हाथरस। सादाबाद गेट स्थित धन्वन्तरि औषधालय में 160 वें मासिक कवि दरबार में राष्ट्रीय जनकवि बाबा निर्भयानन्द देवीदास निर्भय हाथरसी की पुण्यतिथि पर उनका भावपूर्ण स्मरण किया गया। कवि दरबार का शुभारंभ वीणा पाणि मां सरस्वती जी व आयुर्वेद प्रर्वत्तक भगवान धन्वन्तरिजी की वंदना से हुआ।
कवि दरबार में निर्भय हाथरसी की स्मृति में पुरस्कार देने की घोषणा उनके पुत्र निर्भय कुमार शर्मा ने की। जो प्रत्येक वर्ष संस्कार भारती नामित एक लाख रूपये की एफ.डी. में जमा की गयी धनराशि से प्राप्त ब्याज धनराशि में से कवि दरबार की मासिक गोष्ठी तथा संस्कार भारती द्वारा आयोजित काव्य प्रतियोगिता में सर्वश्रेष्ठ रूप से विजयी रहे 30 वर्ष तक के युवा कवि को प्रदान किया जायेगा। इस अवसर पर कवियों ने काव्यमयी हस्ताक्षर निर्भय जी को काव्यमयी श्रद्धांजलि अर्पित कीं। जिसमें निर्भय कुमार तथा निर्भय जी की पुत्रवधू श्रीमती पूनम शर्मा ने-‘दे गये कविता का वरदान, धन्य आप कविरत्न महान, देश आज भी तुम्हारा करता है सम्मान’ से भावांजलि अर्पित कीं।
प्रदीप पंडित-हम सभी आये यहां निर्भयजी के सम्मान में, के साथ निर्भयजी की अनेकों कवितायें सुनायीं। जिनमें प्रमुख थी-मंदिर बनेगा धूमधाम से, देश को आवश्यकता है मोहन मदन मुरारी की, चक्र सुदर्शनधारी की। रामभजनलाल सक्सैना-निर्भयजी का संदेश प्रेम करोगे प्रेम मिलेगा। चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य-खुशबू की तरह बिखर जायेंगे, सकुन बन के दिल में उतर जायेंगे। दिनेश राज कटारा-मंदिर में, गुरूद्वारों में, गलियों में, गलियारों में, ऐसा कोई धाम नहीं है जिसमें तेरा नाम नहीं है। पं. मनोज द्विवेदी-निर्भयजी की पुण्यतिथि है पावन, हर पल याद तुम्हारी आती मनभावन। राकेश रसिक-कभी गीत सी लगती है, कभी गीता सी लगती है, मेरी बेटी पुनीता सी लगती है।
वैद्य मोहन ब्रजेश रावत-ऋतु आयी सावन की मनभावन की, झूला झूलें बृज नारी, इन्हें देख मेरौ मन हरषायौ है। श्याम बाबू चिंतन-निर्भयजी का वंदन, इनकी कविताओं का अभिनन्दन। बासुदेव उपाध्याय-राधे मन का प्यार यहां। जयप्रकाश शर्मा-मानसी गंगा स्वच्छता अभियान से संदेश दिया निर्भयजी ने पर्यावरण संरक्षण का, बृज भूमि के सम्मान का, प्रेम भक्ति से पाने को भगवान का। केशवदेव सहयोगी, विष्णुदयाल वाष्र्णेय बजाज ने भी काव्य पाठ किया।
कवि दरबार द्वारा धर्मसम्राट स्वामी करपात्रीजी महाराज का जन्म जयन्ती पर सादर वंदन तथा हरियाली मधु श्रवण तीज पर महिला शक्ति का सम्मान किया गया।
कवि दरबार में निर्भय हाथरसी की स्मृति में पुरस्कार देने की घोषणा उनके पुत्र निर्भय कुमार शर्मा ने की। जो प्रत्येक वर्ष संस्कार भारती नामित एक लाख रूपये की एफ.डी. में जमा की गयी धनराशि से प्राप्त ब्याज धनराशि में से कवि दरबार की मासिक गोष्ठी तथा संस्कार भारती द्वारा आयोजित काव्य प्रतियोगिता में सर्वश्रेष्ठ रूप से विजयी रहे 30 वर्ष तक के युवा कवि को प्रदान किया जायेगा। इस अवसर पर कवियों ने काव्यमयी हस्ताक्षर निर्भय जी को काव्यमयी श्रद्धांजलि अर्पित कीं। जिसमें निर्भय कुमार तथा निर्भय जी की पुत्रवधू श्रीमती पूनम शर्मा ने-‘दे गये कविता का वरदान, धन्य आप कविरत्न महान, देश आज भी तुम्हारा करता है सम्मान’ से भावांजलि अर्पित कीं।
प्रदीप पंडित-हम सभी आये यहां निर्भयजी के सम्मान में, के साथ निर्भयजी की अनेकों कवितायें सुनायीं। जिनमें प्रमुख थी-मंदिर बनेगा धूमधाम से, देश को आवश्यकता है मोहन मदन मुरारी की, चक्र सुदर्शनधारी की। रामभजनलाल सक्सैना-निर्भयजी का संदेश प्रेम करोगे प्रेम मिलेगा। चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य-खुशबू की तरह बिखर जायेंगे, सकुन बन के दिल में उतर जायेंगे। दिनेश राज कटारा-मंदिर में, गुरूद्वारों में, गलियों में, गलियारों में, ऐसा कोई धाम नहीं है जिसमें तेरा नाम नहीं है। पं. मनोज द्विवेदी-निर्भयजी की पुण्यतिथि है पावन, हर पल याद तुम्हारी आती मनभावन। राकेश रसिक-कभी गीत सी लगती है, कभी गीता सी लगती है, मेरी बेटी पुनीता सी लगती है।
वैद्य मोहन ब्रजेश रावत-ऋतु आयी सावन की मनभावन की, झूला झूलें बृज नारी, इन्हें देख मेरौ मन हरषायौ है। श्याम बाबू चिंतन-निर्भयजी का वंदन, इनकी कविताओं का अभिनन्दन। बासुदेव उपाध्याय-राधे मन का प्यार यहां। जयप्रकाश शर्मा-मानसी गंगा स्वच्छता अभियान से संदेश दिया निर्भयजी ने पर्यावरण संरक्षण का, बृज भूमि के सम्मान का, प्रेम भक्ति से पाने को भगवान का। केशवदेव सहयोगी, विष्णुदयाल वाष्र्णेय बजाज ने भी काव्य पाठ किया।
कवि दरबार द्वारा धर्मसम्राट स्वामी करपात्रीजी महाराज का जन्म जयन्ती पर सादर वंदन तथा हरियाली मधु श्रवण तीज पर महिला शक्ति का सम्मान किया गया।
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