Top News

हाथरस/सिकन्दराराव/सासनी- जिले में भाजपा की राह आसान नहीं, भाजपा प्रत्याशियों का जगह जगह हो रहा है विरोध प्रदर्शन, पुतला दहन, बीजेपी हाईकमान कोअपने निर्णय पर करना होगा विचार नहीं तो जीती जितायी सीटें हार जाने के बाद पछताने के अलावा कुछ नहीं बचेगा शेष, शोशल मीडिया पर टिकट बंटवारे की हो रही कडी आलोचना, सर्वे आदि को दिया जा रहा है नौटंकी करार

हाथरस/सिकन्दराराव/सासनी (संदीप पुण्ढ़ीर) । जैसे-जैसे मतदान की तारीख निकट  आती जा रही है। उसी प्रकार लोगों को भाजपा प्रत्याशी राज नहीं आ रहे। सभी ओर भाजपा प्रत्याशियों का विरोध जताया जा रहा है। एक ओर जहां सिकन्दराराव क्षेत्र के गांव टीकरी खुर्द मेंसिकन्दराराव भाजपा प्रत्याशी बीरेन्द्र सिंह राना के विरोध में नारेबाजी कर विरोध प्रदर्शन किया गया। तो वहीं सासनी के गांव खिटौली में भी हाथरस भाजपा प्रत्याशी हरीशंकर माहौर का पुतला दहन कर विरोध प्रदर्शन किया। जिसमें लोगों ने माहौर को हटाकर किसी और को टिकिट देने की मांग की । जब से भाजपा हाईकमान ने जिले की तीनों विधानसभाओं पर अपने प्रत्याशियों की घोषणा की तब से क्षेत्रिय लोगों में आक्रोश पनपता जा रहा है। शोशल मीडिया पर टिकट बंटवारे की कडी आलोचना हो रहीं हैं। जिस प्रकार से जनता का विरोध निकल कर सामने आ रहा है उससे लगता है कि भाजपा की राह आसान नहीं है। सादाबाद से जिला पंचायत सदस्य प्रीती चैधरी को एक कमजोर प्रत्याशी के रूप में देखा जा रहा है।

वैसी ही स्थिति सिकन्दराराव विधानसभा पर दिखाई दे रही है। वीरेन्द राना की छवि को लेकर प्रश्न उठाये जा रहे हैं और कहा जा रहा है कि वहां से एक लोकप्रिय युवा दावेदार को नजरन्दाज किया गया है। और इसका कारण उस पर धन का अभाव बताया जा रहा है। आरोप है कि चुनाव को जिले के बसपा नेता से सांठगांठ कर सांसद सहित अन्य जिम्मेदार लोगों ने खराब किया है।

  हाथरस सदर की सीट पर अन्य दलों में घूमकर आये हुए व्यक्ति को टिकिट देकर कार्यकर्ताओं का मनोबल तोडा जाना ही माना जा रहा है। शायद इस तरह से लगता है कि भाजपा किसी भी सीट पर दमदारी से खड़ी हुई नहीं दिख रही।
    सिकन्दराराव सीट से भाजपा प्रत्याशी बीरेन्द्र सिंह राणा के विरोध में क्षेत्र के गांव टीकरी खुर्द में ग्रामीणों ने नारेवाजी करते हुये विरोध प्रदर्शन किया। आक्रोशित ग्रामीणों का कहना था कि बीरेन्द्र सिंह राना को यहां कोई नही जानता है और वह यहां रहते भी नहीं है वह हाथरस में रहते हैं। ग्रामीणों का कहना था कि सांसद राजेश दिवाकर की तरह बीजेपी पार्टी और मोदी को देखते हुये ही अगर अबकी बार फिर से 5 साल तक लोगों को विकास के लिए तरसना पडेगा। हमारा प्रत्याशी ऐसा हो जिसको जनता जानती हो और सिकन्दराराव का विकास करायेना कि दिल्ली और लखनउ में ही राजेश दिवाकर की तरह पडा रहे। सिकन्दराराव की जनता को सिकन्दराराव का प्रत्याशी चाहिए।
        हाथरस सदर सीट से भाजपा प्रत्याशी हरीशंकर माहौर का भी भारी विरोध हो रहा है और पुतले फूंके जा रहे हैं। बुधवार को सासनी क्षेत्र के गांव खिटौली में हाथरस भाजपा प्रत्याशी हरीशंकर माहौर का पुतला दहन कर विरोध प्रदर्शन किया गया। पुतला दहन करने वालों का आरोप था कि माहौर पूर्व में भी विधायक रह चुके हैं। मगर उन्होंने समाज में विकास कम अपना विकास अधिक किया। आरोप था कि हरीशंकर माहौर राजनीति लायक नहीं हैं। माहौर की जगह यदि कोई और प्रत्याशी हो तो उसे अवश्य वोट दिया जा सकता है। मगर माहौर को गांव से कोई वोट नहीं देगा। इस दौरान गांव के सैकड़ो लोग मोजूद थे। अब सवाल उठता है कि भाजपा ने अपने प्रत्याशियों की घोषणा करने में सवसे ज्यादा समय लगाया तथा उम्मीदवारों के चुनाव हेतु सर्वे कराया गया, संघ की भी राय ली गयी परन्तु जिस तरह से प्रत्याशियों की घोषणा हुयी उससे तो सर्वे आदि की बात तो केवल बीजेपी की नौटंकी ही नजर आ रही है। लोगों का मानना है कि बीजेपी ने यहां सर्वे आदि के नाम पर जनता को गुमराह ही किया गया है। जिस प्रकार भाजपा प्रत्याशियों का जगह जगह विरोध प्रदर्शन व पुतला दहन किये जा रहे हैंऔर टिकट बंटवारे को लेकर सवाल खडे किये जा रहें हैं उससे तो साफ साफ नजर आ रहा है कि अब अगर यहां बीजेपी हाईकमान ने एक बार फिर अपने द्वारा लिये गये निर्णय पर विचार नही किया तो लगता है कि बीजेपी के खाते से जीती जितायी सीटें हार जाने के बाद पछताने के अलावा उसके पास कुछ शेष नही बचेगा।

Post a Comment

जयहिंद मीडिया नेटवर्क में अपनी बात रखने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद।

और नया पुराने