हाथरस (संदीप पुण्ढीर)। शहर में तमाम काॅल सेण्टर इस समय खुले हुये हैं और निरन्तर नये काॅल सेण्टर खोले भी जा रहे हैं। इन काॅल सेण्टरों से नामचिन कम्पनियों के नाम से हर प्रकार का सामान बेचा जा रहा है वह भी बहुत मंहगे रूपयों में । शहर में चल रहे अवैध काॅल सेण्टरों पर ना तो कोई ऐसा रजिस्टेशन है कि जिससे यह नामचीन कम्पनियों का सामान बेच सके और ना ही इन पर उस नामचीन कम्पनी का सामान होता है। यह तो बस नकली माल को काॅल करके बेचते है। इन काॅल सेण्टरों की बाढ सी हाथरस शहर में देखने को मिलती है।
----------------रिवाॅक, एडिडाॅस, एक्शन, सैमसंग कम्पनियों के नाम से बेचा जा रहा सामान---------------------
बात अगर षहर में चल रहे इन अवैध काॅल सेण्टरों की करें तो यह कहना गलत नहीं होगा कि काॅल सेण्टर चलाने वाले माफिया अधिक धन को कमाने के चक्कर में नामचीन कम्पनियों का नाम प्रयोग करके उन्हें बदनाम कर रही है। क्योंकि कम्पनियों के नाम छपे हुये नकली सामान इनके द्वारा उपभोक्ताओं को भेजे जाते हैं।
-------------------दिल्ली और आगरा से लाया जाता है नकली माल-------------------------------
काॅल सेण्टर चलाने वाले माफिया ज्यादातर कम्पनियों के नाम लिखा सामान उपभोक्ताओं को बेचने के लिये दिल्ली और आगरा से लाते है। क्योंकि इन जगहों पर सस्ते रूपयों में और वो भी कम्पनियों का नाम लिखा हुआ सामान आसानी से मिल जाता है। जैसे की रिवाॅक कम्पनी का लिखा हुआ जूता, पर्स, टी-षर्ट, टाउजर, हाथ-घड़ी, बैल्ट, चष्मा इतना ही नहीं धन वर्शा यंत्र, लक्ष्मी यंत्र, हनुमान चरण यंत्र, कुवेर यंत्र, लाल किताब, आदि कई सामान माफियाओं द्वारा खरीद कर लाये जाते है।
------------------------लड़कियों को काॅल सेण्टरों में वरीयता-----------------------------------
इन काॅल सेण्टरों के अवैध खेल में लड़कियों को ज्यादा महत्वता काॅल सेण्टर संचालक देते हैं। क्योंकि जब उपभोक्ता के पास काॅल की जाती है तो लड़कियों की आवाज को सुनकर उपभोक्ता पूरी बात को सुनता है और फिर उसकी चिकनी चुपड़ी बातों में फसकर नकली माल को महंगे दामों में खरीद लेता है। इन लड़कियों को संचालको द्वारा बात करने में इतना परफेक्ट बना दिया जाता है कि यह ग्राहक को आसानी से फंसा लेती है।
---------------------पुलिस की मिली भगत से चल रहे अवैध काॅल सेण्टर------------------------------
शहर में चल रहे इन अवैध काॅल सेण्टरों को पनपने में पुलिस का भी हाथ है ऐसा जनचर्चा में है। क्योंकि कुछ पुलिस कर्मी इन अवैध काॅल सेण्टरों के संचालक से महीनादारी लेते है और अपने अधिकारियों की भी सेवा कराते है और छापा पड़ने की भी जानकारी इन लोगों को देते है। क्योंकि कुछ समय पहले टेªनिंग के लिये आई0आई0एस0 सुजाता सिंह ने इन अवैध काॅल सेण्टरों की कलई को खोला था। तमाम काॅल सेण्टरों से नकली माल जब्त किया था और संचालकों को जेल भेजा था, तब इस षहर से सभी काॅल सेण्टर माफिया उनके डर से पलायन कर गये थे। परन्तु अब फिर से कुछ पुलिस कर्मियों की मिली भगत के कारण यह अवैध काॅल सेण्टर पनप रहे हैं।
-------------------शहर में कई स्थानों पर है अवैध काॅल सेण्टर------------------------------
अवैध काॅल सेण्टरों की भरमार तो पूरे हाथरस शहर में है शहर की प्रमुख गलियों में काॅल सेण्टर चल रहे है ढकपुरा रोड़, सीयल, अटलटाल, चैबे वाली गली, तरफरा रोड, लेवर कालोनी, साकेत कालोनी, सादाबाद गेट, नयागंज, मथुरा रोड, सिकन्दराराव रोड, तमनागढ़ी, जागेष्वर आदि गलियों में आज भी कई काॅल सेण्टर संचालित है। खाती खाना निवासी गुप्ता नामक युवक इस धंधे का हैं बेताज बादशाह, जिसके शहर में आधा दर्जन कॉल सेंटर चल रहे हैं। अब सवाल खडा होता है कि योगीराज में आये नए नए पुलिस कप्तान क्या इस ओर ध्यान देंगें और इस गोरखधंधे पर कार्यवाही करेंगे?
----------------रिवाॅक, एडिडाॅस, एक्शन, सैमसंग कम्पनियों के नाम से बेचा जा रहा सामान---------------------
बात अगर षहर में चल रहे इन अवैध काॅल सेण्टरों की करें तो यह कहना गलत नहीं होगा कि काॅल सेण्टर चलाने वाले माफिया अधिक धन को कमाने के चक्कर में नामचीन कम्पनियों का नाम प्रयोग करके उन्हें बदनाम कर रही है। क्योंकि कम्पनियों के नाम छपे हुये नकली सामान इनके द्वारा उपभोक्ताओं को भेजे जाते हैं।
-------------------दिल्ली और आगरा से लाया जाता है नकली माल-------------------------------
काॅल सेण्टर चलाने वाले माफिया ज्यादातर कम्पनियों के नाम लिखा सामान उपभोक्ताओं को बेचने के लिये दिल्ली और आगरा से लाते है। क्योंकि इन जगहों पर सस्ते रूपयों में और वो भी कम्पनियों का नाम लिखा हुआ सामान आसानी से मिल जाता है। जैसे की रिवाॅक कम्पनी का लिखा हुआ जूता, पर्स, टी-षर्ट, टाउजर, हाथ-घड़ी, बैल्ट, चष्मा इतना ही नहीं धन वर्शा यंत्र, लक्ष्मी यंत्र, हनुमान चरण यंत्र, कुवेर यंत्र, लाल किताब, आदि कई सामान माफियाओं द्वारा खरीद कर लाये जाते है।
------------------------लड़कियों को काॅल सेण्टरों में वरीयता-----------------------------------
इन काॅल सेण्टरों के अवैध खेल में लड़कियों को ज्यादा महत्वता काॅल सेण्टर संचालक देते हैं। क्योंकि जब उपभोक्ता के पास काॅल की जाती है तो लड़कियों की आवाज को सुनकर उपभोक्ता पूरी बात को सुनता है और फिर उसकी चिकनी चुपड़ी बातों में फसकर नकली माल को महंगे दामों में खरीद लेता है। इन लड़कियों को संचालको द्वारा बात करने में इतना परफेक्ट बना दिया जाता है कि यह ग्राहक को आसानी से फंसा लेती है।
---------------------पुलिस की मिली भगत से चल रहे अवैध काॅल सेण्टर------------------------------
शहर में चल रहे इन अवैध काॅल सेण्टरों को पनपने में पुलिस का भी हाथ है ऐसा जनचर्चा में है। क्योंकि कुछ पुलिस कर्मी इन अवैध काॅल सेण्टरों के संचालक से महीनादारी लेते है और अपने अधिकारियों की भी सेवा कराते है और छापा पड़ने की भी जानकारी इन लोगों को देते है। क्योंकि कुछ समय पहले टेªनिंग के लिये आई0आई0एस0 सुजाता सिंह ने इन अवैध काॅल सेण्टरों की कलई को खोला था। तमाम काॅल सेण्टरों से नकली माल जब्त किया था और संचालकों को जेल भेजा था, तब इस षहर से सभी काॅल सेण्टर माफिया उनके डर से पलायन कर गये थे। परन्तु अब फिर से कुछ पुलिस कर्मियों की मिली भगत के कारण यह अवैध काॅल सेण्टर पनप रहे हैं।
-------------------शहर में कई स्थानों पर है अवैध काॅल सेण्टर------------------------------
अवैध काॅल सेण्टरों की भरमार तो पूरे हाथरस शहर में है शहर की प्रमुख गलियों में काॅल सेण्टर चल रहे है ढकपुरा रोड़, सीयल, अटलटाल, चैबे वाली गली, तरफरा रोड, लेवर कालोनी, साकेत कालोनी, सादाबाद गेट, नयागंज, मथुरा रोड, सिकन्दराराव रोड, तमनागढ़ी, जागेष्वर आदि गलियों में आज भी कई काॅल सेण्टर संचालित है। खाती खाना निवासी गुप्ता नामक युवक इस धंधे का हैं बेताज बादशाह, जिसके शहर में आधा दर्जन कॉल सेंटर चल रहे हैं। अब सवाल खडा होता है कि योगीराज में आये नए नए पुलिस कप्तान क्या इस ओर ध्यान देंगें और इस गोरखधंधे पर कार्यवाही करेंगे?

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