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त्यौहारों के मद्देनजर जिले में धारा 144 लागू, एडीएम ने धरना, प्रदर्शन एवं जुलूस आदि पर 29 सितम्बर तक लगाया प्रतिबंध

हाथरस। अपर जिलाधिकारी रेखा एस0 चैहान ने आदेशित किया है कि आगामी त्यौहार श्रावण मास में कावरीयों, रक्षाबंधन जन्माष्ठमी, बल्देव छठ (स्थानीय), राधा अष्ठमी (स्थानीय), मौर्हरम जैसे संवेदनशील पर्वों के मद्देनजर तनाव को दृष्टिगत कतिपय व्यक्तियों/राजनैतिक दलों द्वारा जनपद में धरना, प्रदर्शन एवं जुलूस निकालकर उन्माद उत्पन्न कर शान्ति एवं कानून व्यवस्था भंग की जा सकती है। 
  जिसके दृष्टिगत जनपद हाथरस क्षेत्रान्तर्गत सम्भावित साम्प्रदायिक/राजनैतिक उपद्रव/उन्माद आदि प्रतिकूल विधि व्यवस्था की स्थिति को नियन्त्रित करने तथा विभिन्न असामाजिक तत्वों द्वारा कुत्सित उद्देश्य की प्राप्ति हेतु शान्ति एवं कानून व्यवस्था को प्रभावित करने वाले दुष्कृत्यों पर प्रशासनिक नियंत्रण की आवश्यकता विदित होती है, ताकि जनपद हाथरस में जन सामान्य के मध्य कोई अप्रिय घटना घटित न होने पाये। उपरोक्त के सम्बन्ध में उक्त संभावित अवसरों पर प्राप्त सूचनाओं के अनुसार आमजीवन, स्वास्थ्य या क्षेम को क्षति पहुॅचने, लोक शान्ति विक्षुब्ध होने तथा राजकीय कार्य में अनुचित बाधा उत्पन्न होने की सम्भावना स्पष्ट है तथा त्वरित निवारण हेतु प्रभावी कार्यवाही अमल में लाया जाना जनहित में नितान्त आवश्यक है।
    अतः अपर जिलाधिकारी हाथरस ने दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा-144 में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए आज दिनांक 30 जुलाई से दिनांक 29 सितम्बर 2018 तक जनपद हाथरस की सीमा क्षेत्रान्तर्गत सर्वसाधारण पर तत्काल प्रभाव से निम्नलिखित प्रतिबन्ध लागू करने का आदेश दिया है। जिसके तहत कोई भी व्यक्ति/राजनैतिक दल का कार्यकत्र्ता कलैक्ट्रेट/अन्य सभी सार्वजनिक स्थल, सरकारी व अर्द्ध सरकारी या अन्य कार्यालयों पर किसी भी प्रकार का आयुध/शस्त्र साथ नहीं ले जायेगा। लाउडस्पीकर एवं अन्य ध्वनि विस्तारक यंत्र का प्रयोग किसी पूर्व प्रशासनिक अनुमति के बिना नहीं करेगा और न ही उत्तेजक भाषा में भाषण आदि देगा और न आम जनता/व्यक्ति को प्रेरित करने का प्रयास करेगा। इस अवधि में सभी प्रकार के जुलूस आदि प्रतिबन्धित रहेंगे तथा पारम्परिक मेले, विभिन्न आयोजन व सार्वजनिक प्रदर्शन आदि के लिए पृथक से प्रशासनिक अनुमति प्राप्त करना वांछनीय होगा। कोई भी व्यक्ति किसी भी प्रकार की अफवाहें या खबरों को प्रकाशित नहीं करेगा या करायेगा और न ही इसके प्रसारण में सहायक होगा, जिसमें आम जनता, विभिन्न वर्गो, साम्प्रदायों के मध्य घृणा, द्वेष की भावना उत्पन्न हो अथवा शान्ति व्यवस्था भंग होने की सम्भावना हो।
    उन्होने बताया है कि इस दौरान कोई भी व्यक्ति किसी सार्वजनिक स्थल पर बिना किसी पूर्व अनुमति के किसी प्रकार का जुलूस बनाकर सभा नहीं करेगा न ही उसमें भाग लेगा। यह प्रतिबन्ध शादी, बारात एवं शव यात्राओं पर लागू नहीं होगा। कोई भी व्यक्ति ऐसे तस्वीर, कार्टून, हैण्डबिल, दीवाल लेख, पोस्टर आदि नहीं लिखेगा या प्रकाशित नहीं करेगा, जिससे शान्ति व्यवस्था भंग होने की सम्भावना हो। कोई भी व्यक्ति सार्वजनिक स्थानों पर किसी के प्रति अपमान जनक भाषा अथवा गालियों का प्रयोग नहीं करेगा और न ही ऐसे नारे आदि लगायेगा, जिससे किसी की भावनाओं को ठेस पहुॅचे या शान्ति भंग होने की सम्भावना हो। कोई भी व्यक्ति सार्वजनिक स्थल, भवन एवं मकानों पर ईंट, पत्थर, रोड़े आदि फेंककर मारे जाने वाली वस्तुएं एकत्रित नहीं करेगा। कोई भी व्यक्ति सार्वजनिक स्थल पर बन्दूक, रायफल, पिस्टल, चाकू तलवार, बल्लम या विस्फोटक पदार्थ जैसे-तेजाब आदि लेकर नहीं चलेगा और न ही अपने पास रखेगा। यह प्रतिबन्ध ड्यूटी पर तैनात राजकीय पुलिस कर्मचारियों पर लागू नहीं होगा। अपाहिज एवं नेत्रहीन व्यक्ति अपने सहारे के लिए छड़ी रख सकते हैं।
