हाथरस। राज्य अध्यापक पुरस्कार से सम्मानित डी.आर.बी. इण्टर कालेज के यशस्वी एवं कर्मठ प्रधानाचार्य स्वतंत्र कुमार गुप्त के आज सेवानिवृत्त होने पर कालेज के प्रबन्ध तंत्र, छात्र-छात्राओं, शिक्षकों एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों द्वारा भावभीनी विदाई दी गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रबन्धक आर.पी. कौशिक ने की।
इस अवसर पर वक्ताओं ने श्री गुप्त द्वारा विद्यालय विकास हेतु किये गये अनवरत प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि श्री गुप्त के परिश्रम, दृढ, इच्छा शक्ति बालक-बालिकाओं के प्रति उनका असीम स्नेह एवं पल-पल पर दिया गया प्रोत्साहन, विपरीत परिस्थितियों में संघर्ष करने की अदभुत क्षमता का ही परिणाम है कि आज डी.आर.बी. कालेज की उत्कृष्ट छवि समाज में व्याप्त है। वक्ताओं ने श्री गुप्त की दीर्घायु की कामना करते हुए आशा व्यक्त की कि वह निकट भविष्य में अपने सम्पूर्ण जीवन को शैक्षिक उन्नयन एवं समाज सेवा में समर्पित कर देगें।
वक्ताओं ने कहा कि-उजाले अपनी यादों के हजारे साथ रहने दो, न जाने किस गली में जिन्दगी की शाम हो जाये।
अपने विदाई समारोह में भव्य स्वागत से अभिभूत श्री गुप्त ने कहा कि इस कालेज कि सेवा करते हुए उन्हें सदैव हर्ष एवं आनन्द की अनुभूति हुई। उन्होंने छात्र-छात्राओं से अपेक्षा की कि यदि जीवन में आगे बढना है और ऊॅचाईयों तक पहुॅचना है तो उसके लिए एक-एक क्षण का सदुप्रयोग करना होगा एवं वाधाओं से टकराते हुए दृढ इच्छा शक्ति के बल पर विजय प्राप्त करनी होगी। तभी हम अपनी एक पहचान बना सकेगें।
इस अवसर पर भावी प्रधानाचार्य डा. रामनिवास दुबे, पूर्व प्रबन्धक सतीश चन्द्र गुप्त, पूर्व सभासद शिव कुमार वाष्र्णेय, संजय मौर्य, प्रवीन कुमार, महेश चन्द्र, सतीश कुमार, अजय गौड, रामवती, कमलेश गुप्ता, मीरा रानी, आलोक गुप्ता, तुलसी प्रसाद, कैलाश चन्द्र, बीनू, नीतू, जितेन्द्र कुमार, शैलेन्द्र गौतम, प्रमोद शर्मा, एम.पी. सिंह, भीकेन्द्र वाष्र्णेय, आर.के. जैन, प्रमोद सैंगर, अमित कुमार, रामू माहेश्वरी, वीरेन्द्र सिंह, रवि प्रकाश, राधाचरण शर्मा, उमा वर्मा, राजबाला, आर.के. जैन, सोनू शर्मा आदि ने पुष्प मालाऐं पहनाकर श्री गुप्त को भावभीनी विदाई दी। कार्यक्रम का संचालन दाऊदयाल ने किया। अन्त में कालेज के भावी प्रधानाचार्य डा. रामनिवास दुबे ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया।
इस अवसर पर वक्ताओं ने श्री गुप्त द्वारा विद्यालय विकास हेतु किये गये अनवरत प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि श्री गुप्त के परिश्रम, दृढ, इच्छा शक्ति बालक-बालिकाओं के प्रति उनका असीम स्नेह एवं पल-पल पर दिया गया प्रोत्साहन, विपरीत परिस्थितियों में संघर्ष करने की अदभुत क्षमता का ही परिणाम है कि आज डी.आर.बी. कालेज की उत्कृष्ट छवि समाज में व्याप्त है। वक्ताओं ने श्री गुप्त की दीर्घायु की कामना करते हुए आशा व्यक्त की कि वह निकट भविष्य में अपने सम्पूर्ण जीवन को शैक्षिक उन्नयन एवं समाज सेवा में समर्पित कर देगें।
वक्ताओं ने कहा कि-उजाले अपनी यादों के हजारे साथ रहने दो, न जाने किस गली में जिन्दगी की शाम हो जाये।
अपने विदाई समारोह में भव्य स्वागत से अभिभूत श्री गुप्त ने कहा कि इस कालेज कि सेवा करते हुए उन्हें सदैव हर्ष एवं आनन्द की अनुभूति हुई। उन्होंने छात्र-छात्राओं से अपेक्षा की कि यदि जीवन में आगे बढना है और ऊॅचाईयों तक पहुॅचना है तो उसके लिए एक-एक क्षण का सदुप्रयोग करना होगा एवं वाधाओं से टकराते हुए दृढ इच्छा शक्ति के बल पर विजय प्राप्त करनी होगी। तभी हम अपनी एक पहचान बना सकेगें।
इस अवसर पर भावी प्रधानाचार्य डा. रामनिवास दुबे, पूर्व प्रबन्धक सतीश चन्द्र गुप्त, पूर्व सभासद शिव कुमार वाष्र्णेय, संजय मौर्य, प्रवीन कुमार, महेश चन्द्र, सतीश कुमार, अजय गौड, रामवती, कमलेश गुप्ता, मीरा रानी, आलोक गुप्ता, तुलसी प्रसाद, कैलाश चन्द्र, बीनू, नीतू, जितेन्द्र कुमार, शैलेन्द्र गौतम, प्रमोद शर्मा, एम.पी. सिंह, भीकेन्द्र वाष्र्णेय, आर.के. जैन, प्रमोद सैंगर, अमित कुमार, रामू माहेश्वरी, वीरेन्द्र सिंह, रवि प्रकाश, राधाचरण शर्मा, उमा वर्मा, राजबाला, आर.के. जैन, सोनू शर्मा आदि ने पुष्प मालाऐं पहनाकर श्री गुप्त को भावभीनी विदाई दी। कार्यक्रम का संचालन दाऊदयाल ने किया। अन्त में कालेज के भावी प्रधानाचार्य डा. रामनिवास दुबे ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया।
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