हाथरस। प्रदेश सरकार के निर्देशानुसार जनपद में भूगर्भ जल संसाधनों के संरक्षण एवं उचित प्रबंधन के लिए लोगों को जनजागरूक करने के उद्देश्य से भूगर्भ जल सप्ताह के तहत कलेक्ट्रेट सभागार में बैठक का आयोजन किया गया। बैठक के दौरान जिलाधिकारी डा0 रमाशंकर मौर्य ने कहा कि भूजल के दोहन को रोकने के लिए आमजनमानस में जनजागरूकता लानी होगी। वर्तमान में भूगर्भ जल का दोहन अत्यधिक चिंता का विषय है। उन्होने कहा कि यदि हम अभी भूगर्भ जल के दोहन को रोकने में असफल रहे तो आगामी पीढी को साफ पानी की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। उन्होने कहा कि भूगर्भ के जल के संचयन हेतु प्रत्येक ग्रामों, शहरों में वर्षा जल का रिचार्ज किये जाने की पद्धति को अपनाना नितांत आवश्यक है। इसके लिए हम सभी को अपने अपने घरों के छतों, सरकारी बिल्डिगों से प्राप्त होने वाले वर्षा जल को सतही जल के रूप में संग्रहण की व्यवस्था करनी होगी। जिलाधिकारी ने उपस्थित सभी एसडीएम से अपने अपने तहसीलों में जल संरक्षण को अपनाने को जोर देने को कहा। उन्होने कहा की भूगर्भ जल संरक्षण वृक्षारोपण लगाकर भी किया जा सकता है। इसके लिए आगामी 15 अगस्त को जनपद में वृहद स्तर पर पौधारोपण किया जाना है। जिलाधिकारी ने जल संरक्षण करने के लिए चेकडैम तथा मनरेगा से बड़े-बड़ें तालाब बनवाने के भी निर्देश दिया। परियोजना निदेशक चन्द्रशेखर शुक्ला ने कहा कि सभी विभागीय अधिकारी कार्यालयों में अपने अधीनस्थों तथा अन्य व्यक्तियों को जल संरक्षण हेतु जागरूक करें। उन्होने वर्षा जल संचयन एवं भूगर्भ रिचार्ज हेतु शहरी क्षेत्रों के आवासों एवं सरकारी भवनों में छत पर गिरने वाले वर्षा जल संरक्षण पर बल दिया। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में भी तालाबों, जलाशयों, गड्ढों, झीलों आदि में वर्षा जल संरक्षण किये जाने पर बल दिया। उन्होने वर्षाकाल में छतों से प्राप्त होने वाले वर्षा जल के सतही तथा भूमिगत जल संग्रहण की व्यवस्था करने पर जोर दिया। भूगर्भ जल विभाग के अधिकारियों ने भूगर्भ जल संरक्षण के लिये किये जा रहे उपायों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होने कहा कि भूगर्भ के जल की प्रथम परत समाप्त हो चुकी है। अब आम जनमानस के द्वारा द्वितीय स्तर के परत से पानी का प्रयोग किया जा रहा है। उन्होने उपस्थित सभी लोगों को द0 अफ्रीका की राजधानी केपटाऊन के पेयजल संकट के बारे में भी बताया। उन्होने जनपद में जल संरक्षण हेतु बनाये गये चैकडेम के बारे में भी बताया जिसमे वर्तमान में वर्षा जल का एकत्रीकरण हुआ। उन्होने कहा कि जनपद के कई ब्लाक डार्क जोन में आते है। अतः यहा पर भूगर्भ जल के संरक्षण की अत्यंत आवश्यकता है। जिससे जल स्तर में सुधार किया जा सकें।
इस अवसर पर उपजिलाधिकारी हाथरस अरूण कुमार सिंह, उपजिलाधिकारी सादाबाद इन्द्रसेन यादव, उपजिलाधिकारी सि0 राऊ ज्योत्स्ना बंधु, उपजिलाधिकारी सासनी अंजुम बी, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी हरीश चन्द्र, जिला विद्यालय निरीक्षक सुनील कुमार, उपनिदेशक कृषि एस0एन0सिंह, अधिशासी अधिकारी नगरपालिका हाथरस स्वदेश आर्य, जिला अर्थ एवं सांख्यिकी अधिकारी, गणमान्य व्यक्ति तथा अन्य सम्बन्धित अधिकारीगण उपस्थित रहे।
इस अवसर पर उपजिलाधिकारी हाथरस अरूण कुमार सिंह, उपजिलाधिकारी सादाबाद इन्द्रसेन यादव, उपजिलाधिकारी सि0 राऊ ज्योत्स्ना बंधु, उपजिलाधिकारी सासनी अंजुम बी, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी हरीश चन्द्र, जिला विद्यालय निरीक्षक सुनील कुमार, उपनिदेशक कृषि एस0एन0सिंह, अधिशासी अधिकारी नगरपालिका हाथरस स्वदेश आर्य, जिला अर्थ एवं सांख्यिकी अधिकारी, गणमान्य व्यक्ति तथा अन्य सम्बन्धित अधिकारीगण उपस्थित रहे।
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