हाथरस। जिलाधिकारी डा0 रमा शंकर मौर्य ने कलेक्ट्रेट सभागार में राज्य पोषण मिशन के अन्तर्गत संचालित जिला पोषण समिति की समीक्षा बैठक की। जिसके तहत जनपद के कुपोषण से चिन्हित गाॅव को कुपोषण मुक्त करने पर चर्चा की गयी। जिलाधिकारी ने बच्चों के होने वाली आधी मृत्यु का कारण कुपोषण को बताया। उन्होने सख्त निर्देश दिया कि कुपोषण मुक्त गांवों में पुनः कुपोषित बच्चे न मिले अन्यथा की स्थिति में कड़ी कार्यवाही की जायेगी। उन्होने कहा कि आगनवाडी कार्यकत्री, सुपरवाइजर तथा अन्य ग्रामीण स्तर के कर्मचारी अपने अपने क्षेत्र में बच्चों की कुपोषण से बचने की उपायों के बारे में अभिभावकों को जागरूक करें। बच्चों में कुपोषण गर्भावस्था के दौरान उचित देखभाल न होने से, अपर्याप्त भोजन, दस्त तथा स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव है। उन्होने कहा कि जनपद को कुपोषण मुक्त करने के लिए शिक्षा विभाग, पंचायती राज, आईसीडीएस, स्वास्थ्य, खाद्य एवं रसद तथा ग्राम विकास विभागों को एक साथ मिलकर काम करना होगा। उन्होने सभी अधिकारियों से कुपोषित गांव को लगातार मानीटरिंग करने के निर्देश दियें। जिलाधिकारी ने सभी सम्बन्धित अधिकारियों से अपने अपने गांव का निरीक्षण करने के निर्देश दिये तथा जिला कार्यक्रम अधिकारी से कल शाम तक रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिया। जिलाधिकारी ने प्रत्येक गांव में कुपोषण के प्रति जागरूक करने के लिए वालपेटिंग कराने हेतु पे्रषित किये गये धनराशि से होने वाले वालपेटिंग के बारे में जानकारी ली। जिला कार्यक्रम अधिकारी ने सभी जगहो पर वालपेटिंग न होने की जानकारी दी। जिस पर जिलाधिकारी ने नाराजगी व्यक्त करते हुए शीघ्र वालपेटिंग कराने के उपरान्त फोटोंग्राफ प्रेषित करने के निर्देश दिये।
परियोजना निदेशक चन्द्रशेखर शुक्ला ने कहा कि सभी अधिकारीगण जिनको कुपोषण युक्त गांवों को गोद दिया गया हैै वह सभी लोग व्यक्तिगत स्तर पर गांव में जाकर के उन परिवारो से सम्पर्क करें। तथा जो भी भ्रमण रिपोर्ट संग्रहित हो उसे प्रस्तुत करे। उन्होने कहा कि गांव को कुपोषण मुक्त करने के लिए सभी विभागो को एक साथ मिलकर प्रयास करना होगा। जिला कार्यक्रम अधिकारी मुन्नी दिवाकर ने बताया कि बताया कि अधिकारियों द्वारा गोद लियें गयें गांव में कुल 07 राजस्व गांव कुपोषण मुक्त होने अवशेष है। जिसमें मुख्य चिकित्साधिकारी के विकास खण्ड मुरसान के गांव मीतई, जिला कार्यक्रम अधिकारी के गांव टिमरली, जिला युवा कल्याण अधिकारी के विकास खण्ड हाथरस के गंगचैली, जिला पिछडा वर्ग कल्याण अधिकारी के विकास खण्ड सासनी के रहना तथा अपर मुख्य चिकित्साधिकारी के गांव नगला सेवा कुपोषण से मुक्त होने अवशेष है। उन्होने बताया कुपोषण मुक्त होने के लिए दो मुख्य मानक निर्धारित कियें गयें हैं। जिसके तहत उस गांव में 75 प्रतिशत