हाथरस। सत्ता बदल गई शासक बदल गये लेकिन मातहत नहीं बदले और ना ही उनकी कार्यशैली बदली तथा आज एक ऐसा नजारा देखने का मिला जिसने सारी मानवता को तार-तार कर दिया। एक अज्ञात के शव को अंतिम दाह संस्कार के लिये शव वाहन से ले जाने की बजाय रिक्शा में रखकर ले जाया गया।
जानकारी के मुताबिक 3 दिन पहले रति का नगला रेलवे स्टेशन के पास एक अज्ञात 40-45 वर्षीय अज्ञात की लाश पडी मिली थी तथा जीआरपी द्वारा शव को अपने कब्जे में लेकर शिनाख्त करायी गई लेकिन पहचान नहीं हुई तथा शव 72 घण्टे तक बागला जिला अस्पताल कैम्पस में खुले में रखा रहा और आज शव को अंतिम दाह संस्कार हेतु ले जाने के लिये शव वाहन की बजाय उसे एक रिक्शे में रखकर ले जाया गया जिससे इंसानी मानवता को तार-तार कर दिया। जिला अस्पताल में बडे-बडे चिकित्सक व स्वास्थ्य अधिकारी, पुलिस अधिकारी आते-जाते रहते हैं लेकिन शायद किसी को यह दिखाई नहीं दिया।
उक्त अज्ञात व्यक्ति के शव अंतिम दाह संस्कार की व्यवस्था सामाजिक संस्था श्री नर नारायण सेवा संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष प्रशांत शर्मा व शहराध्यक्ष नवीन अरोरा द्वारा की गई और शव का पत्थर वाली श्मशान भूमि पर अंतिम दाह संस्कार किया गया है।
शव रिक्शे में रखकर ले जाने के मामले में जीआरपी के सिपाही ब्रजेश कुमार का कहना है कि कोई शव वाहन उपलब्ध नहीं कराया गया।
जानकारी के मुताबिक 3 दिन पहले रति का नगला रेलवे स्टेशन के पास एक अज्ञात 40-45 वर्षीय अज्ञात की लाश पडी मिली थी तथा जीआरपी द्वारा शव को अपने कब्जे में लेकर शिनाख्त करायी गई लेकिन पहचान नहीं हुई तथा शव 72 घण्टे तक बागला जिला अस्पताल कैम्पस में खुले में रखा रहा और आज शव को अंतिम दाह संस्कार हेतु ले जाने के लिये शव वाहन की बजाय उसे एक रिक्शे में रखकर ले जाया गया जिससे इंसानी मानवता को तार-तार कर दिया। जिला अस्पताल में बडे-बडे चिकित्सक व स्वास्थ्य अधिकारी, पुलिस अधिकारी आते-जाते रहते हैं लेकिन शायद किसी को यह दिखाई नहीं दिया।
उक्त अज्ञात व्यक्ति के शव अंतिम दाह संस्कार की व्यवस्था सामाजिक संस्था श्री नर नारायण सेवा संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष प्रशांत शर्मा व शहराध्यक्ष नवीन अरोरा द्वारा की गई और शव का पत्थर वाली श्मशान भूमि पर अंतिम दाह संस्कार किया गया है।
शव रिक्शे में रखकर ले जाने के मामले में जीआरपी के सिपाही ब्रजेश कुमार का कहना है कि कोई शव वाहन उपलब्ध नहीं कराया गया।
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