हाथरस। जिला बागला अस्पताल का बुरा हाल है, जिलाधिकारी चाहे जितने जतन कर लें, बाहरी लोगो के अलावा ऐंम्बूलेस के चालको की मनमानी के आगे किसी की नही चल सकती।
अमरेजेंसी मे कोई दुर्घटना का मरीज आता है तो वहा पत्रकार हो अथवा नही, उनकी गैर मोजूदगी मे एसे लोग मोबाइल से फोटो खींचते देखे जा सकते है जिनका पत्रकारिता से सो सो कोस बास्ता नही है। ऐसे लोगो की हरकत से डाक्टर भी परेशान है मगर वह भी कुछ नही कर पाते। हैरानी की बात तो यह है कि सीएमओ तथा सीएमएस सब कुछ जानते हुए भी अनजान बने रहते है जो चिंता का बिषय है। एक दो बार ऐम्बूलेंस वालो को हड़काया जरूर गया मगर कोई फर्क नही पड़ा। अगर जिलाधिकारी गुप्त रूप से जांच करायें तो सरी हकीकत सामने आ जायेगी।
बतादें कि जिला बागला अस्पताल मे जो हो रहा है वह किसी से छिपा नही है, ग्रामीण अंचलो से आने वाले मरीजो के जीबन से खिलवाड़ किया जा रहा है। डाक्टरो की मौजूदगी मे वाहरी लोग मरीजो को इंजेक्शन लगाते है, बोतल लगाते है, दबाओ को देते है, जो नये लड़के लड़की यंहा सीखने कि लिये आये है वह भी मरीजो को इजेक्शन, दबाओ को देते है। जानकारो की माने तो जो लड़़के तथा लड़की अस्पताल मे सीखने के लिये आये है उनको पहले डाक्टर अपनी देख रेख मे इंजेक्शन बोतल लगाने के अलावा वह सभी काम सिखायेगा जो अस्पताल मे सीखने के लिये आया है। अभी कुछ दिनो पहले एक घटना सामने आ चुकी है एक ब्रद्व महिला को बोतल लगाई गई उसके बाद सिरंज किसी प्रकार लापरवाही के कारण हाथ की नस मे घुस गई जिससे उसकी हालत बिगड़ने के बाद काफी बखेड़ा हुआ अस्पताल मे किसी प्रकार महिला के परिजनो को समझा बुझा कर मरीज को आगरा भेज दिया गया जंहा उसकी मौत हो गई जिसकी जांच चल रही है।
लोगो की माने तो सबसे बुरा हाल तो एंम्बूलेंस के चालको ने कर रख है, जब कोई मरीज अमरजेंसी मे आता है तो पत्रकारो के सामने तथा उनकी गैर मोजूदगी मे कुछ चालक घायल के फोटे खीचते देखे जा सकते है, जिनको कोई रोकने बाला नही है। यह लोग फोटो खीचने के बाद घायल तथा उनके साथ आये परिजनो से घटना के बारे मे जानकारी करते है, मानो की कोई पत्रकार अपने समाचार पत्र के लिये जानकारी जुटा रहा हो। लोगो की माने तो यह लोग मरीजो को पत्रकार बन कर आगरा तथा अलीगढ अपने सेटिंग वाले नर्सिग होम मे ले जाते है ताकि वहा मरीज के साथ छल कर मोटी रकम अपनी जेब मे रखी जा सके। लोगो की माने तो मरीज पत्रकार समझ कर उनके झासे मे आ जाते है और अपना उल्लो सीधा कर मरीज के साथ छल किया जा रहा है। लोगो की माने तो जिलाधिकारी गुप्त रूप से जांच कराये तो सारे मामले की पोल खुल जायेगी।
अमरेजेंसी मे कोई दुर्घटना का मरीज आता है तो वहा पत्रकार हो अथवा नही, उनकी गैर मोजूदगी मे एसे लोग मोबाइल से फोटो खींचते देखे जा सकते है जिनका पत्रकारिता से सो सो कोस बास्ता नही है। ऐसे लोगो की हरकत से डाक्टर भी परेशान है मगर वह भी कुछ नही कर पाते। हैरानी की बात तो यह है कि सीएमओ तथा सीएमएस सब कुछ जानते हुए भी अनजान बने रहते है जो चिंता का बिषय है। एक दो बार ऐम्बूलेंस वालो को हड़काया जरूर गया मगर कोई फर्क नही पड़ा। अगर जिलाधिकारी गुप्त रूप से जांच करायें तो सरी हकीकत सामने आ जायेगी।
बतादें कि जिला बागला अस्पताल मे जो हो रहा है वह किसी से छिपा नही है, ग्रामीण अंचलो से आने वाले मरीजो के जीबन से खिलवाड़ किया जा रहा है। डाक्टरो की मौजूदगी मे वाहरी लोग मरीजो को इंजेक्शन लगाते है, बोतल लगाते है, दबाओ को देते है, जो नये लड़के लड़की यंहा सीखने कि लिये आये है वह भी मरीजो को इजेक्शन, दबाओ को देते है। जानकारो की माने तो जो लड़़के तथा लड़की अस्पताल मे सीखने के लिये आये है उनको पहले डाक्टर अपनी देख रेख मे इंजेक्शन बोतल लगाने के अलावा वह सभी काम सिखायेगा जो अस्पताल मे सीखने के लिये आया है। अभी कुछ दिनो पहले एक घटना सामने आ चुकी है एक ब्रद्व महिला को बोतल लगाई गई उसके बाद सिरंज किसी प्रकार लापरवाही के कारण हाथ की नस मे घुस गई जिससे उसकी हालत बिगड़ने के बाद काफी बखेड़ा हुआ अस्पताल मे किसी प्रकार महिला के परिजनो को समझा बुझा कर मरीज को आगरा भेज दिया गया जंहा उसकी मौत हो गई जिसकी जांच चल रही है।
लोगो की माने तो सबसे बुरा हाल तो एंम्बूलेंस के चालको ने कर रख है, जब कोई मरीज अमरजेंसी मे आता है तो पत्रकारो के सामने तथा उनकी गैर मोजूदगी मे कुछ चालक घायल के फोटे खीचते देखे जा सकते है, जिनको कोई रोकने बाला नही है। यह लोग फोटो खीचने के बाद घायल तथा उनके साथ आये परिजनो से घटना के बारे मे जानकारी करते है, मानो की कोई पत्रकार अपने समाचार पत्र के लिये जानकारी जुटा रहा हो। लोगो की माने तो यह लोग मरीजो को पत्रकार बन कर आगरा तथा अलीगढ अपने सेटिंग वाले नर्सिग होम मे ले जाते है ताकि वहा मरीज के साथ छल कर मोटी रकम अपनी जेब मे रखी जा सके। लोगो की माने तो मरीज पत्रकार समझ कर उनके झासे मे आ जाते है और अपना उल्लो सीधा कर मरीज के साथ छल किया जा रहा है। लोगो की माने तो जिलाधिकारी गुप्त रूप से जांच कराये तो सारे मामले की पोल खुल जायेगी।
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