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हाथरस- दीपावली पर्व को प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के स्थापना पर्व के रूप में मनाया गया, बुजुर्गों एवं मातृशक्तियों का किया सम्मान, विद्युत बल्वों तथा दीपकों से रोशन हुआ आश्रम, भाईदूज पर्व पर भाईयों को लगेगा आत्मिक स्मृति का तिलक होगी मंगलकामना

हाथरस। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की स्थापना परमपिता परमात्मा शिव ने आदि सनातन देवी देवता धर्म की पुनस्र्थापना करने के लिए 1937 में सिन्ध करांची हैदराबाद में इस ब्रह्माकुमारीज़ रूपी रूद्र गीता ज्ञान यज्ञ की स्थापना कराई। दीपावली के दिन ही एक साधारण व्यक्तित्व ने जो बाद में प्रजापिता ब्रह्मा बाबा के नाम से जाने गये अपना तन, मन, धन  माताओं बहिनों का एक ट्रस्ट बनाकर उनके हवाले कर दिया। यह संगठन संसार का सबसे पहला संगठन बना जहाँ पूरी कारोबार माताओं-बहिनों द्वारा संचालित किया जाता है और सभी धर्म सम्प्रदायों का सम्मान करते हुए दीपावली में अली और रमजान में है राम का सरस संदेश संसार के एक सौ चालीस से अधिक देशों में पहुँचा रहा है। यह जानकारी दीपमाला के अवसर पर अलीगढ़ रोड स्थित आनन्दपुरी कालोनी के प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की राजयोग शिक्षिका बी.के. शान्ता बहिन ने दी।
प्रातःकाल सभी ब्रह्मावत्सों के साथ दीप प्रज्जवलन किया गया तथा मातृशक्तियों के साथ-साथ उन बुजुर्गों का सम्मान भी किया गया जिन्होंने अनेक मनुष्यात्माओं के जीवन में ज्ञान की रोशनी करके उनके जीवन को प्रकाशित किया है। सेवाकेन्द्र पर ईको फ्रेंडली दीपावली मनाई गयी वातावरण को प्रदूषित करने वाले पटाखों का उपयोग करने से परहेज रखा गया।
इस अवसर पर अपने सम्बोधन में सेवाकेन्द्र संचालिका बी.के. शान्ता बहिन ने कहा कि बाहर का दीपक बाहर का अंधकार दूर कर सकता है लेकिन अन्तःकरण में जगा हुआ आत्मदीपक न केवल स्वयं के मन की कलुषता को दूर करता है बल्कि संसार में बहुत सी मनुष्यात्माओं के जीवन में छाये हुए दुःख, अशान्ति, कलह, क्लेश, कष्टों के अंधकार को दूर करने में सहयोगी बनता है। आज ऐसे ही आत्मा रूपी दीपक जलाने की जरूरत है। इस अवसर पर दाऊदयाल अग्रवाल, बी.के. कैप्टन अहसान सिंह, चन्द्रपाल शर्मा, प्रमेश कुमार, उर्मिला बहिन, राजेश कुमार आदि को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में जनदीकी गीतापाठशालाओं से आये ब्रह्मावत्स उपस्थित थे। इस असवर पर मंगलवार को भाईदूज पर्व पर भाईयों के स्नेह मिलन मनाये जाने की जानकारी भी बी.के. षान्ता बहिन ने दी।

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