाथ से छूटकर आकाश में चली गई और कंस को उसके वध करने वाले के बारे में बताकर अंतरध्यान हो गई। कंस ने भगवान कृष्ण को मारने के लिए कई नवजात शिशुओं को वध करा दिया इस प्रकार कंस ने अपने पाप को और बढा लिया। कथा प्रवचन के दौरान राजा परीक्षित बने पन्नालाल जैसवाल तथा उनकी पत्नी इंदिरा देवी के साथ-साथ रामकृष्ण, ब्रजेश कुमार, ओमप्रकाश, मोरमुकुट शर्मा, विशाल कुमार, सोनू, बबलू, योगेश दीक्षित, भोला शंकर अनीता देवी, पूजा, आरती, माया देवी, सुनीता देवी, राजकुमारी, विनीता देवी, आदि मौजूद थे।
आचार्य श्री ने सुनाया कि जब भगवान के अवतरण का समय हुआ तो प्रकृति का रूप ही बदल गया। भगवान के अवतरण के साथ ही कारागार में पहरे पर लगे पहरेदार सो गये, ताले स्वयं खुल गये। तब पिता वसुदेव एक सूप नुमा डलिया में रखकर भवगवान श्रीकृष्ण को गोकुल नंद बाबा के यहां ले गये। मगर रास्ते में यमुना नदी ने उफान लेना शुरू कर दिया इंद्रदेव ने वर्षा शुरू कर दी। यमुना में थोडा आगे चलने पर जैसे ही यमुना ने भगान श्री कृष्ण के चर्णस्पर्श किए तो यमुना जल घटने लगा।
गोकुल पहुंचकर वासुदेव ने मां यशोदा जो गहरी नींद थीं वहां कृष्ण भगवान को सुला दिया। और वहां से कन्या को ले आए। जैसे ही वासुदेव जेल में आए तो सबकुछ पहले की भांति हो गया। जब कन्या रोने लगी तो इसकी जानकारी कंस को दी गई। कंस ने कन्या को मारने के लिए जैसे ही पैर पकडकर जमीन पर पटकना चाहा वैसे ही कन्या हाथ से छूटकर आकाश में चली गई और कंस को उसके वध करने वाले के बारे में बताकर अंतरध्यान हो गई। कंस ने भगवान कृष्ण को मारने के लिए कई नवजात शिशुओं को वध करा दिया इस प्रकार कंस ने अपने पाप को और बढा लिया। कथा प्रवचन के दौरान राजा परीक्षित बने पन्नालाल जैसवाल तथा उनकी पत्नी इंदिरा देवी के साथ-साथ रामकृष्ण, ब्रजेश कुमार, ओमप्रकाश, मोरमुकुट शर्मा, विशाल कुमार, सोनू, बबलू, योगेश दीक्षित, भोला शंकर अनीता देवी, पूजा, आरती, माया देवी, सुनीता देवी, राजकुमारी, विनीता देवी, आदि मौजूद थे।


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