हाथरस। सामाजिक धरोहर कल्याण समिति के अध्यक्ष हरीश कुमार शर्मा एड. ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर मेला में वर्ष 2017 से पूर्व विभिन्न कार्यों को संपादित कराए जाने की मांग की है। जिससे मेला स्थल का सौंदर्यीकरण कराने के साथ ही मेले को ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान किया जा सके। उन्होंने कहा है कि मेला परिसर को संयुक्त कार्यवाही कर अतिक्रमण से मुक्त कराया जाये।
इन अतिक्रमणों को चिन्हित किया जा चुका है। न्यायालय फंड से मेला स्थल तथा मंदिर विकास हेतु कार्य योजना के अन्तर्गत मेला फंड में लगभग 2 करोड रू. न्यायालय में मेले की वार्षिक आय से संकलित हैं इनका उपयोग किया जाये। भगवान कृष्ण व बलराम की लीलाओं और शिक्षाओं तथा मेला व किला के विकास हेतु विशेष कार्यक्रम साहित्य व चल झांकियों तथा प्रोजेक्टर पर कार्य कराये जयें।
उन्होंने पत्र में कहा है कि पुरातत्व विभाग का कोई अधिकारी यहां पर नियमित निरीक्षण नहीं करता तथा पुरातत्व विभाग की कैमीकल ब्रांच से मंदिर की सफाई कराई जाये। ताकि भूरे पत्थर के मन्दिर का मूल स्वरूप निखर सके और प्रतिवर्ष पुताई का लाखों रूपया बचे एवं बन्द पड़ा वाटर कूलर चालू कराया जाये। मंदिर परिसर व टूट-फूट, रसोई की छत व अन्य आवश्यक कार्य व गन्दे पानी की निकासी कराई जाये। बाउन्ड्रीवाल का अधूरा कार्य मेला बाद पूरा हो। हरीतिमा हेतु उद्यानीकरण शाखा से कार्य कराये जायें। मंदिर सम्बन्धी प्रविष्टि को एसएसआई में दुरूस्त कराया जाये। राज्य सरकार से 2367 करोड़ रूपये की पूर्व डी.पी.आर. पर वित्तीय स्वीकृति व बजट प्राप्त करने तथा मेला स्थल का सौन्दर्यीकरण करके विकास कराया जाये और नियमित किला परिसर की सफाई करायी जाये।
इन अतिक्रमणों को चिन्हित किया जा चुका है। न्यायालय फंड से मेला स्थल तथा मंदिर विकास हेतु कार्य योजना के अन्तर्गत मेला फंड में लगभग 2 करोड रू. न्यायालय में मेले की वार्षिक आय से संकलित हैं इनका उपयोग किया जाये। भगवान कृष्ण व बलराम की लीलाओं और शिक्षाओं तथा मेला व किला के विकास हेतु विशेष कार्यक्रम साहित्य व चल झांकियों तथा प्रोजेक्टर पर कार्य कराये जयें।
उन्होंने पत्र में कहा है कि पुरातत्व विभाग का कोई अधिकारी यहां पर नियमित निरीक्षण नहीं करता तथा पुरातत्व विभाग की कैमीकल ब्रांच से मंदिर की सफाई कराई जाये। ताकि भूरे पत्थर के मन्दिर का मूल स्वरूप निखर सके और प्रतिवर्ष पुताई का लाखों रूपया बचे एवं बन्द पड़ा वाटर कूलर चालू कराया जाये। मंदिर परिसर व टूट-फूट, रसोई की छत व अन्य आवश्यक कार्य व गन्दे पानी की निकासी कराई जाये। बाउन्ड्रीवाल का अधूरा कार्य मेला बाद पूरा हो। हरीतिमा हेतु उद्यानीकरण शाखा से कार्य कराये जायें। मंदिर सम्बन्धी प्रविष्टि को एसएसआई में दुरूस्त कराया जाये। राज्य सरकार से 2367 करोड़ रूपये की पूर्व डी.पी.आर. पर वित्तीय स्वीकृति व बजट प्राप्त करने तथा मेला स्थल का सौन्दर्यीकरण करके विकास कराया जाये और नियमित किला परिसर की सफाई करायी जाये।
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