हाथरस/सिकन्दराराव। तहसील परिसर के बार कक्ष में एक काव्यगोष्ठी विमल साहित्य संवर्धक संस्था के तत्वावधान में हुई। काव्यगोष्ठी की अध्यक्षता राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त शिक्षक डॉ सुभाष चन्द्र शर्मा ने की। मुख्य अतिथि के रूप में मंच पर समाजसेवी हरपाल सिंह यादव उपस्थित थे। सञ्चालन अवशेष कुमार विमल ने किया।
अतिथियों द्वारा माँ शारदे के समक्ष दीप प्रज्वलित कर गोष्ठी का शुभारम्भ किया गया। कवियों ने दुर्घटना में मृत हुए देश के वरिष्ठ कवि पंडित प्रमोद तिवारी एवम् के डी शर्मा हाहाकारी के निधन पर शोक व्यक्त किया। हरपाल सिंह यादव ने कहा इन दो कवियों के रूप में साहित्य जगत को बड़ी क्षति हुई है।
सरस्वती वन्दना के बाद प्रथम कवि के रूप में
पंकज यादव ने पढ़ा -
प्यार वतन से था जिन्हें गए जान तक बार।
युवा शायर शिवम् कुमार आजाद ने कुछ इस तरह पढ़ा -
वे यूपी टॉप करते हैं जिले में फस्ट आते हैं
जो बच्चे मुफलिसों के हैं जिन्हें बस्ता नहीं मिलता।
शायर कासिम जमाल ने पढ़ा-
अपने जो मुल्क पे कुर्बान नहीं हो सकता।
मेरी नजरों में वो इंसान नहीं हो सकता ।।
विवेकशील राघव ने सुनाया -
मंजिलें चार कदम वाकी है
रुक न जाना यूँहीं चला करना
अवशेष कुमार विमल ने पढ़ा -
न हिन्दू है, न मुस्लिम है नहीं सिख ना ईसाई है।
जो कल दंगों में था मारा गया वो मेरा भाई है।।
युवा कवि आलोक मिश्र ने पढ़ा -
नेह भरे नैनों से ये सम्वाद बहुत है।
मेरे अंतर्मन में तेरी याद बहुत है।।
इनके अतिरिक्त काव्यपाठ करने वाले कवियों में ओमप्रकाश सिंह, शमसुल अहद शम्स, जमीरुद्दीन जमीर, सत्यप्रकाश शर्मा, राजीव शर्मा, राजबहादुर सिंह चैहान के नाम प्रमुख रहे। श्रोताओं में आनन्द जाटव, सुरेशचंद सैनी, नरेंद्र बघेल, मनोज शर्मा, सुधीर कश्यप, कन्हैयालाल, मुहम्मद सदर खाँ शेरवानी, महेश संघर्षी, मनोज यादव आदि उपस्थित थे।
अतिथियों द्वारा माँ शारदे के समक्ष दीप प्रज्वलित कर गोष्ठी का शुभारम्भ किया गया। कवियों ने दुर्घटना में मृत हुए देश के वरिष्ठ कवि पंडित प्रमोद तिवारी एवम् के डी शर्मा हाहाकारी के निधन पर शोक व्यक्त किया। हरपाल सिंह यादव ने कहा इन दो कवियों के रूप में साहित्य जगत को बड़ी क्षति हुई है।
सरस्वती वन्दना के बाद प्रथम कवि के रूप में
पंकज यादव ने पढ़ा -
प्यार वतन से था जिन्हें गए जान तक बार।
युवा शायर शिवम् कुमार आजाद ने कुछ इस तरह पढ़ा -
वे यूपी टॉप करते हैं जिले में फस्ट आते हैं
जो बच्चे मुफलिसों के हैं जिन्हें बस्ता नहीं मिलता।
शायर कासिम जमाल ने पढ़ा-
अपने जो मुल्क पे कुर्बान नहीं हो सकता।
मेरी नजरों में वो इंसान नहीं हो सकता ।।
विवेकशील राघव ने सुनाया -
मंजिलें चार कदम वाकी है
रुक न जाना यूँहीं चला करना
अवशेष कुमार विमल ने पढ़ा -
न हिन्दू है, न मुस्लिम है नहीं सिख ना ईसाई है।
जो कल दंगों में था मारा गया वो मेरा भाई है।।
युवा कवि आलोक मिश्र ने पढ़ा -
नेह भरे नैनों से ये सम्वाद बहुत है।
मेरे अंतर्मन में तेरी याद बहुत है।।
इनके अतिरिक्त काव्यपाठ करने वाले कवियों में ओमप्रकाश सिंह, शमसुल अहद शम्स, जमीरुद्दीन जमीर, सत्यप्रकाश शर्मा, राजीव शर्मा, राजबहादुर सिंह चैहान के नाम प्रमुख रहे। श्रोताओं में आनन्द जाटव, सुरेशचंद सैनी, नरेंद्र बघेल, मनोज शर्मा, सुधीर कश्यप, कन्हैयालाल, मुहम्मद सदर खाँ शेरवानी, महेश संघर्षी, मनोज यादव आदि उपस्थित थे।
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