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हाथरस- पुरानी पेंशन बहाली के लिये मुख्यमंत्री से मिला अटेवा शिक्षक संघ

हाथरस। लम्बे समय से पुरानी पेंशन की बहाली के लिए संघर्ष कर रहे अटेवा के प्रतिनिधि मण्डल ने प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मुलाकात कर अपने तर्क रखते हुए पुरानी पेंशन की बहाली की मांग रखी। आला अफसरों की मौजूदगी में मुख्यमंत्री ने अटेवा के प्रतिनिधि मण्डल से विस्तार से चर्चा करते हुए  इस मामले में सहनाभूतिपूर्वक विचार का आश्वासन दिया। अटेवा-पेंशन बचाओ मंच उ.प्र. के प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार ‘बन्धु’ के नेतृत्व में प्रदीप कुमार, राजेश यादव ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से लोक भवन में पुरानी पेंशन बहाली के सन्दर्भ में मिला। 1 अप्रैल 2005 के बाद नियुक्त 10 लाख शिक्षकों, कर्मचारियों एवं अधिकरियों के बुढ़ापे की लाठी पुरानी पेंशन की बहाली के लिए संघर्षरत अटेवा पेंशन बचाओं मंच ने पुरजोर तरीके से  मुख्यमंत्री के सामने अपना पक्ष रखा। अटेवा के प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार ‘बन्धु’ ने बताया कि मुख्यमंत्री के पूूछने पर इससे कितने लोग प्रभावित हंै? एवं इससे सरकार पर कितना वित्तीय भार पडेगा? इस पर श्री बन्धु ने बताया कि इससे 50 लाख लोग सीधे प्रभावित हैं, जहॅा तक वित्तीय भार का सवाल है इससे कर्मचारियों एवं सरकार दोनों का नुकसान है और प्राइवेट कंपनियां कर्मचारी एवं सरकार के पैसे का लाभ उठा रही हैं। वार्ता के दौरान मुख्यमंत्री ने पुरानी पेंशन बहाली के लिए पूरी तरह से आश्वस्त किया और कहा कि जल्द ही इसका निराकरण किया जायेगा। श्री ‘बन्धु’ ने इस दौरान यह भी बताया कि नयी पेंशन योजना में कर्मचारियों के वेतन से उनके मूल वेतन और महंगाई का दस प्रतिशत धनराशि कटौती कर कर्मचारी के टीयर-1 खाते में जमा किया जाता है और उतनी ही धनराशि सरकार को कर्मचारियों के टीयर-1 खाते में भी जमा करना पड़ता है। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो नयी पेंशन योजना से आच्छादित कर्मचारी के नियुक्त होने के बाद से ही सरकार पर टीयर-1 धनराशि जमा के रूप में अतिरिक्त राजकोषीय दबाव का बोझ बढ़ जाता है। वहीं पुरानी पेंशन योजना में कर्मचारियों व अधिकारियों के नियुक्त होने के बाद नयी पेंशन योजना की तरह कर्मचारी के मूल वेतन और महंगाई के दस प्रतिशत के बराबर धनराशि सरकार को कर्मचारी के खाते में जमा नहीं करना पड़ता, बल्कि कर्मचारी के वेतन से ही जीपीएफ की कटौती कर धनराशि जमा होती रहती है। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान समय में राजकोषीय घाटे से जूझ रही सरकारों के लिए नयी पेंशन योजना के मुकाबले पुरानी पेंशन योजना राहत भरी योजना है। इसका एक अन्य पहलू ये भी है कि नयी पेंशन योजना से आच्छादित कर्मचारी व अधिकारी प्रायः युवा हैं। इस कारण सरकार पर पुरानी पेंशन भुगतान सम्बन्धी अतिरिक्त राजकोषीय भार आज से ही नहीं बल्कि लगभग बीस वर्ष  बाद ही पड़ेगा। बीस वर्ष बाद पड़ने वाले वित्तीय भार के लिए कोई भी राजनीतिक पार्टी पुरानी पेंशन योजना से वंचित पीड़ित कर्मचारियों व अधिकारियों के एक बहुत बड़े समूह की मांग को कैसे और कब तक नजर अंदाज करेंगी अथवा बीस वर्ष बाद पेंशन भुगतान के रूप में पड़ने वाले राजकोषीय भार के कारण राजनीतिक पार्टियां अपना वर्तमान खराब करने का जोखिम क्यों और कब. तक उठाएंगी। निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि पुरानी पेंशन बहाली के संघर्ष का भविष्य निश्चित रूप से उज्जवल है।

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