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हाथरस- धर्म के रास्ते पर चलकर ही कल्याण हो सकता है- भैय्याजी

हाथरस। धर्म के रास्ते पर चल कर ही कल्याण हो सकता है। आचार्य मुनियों ने हमें जो रास्ता धर्म का दिखाया है हम उसी रास्ते पर चलकर समाज की सेवा करने का कार्य कर रहे हैं।  उक्त बातें 1008 श्री महावीर दिगम्बर जैन मन्दिर हलवाई खाना में चल रहे श्री सिद्धचक्र विधान महोत्सव के पाॅचवे दिन श्रवण ज्ञान भारती मथुरा से पधारे         विधानाचार्य आशुतोष भैय्याजी ने कहीं। उन्होंने अपने प्रवचन में कहा कि सम्यकदर्शन ज्ञान प्राप्त करने के बाद मनुष्य प्रथम नरक में जाने से बच जाता है उसे पशु गति प्राप्त नहीं होती है और न ही वह 1 इन्द्रीय जीव, न ही दो इन्द्रीय जीव बनता है। सम्यकदर्शन सात तत्वों से सच्चा श्रदान करने से होता है इसके बिना ज्ञान चरित्र नहीं होता। सम्यक दर्शन ज्ञान चरित्र से मिलकर बनता है। भगवान के अभिषेक के बारे में उन्होंने बताया कि हम भगवान का अभिषेक अपने अन्दर गन्दगी साफ करने के लिये करते हैं उनका जो प्रक्षाल (गन्धोदक) लगाते हैं उससे हमारे शरीर की गन्दगी दूर होती है और धर्म के प्रति सच्ची भावना बनती है।
सिद्व चक्र महामण्डल विधान के पाॅचवें दिन प्रातः मंत्रोचारण के साथ भगवान का अभिषेक, नित्य नियम पूजन के साथ शान्तीधारा की गयी, प्रतिदिन 6 से 7 घण्टे लगातार चल रहे सिद्धचक्र महामण्डल विधान में सैकडों की संख्या में महिला पुरूष मौजूद थे।

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