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मोदी जी आपकी जय हो..., जिसने आपको नही जाना वह जान गया, आमजन, रिक्शे, बाइक, मजदूरो ने मोदी को ही रटा, कालाधन निकलेगा अथवा नही, मजदूर गरीबो को भला होगा कहा नही जा सकता, 500 व 1000 रूपये के नोट बंद होने से लोगों ने झेली परेशानियां, सुबह से पेट्रोंल पम्पो रही भीड़

हाथरस। बीती रात को जब लोगो को यह ज्ञात हुआ कि प्रातः से 500सौ तथा 1000 हजार के नोटो को प्रचलन बंद हो जायेगा तो लोगो ने इसे हल्के मे लिया। जब लोग अपने घरेलू सामानो की खरीदारी करने को निकले तो दुकानदारो ने नोटो को लेने से मना करना शुरू क्या किया तो साफ थी कि मोदी जी ने नोटो को बंद करा दिया है। इतना ही नही देर रात तक शराब पीने के आदि लोगो ने तो हारथक कर मोदी को उप नामो की झड़ीयां लगा कर रख दी जिन्हे लोगो ने सुना तो टहाके भी लगाये और उपनामो की चर्चाये भी हुई। लोगो ने तो यंहा तक कह डाला कि सपा सरकार ने परिबार मे संग्राम का वहाना कर अखिलेश को चमका दिया। पर मोदी जी ने तो हद पार कर दी प्रातः से लेकर देर रात तक हर परिवार से लेकर गली कूंचो तक शिर्फ मोदी जी की चर्चाये थी और कुछ और नही। अब काला धन सरकार निकलबाने मे कामयाब हो पाती है अथवा नही यह तो आना वाला समय बतायेगा और इससे देश के गरीबो के अलावा किसान तथा देश को कितना फायदा होगा यक कह नही सकते यह तो भविष्य केे गर्ब मे है। अलब्बता मोदी जी को जो नही जानता था वह मोदी ही मोदी का गुड़गान करता देखा गया।
 देश के प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी ने बीती रात अचानक 500 सौ अथवा 1000 हजार के नोटो को बंद करने का फरमान मीडिया के माघ्यम से देश भर की जनता के सुनने को मिला तो जो लोग देश के बुद्वजीबी है उन्होने तो इसका लाभ और नुकसान अपने अपने बिबेक से हल निकालना शुरू कर दिया होगा। जबकि कि देश का एक तबका एसा भी है जिसको देश के फायदे और नुकसान से कोई बास्ता नही होता वह तो अपने परिबार के भरण पोषण की जुगत के अलावा और कुछ नही जानता अथवा कहलें कि उसको इस ओर सोचने को मौका नही मिलता इसके पीछे उसकी गरीबी मान लें या फिर उसको दुर्भाग्य क्यो कि न तो वह स्वंय शिक्षित हो सका और न अपने बच्चो को यह उसको दोष नही कह सकते इसके पीछे भी हमारे नेताओ  का वहुत बड़ा हाथ है क्यो कि उन्होने कभी इस तबके की ओर गंभीरता से देखा ही नही, हां चुनाबो के दौरान जरूर इस तबके की याद आती है और बोट लेने की खातिर उसकी ओकात के अनुसार टुकडे जरूर डाल दिये जाते है और चुनाबो को चले जाने के वाद इस तबके की ओर किसी दल अथवा नाताओ ने नही देखा।
 अब इस फैसलंे का असर किस पर पड़ेगा अथवा किस पर नही यह तो हम नही कह सकते मगर जिस तबके पर असर पड़ा उस तबक की बेदना पूरे दिन बाजारो मे देखने को मिलती रही। मजदूर गरीब तबका रोज लाता है और खाता है जब वह दुकानदारो से दाल और आडडा लेने को पहुचा तो उसके पांच से के नोट को किसी ने नही लिया तो वह मोदी मोदी कहता हुआ अपने मकान तक आया और उसने मोदी को क्या उप नाम दिये हम नही कह सकते। इतना ही नही दोपहर से शराब के आदि लोग शराब के ठेको पर पांच सो हजार का नोट न लेने पर मोदी मोदी कहते हुय देखे गये। कुछ लोगो मे चर्चा रही की मुलायम सिंह ने तो काफी महनत करने के बाद अखलेश के चहरे की प्रदेश मे पहचान बनाने के लिये परिबार मे कलेह दर्शा कर पूरे प्रदेश की जनता मे पहचान बनाई महीनो फिल्मी ड्रामा चलाया और आज भी चला रहा है मगर मोदी जी महान है उन्होने रातो रात पूरे देश के गांव गलियो मौहल्लो मे अपनी पहचान बनाने का काम करके दिखा दिया।

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