गर्भवती महिलायें आयरन फोलिक एसिड की निर्धारित मात्रा का सेवन करें। ताकि गर्भवास्था के आखिरी त्रैमास में किसी भी गांव में गर्भवती महिलाओं में एनीमिया की व्यापकता 25 प्रतिशत से कम हो, जो वर्तमान में 50 प्रतिशत इसे अलावा उस गांव में 6 माह से 5 वर्ष तक का कोई बच्चा डब्लू0एच0ओं0 ग्रोथ चार्ज के अनुसार लाल श्रेणी में न हों। डिविजनल टेक्निकल पर्सन युनीसेफ अभिषेक पाठक ने गांव को कुपोषण मुक्त करने के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस अवसर पर जिला विकास अधिकारी मंजु श्रीवास्तव, मुख्य चिकित्साधिकारी बृजेश राठौर जिला दिव्यागजन एव सश्क्तीकरण अधिकारी प्रतिभा पाल, जिला पूर्ति अधिकारी सुरेन्द्र यादव, समस्त अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी, समस्त सीडीपीओं तथा अन्य सम्बन्धित अधिकारीगण उपस्थित रहे।
परियोजना निदेशक चन्द्रशेखर शुक्ला ने कहा कि सभी अधिकारीगण जिनको कुपोषण युक्त गांवों को गोद दिया गया हैै वह सभी लोग व्यक्तिगत स्तर पर गांव में जाकर के उन परिवारो से सम्पर्क करें। तथा जो भी भ्रमण रिपोर्ट संग्रहित हो उसे प्रस्तुत करे। उन्होने कहा कि गांव को कुपोषण मुक्त करने के लिए सभी विभागो को एक साथ मिलकर प्रयास करना होगा। जिला कार्यक्रम अधिकारी मुन्नी दिवाकर ने बताया कि बताया कि अधिकारियों द्वारा गोद लियें गयें गांव में कुल 07 राजस्व गांव कुपोषण मुक्त होने अवशेष है। जिसमें मुख्य चिकित्साधिकारी के विकास खण्ड मुरसान के गांव मीतई, जिला कार्यक्रम अधिकारी के गांव टिमरली, जिला युवा कल्याण अधिकारी के विकास खण्ड हाथरस के गंगचैली, जिला पिछडा वर्ग कल्याण अधिकारी के विकास खण्ड सासनी के रहना तथा अपर मुख्य चिकित्साधिकारी के गांव नगला सेवा कुपोषण से मुक्त होने अवशेष है। उन्होने बताया कुपोषण मुक्त होने के लिए दो मुख्य मानक निर्धारित कियें गयें हैं। जिसके तहत उस गांव में 75 प्रतिशत गर्भवती महिलायें आयरन फोलिक एसिड की निर्धारित मात्रा का सेवन करें। ताकि गर्भवास्था के आखिरी त्रैमास में किसी भी गांव में गर्भवती महिलाओं में एनीमिया की व्यापकता 25 प्रतिशत से कम हो, जो वर्तमान में 50 प्रतिशत इसे अलावा उस गांव में 6 माह से 5 वर्ष तक का कोई बच्चा डब्लू0एच0ओं0 ग्रोथ चार्ज के अनुसार लाल श्रेणी में न हों। डिविजनल टेक्निकल पर्सन युनीसेफ अभिषेक पाठक ने गांव को कुपोषण मुक्त करने के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस अवसर पर जिला विकास अधिकारी मंजु श्रीवास्तव, मुख्य चिकित्साधिकारी बृजेश राठौर जिला दिव्यागजन एव सश्क्तीकरण अधिकारी प्रतिभा पाल, जिला पूर्ति अधिकारी सुरेन्द्र यादव, समस्त अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी, समस्त सीडीपीओं तथा अन्य सम्बन्धित अधिकारीगण उपस्थित रहे।
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