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हाथरस- देवी मन्दिरों पर भक्तों का लग रहा है ताता, सुबह से ही उमड़ रही है भक्तों की भीड़

हाथरस। नवरात्र के चैथे दिन को भी शक्ति पीठों के साथ-साथ घरों में भी ब्रहमचारिणी की पूजा विधिविधान से की गई। घरों में देवी मां की पूजा के साथ ही मंदिरों में जलभिषेक और धूप-दीप व हवन से मां की आराधना की गई। जिले भर के प्रसिद्व देवी मन्दिरों में दर्शन करने वालों भक्तों की भारी भीड़ उमड़ने से कई जगह घंटो लाइन में लगने के बाद दर्शन हो पाए।
घंटे की टंकार से असुरों का नाश करने वाली देवी चंद्रघंटा मां दुर्गा का तृतीय स्वरूप है। इनकी उपासना नवरात्रि के दिनों में की जाती है। देवी चंद्रघंटा  के रूप में मां दुर्गा के जीवन काल का वह समय था जब महिसासुर के साथ माता दुर्गा का युद्व हो रहा था तब माता ने घंटे की टंकार से असुरों का नाश कर दिया था। इसलिए मसता के चंद्रघंटा स्वरूप का पूजन किया जाता है। मांता चंद्रघंटा की दस भुजाएं हैं। माता के इन दस हाथों में ढाल, तलवार, खडग, त्रिशूल, धनुश, चक्र, पाश, गदा और बाणों
से भरा तरकश है। इनकी उपासना करने से भक्तों के मणिपुर चक्र के जाग्रत होने वाली सिद्वियां स्वतः प्राप्त होती हैंतथा सांसारिक कष्टों से मुक्ति मिलती है। मंगलवार  को भक्त घरों में पूजा, पाठ और हवन के बाद मन्दरों में जलभिषेक करने पहुचें। मन्दिरों में भक्तों की आस्था देखते ही बनती थी। किला गेट स्थित पथवारी मन्दिर पर पहुचे लोगों को कठित परिश्रम और लंबे इंतजार के बाद मां के दर्शन संभव हो पाये। शाम होते ही बौहरे वाली देवी, रमनपुर चामुण्डा देवी, जलेसर रोड़ स्थित चामण्डा देवी, हाथरसी देवी, मशानी देवी, सासनी स्थित कंकाली देवी, बिसाना स्थित तारागढ वाली देवी, सिकन्दराराऊ स्थित पथवारी माता एवं मां चामुंडा मन्दिर, जीएस कालेज पर मां गौरी मन्दिर, सादाबाद, मुरसान, सासनी आदि देवी मन्दिरों पर भी सुबह से ही भक्तों की लाइन लग गई। मन्दिरों में पूरे दिन और रात तक देवी मां की भेंट गूंजती रहती है। तालाब चैराहा स्थित राम दरबार मन्दिर में भजन कीर्तन का दौर चल रहा है।

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