हाथरस/सासनी। बीती रात गांव जलालपुर बांधनू में भोजन करने के बाद सोए परिवार के पांच लोग अचानक बीमार हो गये। जिनका उपचार सीएचसी में कराया गया है।
गांव जलालपुर बांधनू निवासी नेत्रपाल पुत्र साहब सिंह खाने के लिए बाजार से तोरई खरीदकर ले गया था। जिसकी उसकी पत्नी से सब्जी बनाई और खाना तैयार किया। खाना खाने के बाद परिवार के सभी लोग दूध पीकर सो गये। तभी आधी रात को परिवार के सदस्यों की हालत बिगडने लगी। पेट में दर्द, उल्टी, तथा दस्त लग गये। इसकी जानकारी नेत्रपाल के पड़ौसियों को हुई तो उन्होंने गांव के चिकित्सक को बुलाया और चिकित्सक ने रात को परिवार के सदस्यों की बिगड़ी हालत को देखकर हाथ खड़े कर दिए। तब ग्रामीणों ने ऐंबुलेंस बुलाकर नेत्रपाल (50) तथा उसकी पत्नी प्रकाशवती (45) पुत्र कृष्ण कुमार (15), विकास (13) पुत्री रागिनी (10) को सीएचसी में भर्ती कराया। जहां अथक प्रयास के बाद चिकित्सकों ने नेत्रपाल के बीमार लोगों की हालत पर काबू पा लिया। एक बार तो चिकित्सक बीमार लोगों को रेफर करने का मन बना ही रहे थे। मगर डा. एमआई आलम द्वारा मरीजों को दवाएं देने पर लाभ होने लगा तो सीएचसी में ही बीमारों पर काबू पा लिया गया।
चिकित्सकों ने बताया कि आजकल सब्जियों में भी केमिकल का प्रयोग किया जा रहा है। खेतों में भी किसान विषैली दवाओं का प्रयोग कर रहे हैं। संभवतः नेत्रपाल की पत्नी ने सब्जी बनाने से पूर्व तोरई को ठीक से धोया नहीं होगा। जिसकी वजह से परिवार के सदस्यों की हालत बिगड़ गई।
गांव जलालपुर बांधनू निवासी नेत्रपाल पुत्र साहब सिंह खाने के लिए बाजार से तोरई खरीदकर ले गया था। जिसकी उसकी पत्नी से सब्जी बनाई और खाना तैयार किया। खाना खाने के बाद परिवार के सभी लोग दूध पीकर सो गये। तभी आधी रात को परिवार के सदस्यों की हालत बिगडने लगी। पेट में दर्द, उल्टी, तथा दस्त लग गये। इसकी जानकारी नेत्रपाल के पड़ौसियों को हुई तो उन्होंने गांव के चिकित्सक को बुलाया और चिकित्सक ने रात को परिवार के सदस्यों की बिगड़ी हालत को देखकर हाथ खड़े कर दिए। तब ग्रामीणों ने ऐंबुलेंस बुलाकर नेत्रपाल (50) तथा उसकी पत्नी प्रकाशवती (45) पुत्र कृष्ण कुमार (15), विकास (13) पुत्री रागिनी (10) को सीएचसी में भर्ती कराया। जहां अथक प्रयास के बाद चिकित्सकों ने नेत्रपाल के बीमार लोगों की हालत पर काबू पा लिया। एक बार तो चिकित्सक बीमार लोगों को रेफर करने का मन बना ही रहे थे। मगर डा. एमआई आलम द्वारा मरीजों को दवाएं देने पर लाभ होने लगा तो सीएचसी में ही बीमारों पर काबू पा लिया गया।
चिकित्सकों ने बताया कि आजकल सब्जियों में भी केमिकल का प्रयोग किया जा रहा है। खेतों में भी किसान विषैली दवाओं का प्रयोग कर रहे हैं। संभवतः नेत्रपाल की पत्नी ने सब्जी बनाने से पूर्व तोरई को ठीक से धोया नहीं होगा। जिसकी वजह से परिवार के सदस्यों की हालत बिगड़ गई।
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