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मानवता की सेवा का संकल्प है रेडक्रास- स्वतंत्र कुमार

हाथरस। पीडित मानवता की सेवा का बिना भेदभाव के संकल्प देने वाले अन्तर्राष्ट्रीय रेडक्रास डे का भव्य आयोजन अंग्रेजी माध्यम की प्रमुख शिक्षण संस्था एम.एल.डी.वी. पब्लिक इण्टर कालेज में किया गया। कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए शिवांशु, आदित्य, कौशल, अनन्त, सौम्या, यश, डिम्पल, हिमांशी, नमन, अनु तिवारी एवं अदिति अग्रवाल  ने बतलाया कि स्विजरलैण्ड के जेनेवा शहर में जीन हैनरी ड्युनेन्ट ने अन्तर्राष्ट्रीय रेड क्रास डे की स्थापना की। मानवता की सेवा के लिए समर्पित ‘अन्तर्राष्ट्रीय कमेटी आॅफ रेड-क्रास’ को सन 1917, 1944 एवं 1963 मंे नोबिल शान्ति पुरस्कार से पुरस्कृत किया गया। वक्ताओं ने कहा कि जीन हेनरी ड्युनेन्ट की टीम की तपस्या, अनवरत प्रयत्न एवं युद्ध में घायल तडपते हुए लोगों को बिना भेदभाव के चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का ही परिणाम था कि वर्तमान में विश्व के 186 देशों में रेड क्रास सोसायटी कार्य कर रही है। सफेद पट्टी पर लाल रंग के क्रास ($) का निशान पूरे विश्व में पीडित मानवता की सेवा का प्रतीक बन गया है। रेड क्रास आंदोलन का ही प्रयास था कि अमेरिका में विश्व का पहला ब्लड बैंक सन् 1937 में खुला। आज संसार में अधिकांश ब्लड बैंकों का संचालन रेड क्रास एवं उसकी सहयोगी संस्थाओं द्वारा किया जा रहा है। रेड क्रास द्वारा चलाये गये रक्तदान जागरूकता अभियान का ही परिणाम है कि आज विश्व में थैलेसिमिया, कैंसर, एनिमिया जैसी अनेक जानलेवा बीमारियों से लाखों पीडितों की जान बचायी जा रही है।
संस्था के डायरेक्टर राज्य अध्यापक पुरस्कार से पुरस्कृत  प्रधानाचार्य स्वतंत्र कुमार गुप्त ने आधुनिक नर्सिग आंदोलन की जन्मदाता उच्चवर्गीय बिट्रिश परिवार में जन्मी फ्लोरेंन्स नाइटिंगेल का स्मरण करते हुए कहा कि अभाव ग्रस्त घायल एवं तडपते हुए लोगों की सेवा का संकल्प लेकर उन्होंने क्रीमिया के युद्व में 38 महिलाओं के दल को लेकर वर्ष 1854 में घायलों की अभूतपूर्व सेवा सुश्रुसा की थी। लेडी विद दा लैम्प के नाम से विख्यात फ्लोंरेन्स नाइटिंगेल ने सन् 1859 में ‘नाईटिंगेल प्रशिक्षण विद्यालय’ की स्थापना की। उनका सम्पूर्ण जीवन घायलों की सेवा में व्यतीत हुआ। श्री गुप्त ने छात्र-छात्राओं से अपील की कि वह आवश्यकता पडने पर शत्रु-मित्र का भेदभाव भुलाते हुए पीडित, घायल एवं अभावों से टूटी हुई जिंदगी की सेवा-सुश्रुसा में अपने को समर्पित कर दें। इससे उनको दिव्य मानसिक शान्ति प्राप्ति होगी।
कार्यक्रम को काॅ-आर्डीनेटर आर.पी. कौशिक, शैलकान्ता गुप्ता, डिप्टी डायरेक्टर कुमुद कुमार गुप्ता, नीरू गुप्ता, पूनम वाष्र्णेय आदि ने भी सम्बोधित किया। कार्यक्रम को संचालन बबिता भारद्वाज ने किया। अन्त में संस्था के डायरेक्टर स्वतंत्र कुमार गुप्त ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया।

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