    इसके अलावा कोई भी व्यक्ति किसी सार्वजनिक स्थान पर पाॅच या पाॅच से अधिक व्यक्तियों का समूह नहीं बनायेगा और न ऐसे समूह में शामिल होगा। यह प्रतिबन्ध सरकारी अथवा गैर सरकारी ड्यूटी पर लगे अधिकारियों/कर्मचारियों व पुलिस फोर्स तथा धार्मिक स्थलों एवं परम्परागत प्रार्थना सभाओं पर लागू नहीं होगा। कोई भी व्यक्ति आवागमन के साधन जैसे-रेल, रोडवेज, सड़क यातायात आदि विद्युत व्यवस्था, जल आपूर्ति आदि जैसे-महत्वपूर्ण आवश्यक जनहित की सेवाओं में किसी भी प्रकार का अवरोध उत्पन्न नहीं करेगा और न करायेगा। कोई भी व्यक्ति शिक्षण संस्थाओं तथा दुकानों, सार्वजनिक प्रतिष्ठानों/सरकारी कार्यालयों आदि को जबरदस्ती बन्द करवाने का न तो प्रयास करेगा और न ही उसके लिए किसी को प्रेरित करेगा। कोई भी व्यक्ति ऐसे पम्पलेट/पर्चे, बोर्ड आदि का प्रकाशन, वितरण आदि नहीं करेगा, जिससे किसी भी प्रकार की धार्मिक एवं साम्प्रदायिक सौहार्द को क्षति पहुॅचाने की आशंका होती हो। किसी भी व्यक्ति को किसी प्रस्तावित सभा के स्थान और समय के बारे में स्थानीय पुलिस अधिकारियों को कम से कम 24 घण्टे पूर्व सूचना देनी आवश्यक होगी। उन्होने सख्त निर्देश दिया है कि किसी भी प्रस्तावित सभा के लिये लाउडस्पीकर हेतु सम्बन्धित परगना मजिस्ट्रेट से अनुमति लेनी आवश्यक होगी। किसी भी व्यक्ति द्वारा मस्जिद, मन्दिर, गिरिजाघर, गुरूद्वारा आदि पूजा स्थलों का मंच के रूप में राजनैतिक उपयोग नहीं किया जायेगा। तहसीलों में परगना मजिस्ट्रेट अपने-अपने क्षेत्र में शान्ति व्यवस्था बनाये रखेगें।
    ईदज्जुहा (बकरीद) पर्व के दौरान निम्न कारणों से समस्याऐं उत्पन्न होती रही है, जिसका निस्तारण समस्त उप जिला मजिस्टेªट / पुलिस क्षेत्राधिकारी कराया जाना सुनिश्चित करेगें। ईदज्जुहा (बकरीद) की नमाज के अवसर पर विद्युत/पानी की समुचित आपूर्ति न होने पर । नमाज स्थलों एवं नमाजियों के आवागमन के मार्गो की मरम्मत व समुचित सफाई आदि न होने पर। नमाजियों के आवागमन के मार्गो तथा नमाज के समय मस्जिदों/ईदगाहों के निकट आवारा पशुओं, साॅडों, कुत्तों व सुअरों आदि के स्वछन्द विचरण को लेकर। गैर-परम्परागत व विवादित स्थानों पर नमाज/तराबी पढने को लेकर। नमाज स्थलों तथा नमाजियों के आवागमन के मार्गो पर आपत्तिजनक वस्तुए (मांस आदि) पाये जाने पर। गैर-परम्परागत रूप से ध्वनि-विस्तारक यन्त्रों के प्रयोग को लेकर। नमाज/तराबी के समय निकट स्थित दूसरे सम्प्रदाय के धार्मिक स्थलों आदि पर ध्वनि विस्तारक यन्त्रों के प्रयोग पर। अफवाहों को लेकर। उन्होने कहा कि चूॅकि परिस्थिति इस तरह की है कि व्यक्तिगत रूप से सभी को तामील कराया जाना सम्भव नहीं है। अत एव यह आदेश एक पक्षीय रूप से पारित किया जाता है, जो दिनांक 30 जुलाई 2018 से दिनांक 29 सितम्बर 2018 तक प्रर्वतनीय रहेगा, जब तक कि इससे पूर्व इसे निरस्त न किया जाय। उक्त आदेश का उल्लंघन भारतीय दण्ड संहिता की धारा-188 के अन्तर्गत दण्डनीय अपराध होगा।

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