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हाथरस- चंदपा का दबंग चैकीदार पड़ा सरकारी मशीनरी व जनप्रतिनिधियों पर भारी, अवैधानिक कृत्यों पर विरोध में उठे तमाम स्वर, मगर नहीं हो सकी कोई कार्यवाही, खुद को साबित किया कानून से ऊपर

हाथरस। यूं तो प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कई बार यह घोषणा कर चुके हैं कि किसी को भी कानून से खिलवाड़ करने की इजाजत नहीं दी जायेगी, मगर चन्दपा के दबंग चैकीदार, उसके परिजनों, रिश्तेदारों व समर्थकों ने मुख्यमंत्री की घोषणा की खुलेआम धज्जी उड़ाकर खुद को कानून से ऊपर साबित कर दिखाया है। लगभग ढाई महने में सरकारी हैण्डपम्प चैकीदार के कब्जे से मुक्त हो पाया है, मगर चैकीदार पक्ष का बालबांका भी सरकारी मशीनरी न कर सकी है। कब्जा मुक्त सरकारी हैण्डपम्प दूसरे स्थान पर लगाने के लिये ग्राम प्रधान ने तीन उपयुक्त सार्वजनिक स्थल चिन्हित किये, मगर चैकीदार पक्ष ने दबंगई के बल पर तीनों चिन्हित स्थलों में से किसी भी स्थल पर सरकारी हैण्डपम्प नहीं लगने दिया और झगड़े पर आमदा हो गया।। साथ ही दबंगई के बल पर सरकारी मशीनरी को बारातघर में हैण्डपम्प लगाने पर बाध्य कर दिया, जबकि बारातघर में पहले से ही एक सरकारी हैण्डपम्प लगा हुआ है जिसकी संख्या 395700/18 है। अनुप्रयुक्त स्थल पर दूसरा हैण्डपम्प जिसकी संख्या 395700/17 है, लगवाना क्या सरकारी धन का दुरूपयोग नहीं है। बारातघर पर अनावश्यक रूप से दूसरे सरकारी हैण्डपम्प को लगवाने के पीछे मंशा सिर्फ उस परिवार के लिये जल संकट बरकरार रखना है जिस परिवार ने चैकीदार पक्ष के खिलाफ आवाज उठाने का दुस्साहस किया है। जबकि बारातघर के निकट ही दो अन्य सरकारी हैण्डपम्प भी लगे हुये हैं जिनकी संख्या 395700/16 व 395700/15 है। अब यह मामला प्रदेश के मुख्यमंत्री, मानवाधिकार आयोग, जिले के प्रभारी मंत्री के साथ-साथ अदालत की चैखट तक पहुंचने की प्रबल संभावना है।
गौरतलब है कि ग्राम चन्दपा के चैकीदार ने अपने परिजनों, रिश्तेदारों व समर्थकों को साथ में लेकर जहां सरकारी हैण्डपम्प संख्या 395700/17 का फाउन्डेशन तोड़कर चाहरदीवारी के माध्यम से इस नल को कब्जे में ले लिया था, वहीं अपने प्लाट के सामने स्थित सार्वजनिक मार्ग में खड़े विशाल नींम के हरे वृक्ष के एक बड़े हिस्से को अवैधानिक तरीके से काट डाला, पहले भी चैकीदार द्वारा इस सरकारी हरे वृक्ष के एक हिस्से को अवैधानिक तरीके से काटा जा चुका है। सरकारी नल पर अवैध कब्जे से इस भीषण गर्मी में उन लोगों के समक्ष भीषण जल संकट पैदा तो हुआ ही जो जल के लिये पूरी तरह से इस नल पर निर्भर थे, साथ ही समाज में भय भी व्याप्त हुआ।
सर्वविदित है कि जिन्दगी से जुड़ा होने के चलते जल बहुत ही अहम है। मामला सीधे-सीधे लोक सम्पत्ति क्षति निवारण अधिनियम, वृक्ष संरक्षण अधिनियम, पद के दुरूपयोग व समाज विरोधी  क्रियाकलाप निवारण अधिनियम के तहत आता है। प्रकरण पुलिस, प्रशासन, जल निगम, विकास विभाग व वन विभाग के कई आला अधिकारियों तक पहुंचा, साक्ष्यों सहित मीडिया में उछला। जिले के दो बड़े जनप्रतिनिधियों ने पुलिस अधिकारियों से भी वार्ता की। पर्यावरण सुरक्षा संस्थान के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भवतोष मिश्र, राष्ट्रीय लोकदल के नगर अध्यक्ष यादवेन्द्र सिंह बघेल एड., टैंट, लाइट, कैटर्स फूल डैकोरेटर्स   व्यापारी एसोसियेशन के प्रदेश संगठन सचिव हरीमोहन शर्मा गुरूजी, भजपा के नगर अध्यक्ष मूलचन्द वाष्र्णेय व नगर मीडिया प्रभारी यतेन्द्र वाष्र्णेय ने भी प्रकरण को उठाया, मगर नतीजा ढाक के तीन पात रहा। न तो चैकीदार को पद से हटाया गया, न ही दीवार का वह हिस्सा तोड़ा गया जिसके माध्यम से नल पर अवैध कब्जा हुआ और न ही चैकीदार पक्ष पर कोई कानूनी कार्यवाही हुई। दिलचस्प तो यह है कि चन्दपा थाना प्रभारी ने भी नल को चाहरदीवारी के अन्दर लिये जाने की स्वीकारोक्ति की थी, वहीं ग्राम पंचायत सचिव ने यह वयान दिया था कि यदि सरकारी नल से अवैध कब्जा नहीं हटा तो थाने में तहरीर देंगे मगर ऐसा कुछ नहीं हुआ। गत 21 जुलाई को चैकीदार के कब्जे से हैण्डपम्प मुक्त कराकर सारा सामान बारातघर में पहुंचा कर उसी दिन नल लगाने की प्रक्रिया शुरू हो गई।

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