हाथरस/सासनी। केएल जैन इंटर कालेज परिसर में श्रीमद्भगवत सेवा समिति एवं ग्रामीण क्षेत्र के बैनरतले आयोजित आज श्रीमद्भागवत सप्ताह पारायण ज्ञान महायज्ञ के दौरान विश्व विख्यात भागवत भाष्कर ब्रज गौरव श्री कृष्णचंद शास्त्री ठाकुर जी महाराज ने भगवान कृष्ण एवं रामावतार की कथा का बड़े ही रोचक ढंग से वर्णन किया।
श्रीमद्भागवत सप्ताह पारायण ज्ञान महायज्ञ में आचार्य ठाकुर जी महाराज ने कथा के दौरान भगवान श्रीराम अवतार के बारे में बताया कि जब भगवान श्री राम का जन्म हुआ तो देवी देवताओं में भारी प्रसन्नता जाग्रत हो गई तथा आकाश से देवगण पुष्पवर्षा करने लगे। राजा दशरथ ने स्वर्णवर्षा की और भगवान सूर्य तो इतने मोहित हो गये कि एक माह के लिए अयोध्या में ही डेरा जमा लिया। तब अयोध्या में एक माह का एक दिन हुआ। वहां तुलसी दास जी ने लिखा है कि मास दिवस कर दिवस भा, मरम जानेऊ कोय। रथ समेत रवि था गयेऊ, निशा कबन विधि होय।। इसके बाद आचार्य ने सुनाया कि जब भगवान श्रीकृष्ण ने बंदीग्रह में मां देवकी के गर्भ से अवतार लिया तो कारागार के ताले टूट गये, पहरेदार सो गये। तब वासुदेव जी एक सूप में रखकर कृष्ण को गोकुल पहुंचाने ले गये और वहां से कन्या ले आए, कन्या के कारागार में आते ही सब पहले की तरह हो गया। इसकी जानकारी जब कंस को हुई तो कंस ने कन्या को मारने के लिए ज्यों ही उसे पैर पकड़कर जमीन पर मारना चाहा तो कन्या हाथ से छूटकर आसमान में जा पहुंची और कंस को उसके अंत करने वाले का ठिकाना बता गई। इस पर कंस ने गोकुल में कई नवजात शिशुओं की हत्या कराकर एक जघन्य पाप का भागीदार बन गया। गोकुल में भगवान कृष्ण के पहुंचने पर वहां नंदोत्सव मनाया गया। कथा का भावार्थ बताते हुए आचार्य ने सुनाया कि कभी भी भगवान के विरुद्ध नहीं जाना चाहिए। वैसे तो भगवान किसी को अपना दुश्मन नहीं मानते मगर मनुष्य अपने कर्मों के अनुसार भगवान का दोषी बन जाता है। यदि भगवान को प्रेमपूर्वक स्मरण करें तो निश्चित रुप से सांसारिक सुख भोगकर मोक्ष प्राप्ति कर सकते हैं।
कथा श्रवण के दौरान राजा परीक्षित बने महेन्द्र सिंह सोलंकी व उनकी पत्नी अंजली सोलंकी, महेश नंदन अग्रवाल, संजय सिंह सेंगर, चैधरी अर्जुन सिंह, हरवीर सिंह तोमर, बौबी पाठक, जितेन्द्र शर्मा, रुपेश उपाध्याय, हेमंत सेंगर, हरीशंकर वाष्र्णेय, दिनेशचंद्र वाष्र्णेय, महेशचंद्र वाष्र्णेय, केसी सोलंकी, मनोज अग्निेहोत्री, किशन सिंह, राजपाल सिंह, डा. जितेन्द्र सोलंकी आदि हजारों भक्त कथा का रसपान कर अपने जीवन को धन्य कर रहे हैं।
श्रीमद्भागवत सप्ताह पारायण ज्ञान महायज्ञ में आचार्य ठाकुर जी महाराज ने कथा के दौरान भगवान श्रीराम अवतार के बारे में बताया कि जब भगवान श्री राम का जन्म हुआ तो देवी देवताओं में भारी प्रसन्नता जाग्रत हो गई तथा आकाश से देवगण पुष्पवर्षा करने लगे। राजा दशरथ ने स्वर्णवर्षा की और भगवान सूर्य तो इतने मोहित हो गये कि एक माह के लिए अयोध्या में ही डेरा जमा लिया। तब अयोध्या में एक माह का एक दिन हुआ। वहां तुलसी दास जी ने लिखा है कि मास दिवस कर दिवस भा, मरम जानेऊ कोय। रथ समेत रवि था गयेऊ, निशा कबन विधि होय।। इसके बाद आचार्य ने सुनाया कि जब भगवान श्रीकृष्ण ने बंदीग्रह में मां देवकी के गर्भ से अवतार लिया तो कारागार के ताले टूट गये, पहरेदार सो गये। तब वासुदेव जी एक सूप में रखकर कृष्ण को गोकुल पहुंचाने ले गये और वहां से कन्या ले आए, कन्या के कारागार में आते ही सब पहले की तरह हो गया। इसकी जानकारी जब कंस को हुई तो कंस ने कन्या को मारने के लिए ज्यों ही उसे पैर पकड़कर जमीन पर मारना चाहा तो कन्या हाथ से छूटकर आसमान में जा पहुंची और कंस को उसके अंत करने वाले का ठिकाना बता गई। इस पर कंस ने गोकुल में कई नवजात शिशुओं की हत्या कराकर एक जघन्य पाप का भागीदार बन गया। गोकुल में भगवान कृष्ण के पहुंचने पर वहां नंदोत्सव मनाया गया। कथा का भावार्थ बताते हुए आचार्य ने सुनाया कि कभी भी भगवान के विरुद्ध नहीं जाना चाहिए। वैसे तो भगवान किसी को अपना दुश्मन नहीं मानते मगर मनुष्य अपने कर्मों के अनुसार भगवान का दोषी बन जाता है। यदि भगवान को प्रेमपूर्वक स्मरण करें तो निश्चित रुप से सांसारिक सुख भोगकर मोक्ष प्राप्ति कर सकते हैं।
कथा श्रवण के दौरान राजा परीक्षित बने महेन्द्र सिंह सोलंकी व उनकी पत्नी अंजली सोलंकी, महेश नंदन अग्रवाल, संजय सिंह सेंगर, चैधरी अर्जुन सिंह, हरवीर सिंह तोमर, बौबी पाठक, जितेन्द्र शर्मा, रुपेश उपाध्याय, हेमंत सेंगर, हरीशंकर वाष्र्णेय, दिनेशचंद्र वाष्र्णेय, महेशचंद्र वाष्र्णेय, केसी सोलंकी, मनोज अग्निेहोत्री, किशन सिंह, राजपाल सिंह, डा. जितेन्द्र सोलंकी आदि हजारों भक्त कथा का रसपान कर अपने जीवन को धन्य कर रहे हैं।
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