हाथरस। दिल्ली पब्लिक स्कूल अलीगढ़ फिल्म जगत के 100 वर्षो के गौरवपूर्ण इतिहास को अपने सांस्कृतिक महोत्सव; सिने सुदर्शन के माध्यम से नवंबर माह में, सीनियर विंग में प्रस्तुत करने जा रहा है, जिसमें दिल्ली पब्लिक स्कूल अलीगढ़, सीनियर विंग; जूनियर विंग; दिल्ली पब्लिक स्कूल, सिविल लाइंस, दिल्ली पब्लिक स्कूल हाथरस, डी.पी.एस. शिक्षा केन्द्र व आशा किरण, सभी शाखाओं के करीब 3500 बच्चे व विद्यालय के भूतपूर्व छात्र, शिक्षक व अभिभावकगण, फिल्म जगत के सफर की विभिन्न कार्यक्रमों द्वारा मनोहारी प्रस्तुति देंगे। सांस्कृतिक महोत्सव सिने सुदर्शन फिल्म जगत के इस सफर को छात्र-छात्राएं अपने एक्ट, नृत्य, एक्शन, नेरेशन, विजुअल के माध्यम से दर्शकों के हृदय को सराबोर करेंगी।
विद्यालय में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं में से ही भारतीय सिनेमा के सुपरस्टार नायक, नायिकाओं, सहनायकों एवं अभिनायकों को चुना गया है। इन सभी की रिर्हसल चल रही है।
बाॅलीवुड के पितामह दादा साहेब फालके, जिन्होंने सन् 1913 में पहली मूक फिल्म ‘राजा हरिश्चंद्र’ का निर्माण करके भारतीय सिनेमा की नींव रखी। और फिर मंजिलें मिलती गयी। 2016 तक के गौरवमयी सफर में भारतीय सिनेमा ने एक के बाद एक नये विविध आयाम रचे। नायक, नायिका, हास्य कलाकार, खलनायकों के अनोखे समागम से सिने सुदर्शन द्वारा व्यक्ति मात्र के जीवन में नवरस को घोला जाएगा ।
विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती पल्लवी उपाध्याय ने बताया कि सिने सुदर्शन न केवल नृत्य-गीत-संगीत-कला-शिक्षा और संस्कृति का अभूतपूर्व सगागम है बल्कि सभी सम्प्रदायों और संस्कृतियों का संगम व फिल्म जगत के विभिन्न व्यक्तित्वों का अनुपम समन्वय है। देश की एक प्रख्यात संस्था को 07 विशाल मंचों एवं लाइट साउण्ड के व्यवस्था का अनूठा दायित्व सौंपा गया है। यहाँ का वातावरण व दृश्य समुद्रतटीय होगा। विद्यालय के छात्रों में इन मंचों के प्रति अतीव उत्कंठा एवं अपूर्व कौतूहल है।
विद्यालय में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं में से ही भारतीय सिनेमा के सुपरस्टार नायक, नायिकाओं, सहनायकों एवं अभिनायकों को चुना गया है। इन सभी की रिर्हसल चल रही है।
बाॅलीवुड के पितामह दादा साहेब फालके, जिन्होंने सन् 1913 में पहली मूक फिल्म ‘राजा हरिश्चंद्र’ का निर्माण करके भारतीय सिनेमा की नींव रखी। और फिर मंजिलें मिलती गयी। 2016 तक के गौरवमयी सफर में भारतीय सिनेमा ने एक के बाद एक नये विविध आयाम रचे। नायक, नायिका, हास्य कलाकार, खलनायकों के अनोखे समागम से सिने सुदर्शन द्वारा व्यक्ति मात्र के जीवन में नवरस को घोला जाएगा ।
विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती पल्लवी उपाध्याय ने बताया कि सिने सुदर्शन न केवल नृत्य-गीत-संगीत-कला-शिक्षा और संस्कृति का अभूतपूर्व सगागम है बल्कि सभी सम्प्रदायों और संस्कृतियों का संगम व फिल्म जगत के विभिन्न व्यक्तित्वों का अनुपम समन्वय है। देश की एक प्रख्यात संस्था को 07 विशाल मंचों एवं लाइट साउण्ड के व्यवस्था का अनूठा दायित्व सौंपा गया है। यहाँ का वातावरण व दृश्य समुद्रतटीय होगा। विद्यालय के छात्रों में इन मंचों के प्रति अतीव उत्कंठा एवं अपूर्व कौतूहल है।
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