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हाथरस- धूमधाम से मनाया गया वीरांगना झलकारीवाई का 186 वां जन्मोत्सव, केक काटकर बच्चों को बांटी मिठाई

हाथरस। कोरी कुल की गौरव सन 1857 की प्रथम महिला स्वतंत्रता संग्राम सैनानी वीरांगना झलकारीवाई की कुर्वानी को सदैव स्मरण करते रहेंगे। क्योंकि वीरांगना झलकारीवाई ने कोरी समाज का ही नहीं सम्पूर्ण नारी जाति का गौरव से सिर ऊंचा किया। 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में आन्दोलन की प्रमुख भूमिका रानी लक्ष्मीबाई के भेष में वीरांगना झलकारीवाई ने अंग्रेजों से लडाई लडी जिसने अपने देश व स्वामी भक्ति की खातिर जान की बाजी लगाकर अपना नाम रोशन कर गई तथा प्रेरणा की श्रोत बनने में इतिहास के पन्ना में अपना नाम दर्ज कर अमिट छाप छोड गईं।
उक्त विचार बालापट्टी में स्थित संत कवीर बाल विद्यालय में विद्यालय के प्रबंधक व पूर्व सभासद रमन माहौर ने रखे। वीरांगना झलकारीवाई का 186 वां जन्मोत्सव बालापट्टी में संत कवीर बाल विद्यालय में बडे ही धूमधाम से मनाया। इस मौके पर प्रबंधक व पूर्व सभासद रमन माहौर ने केक काटकर व वीरांगना झलकारीवाई के छविचित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्जवलित कर शुभारम्भ किया। इस मौके पर बच्चों ने देशभक्ति गीत व सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करके सभी उपस्थितजनों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस खुशी के मौके पर सभी बच्चों को केक व मिष्ठान वितरण किया।
कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए समाजसेवी रविकुमार माहौर एड. ने कहा कि ऐसी वीरांगनाओं का इतिहास सभी स्कूलों में पढाया जाना आवश्यक है जिससे सभी जाति धर्म के बच्चों को देशभक्ति की प्रेरणा जाग्रत हो सके। समाजसेवी देवेन्द्र कुमार बघेल उर्फ गुड्डू ने कहा कि सरकार को ऐसी वीरांगना झलकारीवाई के जन्म समारोह पर 22 नवम्बर को राजकीय अवकाश की घोषणा करके सम्मान बढाना चाहिए। कु. गीता माहौर ने कहा कि झलकारीवाई जैसी निर्भीक, साहसी जिसने 14 वर्ष की अल्पायु में ही अपने ऊपर हमलाकर चीते को अपनी कुल्हाडी से बार करके मार गिराया तथा रानी लक्ष्मीबाई की महिला सेना की सेनापति बनाकर झलकारीवाई को जो सम्मान दिया उसके बदले में अंग्रेजों के आक्रमण से किले से कालपी प्रदेश को गुप्त रास्ते से सुरक्षित निकालने तथा रानी लक्ष्मीबाई की जगह पर 24 घण्टे के लिये झांसी की रानी बनकर अपने स्वामी भक्ति व देशभक्ति का अपनी जान न्यौछावर करके अंग्रेजों से युद्ध करते-करते शहीद होकर शान से अपना इतिहास में नाम अंकित करा गई। ऐसी वीरांगना से हमें प्रेरणा लेनी चाहिए तथा अपने जीवन में उनके बलिदान को याद रखना चाहिये।
इस मौके पर रेवती प्रसाद माहौर, राजकुमार माहौर, खेमचन्द्र माहौर नेताजी, प्रवीन शर्मा, बेबी शर्मा, राकेश माहौर, धीरज वर्मा, कौशल कुमार, सरगम माहौर, दिव्यांश माहौर आदि लोग मौजूद थे। संचालन राजकुमार माहौर ने किया।

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