हाथरस। आज कलियुग के चरम पर धर्म के नाम पर अधर्म बढ़ गया है। धर्म का कार्य लोगों को सद्बुद्धि देना था और मानव को सुख देना था लेकिन धर्म कर्मकाण्डों तक सीमित हो गया और लोग दुःखी होते जा रहे हैं। आज से पाँच हजार वर्श पहले भारत जो सबसे सुखी, धनवान और बुद्धिवान था आज दुःखी और कंगाल बन गया है। यह उद्गार रामपुर उपसेवाकेन्द्र प्रभारी बी0के0 मीना बहिन ने हाथरस जंक्षन , फरौली में आयोजित सत्संग समागम में व्यक्त किये।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए अलीगढ़ रोड स्थित आनन्दपुरी केन्द्र संचालिका बी.के. षान्ता बहिन ने कहा कि भाशण तो बहुत हुए हैं अब आचरण की आवष्यकता है। यह कर्मों की गहन गति है कि सुख देंगे तो सुख मिलेगा, दुःख देंगे तो दुःखी होकर मरेंगे। आज जो संसार में आसुरी कर्म करके सुखी दिखाई दे रहे हैं वे वास्तव में अन्तःकरण से सुखी नहीं हैं। आत्मा का स्वधर्म षान्ति है। इस स्वधर्म में स्थित होने से ही मनुश्य को षान्ति मिलेगी। क्रोध, काम, अहंकार आदि परधर्म हैं इसमें स्थित होने से दुःख और अषान्ति ही मिलेगी।
इस अवसर पर बी0के0 मीना बहिन, बी0के0 उमा बहिन, बी0के0 ष्वेता,, बी0के0 यषोदा बहिन, बी.के. गजेन्द्र, फूलवती, जगदीष, रूमा,रूकमणी, रामबेटी, राकेष कुमार, मधू देवी, मिथलेष, मीरा, लव कुमार सहित गाँव से शामिल हुई बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए अलीगढ़ रोड स्थित आनन्दपुरी केन्द्र संचालिका बी.के. षान्ता बहिन ने कहा कि भाशण तो बहुत हुए हैं अब आचरण की आवष्यकता है। यह कर्मों की गहन गति है कि सुख देंगे तो सुख मिलेगा, दुःख देंगे तो दुःखी होकर मरेंगे। आज जो संसार में आसुरी कर्म करके सुखी दिखाई दे रहे हैं वे वास्तव में अन्तःकरण से सुखी नहीं हैं। आत्मा का स्वधर्म षान्ति है। इस स्वधर्म में स्थित होने से ही मनुश्य को षान्ति मिलेगी। क्रोध, काम, अहंकार आदि परधर्म हैं इसमें स्थित होने से दुःख और अषान्ति ही मिलेगी।
इस अवसर पर बी0के0 मीना बहिन, बी0के0 उमा बहिन, बी0के0 ष्वेता,, बी0के0 यषोदा बहिन, बी.के. गजेन्द्र, फूलवती, जगदीष, रूमा,रूकमणी, रामबेटी, राकेष कुमार, मधू देवी, मिथलेष, मीरा, लव कुमार सहित गाँव से शामिल हुई बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।

एक टिप्पणी भेजें
जयहिंद मीडिया नेटवर्क में अपनी बात रखने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद।