हाथरस। हिन्दी पत्रकारिता दिवस 30 मई के उपलक्ष में हास्यरस एवं साहित्यप्रेमियों की नगरी हाथरस में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईष्वरीय विष्व विद्यालय के आनन्दपुरी सेवाकेन्द्र के संयोजकत्व में हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी पत्रकारिता सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है।
इस वर्श ‘‘मूल्यनिश्ठ समाज के निर्माण में पत्रकारिता एवं राजयोग की भूमिका’’ विशय पर होगी सुसंवादिता होगी। सम्मेलन में खासतौर पर राजयोग द्वारा मन की षान्ति एवं सषक्तिकरण पर जोर दिया जायेगा। आयोजन स्थल पर खुषी एवं षान्ति की जाँच के लिए दो बार गिनीज बुक रिकार्डधारी डाॅ. चन्द्रषेखर तिवारी द्वारा इजाद न्यूरोबिक मषीन उपलब्ध होगी। यह जानकारी आनन्दपुरी केन्द्र की राजयोग शिक्षिका बी0के0 शान्ता बहिन ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से दी। उन्होंने कहा कि चाहे पत्रकारिता हो, पुलिस, प्रषासन हो सभी में कलम की अपनी भूमिका है। कलम तख्त पर भी बिठाती है तो तख्ते पर भी चढ़ा सकती है।
इससे पूर्व राजयोग कक्षा में ब्रह्मावत्सों को सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यदि संसार में हर कार्य सेवा समझकर किया जाये तो खुषी भी मिलेगी और कार्य करने में आनन्द की भी अनुभूति होगी, बोझ महसूस नहीं होगा। सेवाधारी की विषेशताएँ वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि सेवाधारी माना नम्र चित्त और जो नम्र चित्त होगा वही नवनिर्माण करने में सक्षम होगा। इस अवसर पर बी.के. कैप्टन अहसान सिंह, गिरीष अग्रवाल, प्रेमनाथ भोला, रामेष्वर दयाल, षषि अग्रवाल, सुषीला षर्मा, षकुन्तला षर्मा, रामप्रसाद, भगवानदेवी, दाऊदयाल अग्रवाल, राजेष षर्मा, सी.पी. षर्मा सहित अनेक ब्रह्मावत्स उपस्थित थे।
इस वर्श ‘‘मूल्यनिश्ठ समाज के निर्माण में पत्रकारिता एवं राजयोग की भूमिका’’ विशय पर होगी सुसंवादिता होगी। सम्मेलन में खासतौर पर राजयोग द्वारा मन की षान्ति एवं सषक्तिकरण पर जोर दिया जायेगा। आयोजन स्थल पर खुषी एवं षान्ति की जाँच के लिए दो बार गिनीज बुक रिकार्डधारी डाॅ. चन्द्रषेखर तिवारी द्वारा इजाद न्यूरोबिक मषीन उपलब्ध होगी। यह जानकारी आनन्दपुरी केन्द्र की राजयोग शिक्षिका बी0के0 शान्ता बहिन ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से दी। उन्होंने कहा कि चाहे पत्रकारिता हो, पुलिस, प्रषासन हो सभी में कलम की अपनी भूमिका है। कलम तख्त पर भी बिठाती है तो तख्ते पर भी चढ़ा सकती है।
इससे पूर्व राजयोग कक्षा में ब्रह्मावत्सों को सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यदि संसार में हर कार्य सेवा समझकर किया जाये तो खुषी भी मिलेगी और कार्य करने में आनन्द की भी अनुभूति होगी, बोझ महसूस नहीं होगा। सेवाधारी की विषेशताएँ वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि सेवाधारी माना नम्र चित्त और जो नम्र चित्त होगा वही नवनिर्माण करने में सक्षम होगा। इस अवसर पर बी.के. कैप्टन अहसान सिंह, गिरीष अग्रवाल, प्रेमनाथ भोला, रामेष्वर दयाल, षषि अग्रवाल, सुषीला षर्मा, षकुन्तला षर्मा, रामप्रसाद, भगवानदेवी, दाऊदयाल अग्रवाल, राजेष षर्मा, सी.पी. षर्मा सहित अनेक ब्रह्मावत्स उपस्थित थे।
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