हाथरस। दुर्गा जी का तीसरा अवतार चंद्राघंटा है। देवी के माथे पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र होने के कारण उन्हे चंद्राघंटा कहा जाता है। अपने मस्तक पर घंटे के आकार के अर्धचन्द्र को धारण करने के कारण मां चंद्राघंटा नाम से पुकारी जाती है। अपने वाहन सिंह पर सवार मां यह स्वरूप युद्व व दुष्टों का नाश करने के लिये तत्पर रहती है। तो वही शहर के प्रमुख देवी में गिनी जाने वाली देवी हाथरसी मैया ढकपुरा गांव के निकट बसी हुई है। जहां जो भी भक्त मन से अपनी मनोकामना मांगेंगा उसकी मनोकामना अवश्य पूरी होगी। मुगलवार को हाथरसी मैया पर सुबह से ही भक्तों का तांता लगा हुआ था। और देवी मां के पूजा-अर्चना के लिये लाइन लगी हुई थी। वही जलेसर रोड़ स्थित चामुण्डा देवी पर भी भक्तों की मां के दर्शन करने के लिये भीड़ लगी हुई थी। तो शाम को शहर की बौहरे वाली देवी भक्तों द्वारा डंडौती भक्तों लगा रहे थे। रमनपुर वाली चामुण्डा देवी पर महा हवन यज्ञ का आयोजन चल रहा है।
हाथरस। दुर्गा जी का तीसरा अवतार चंद्राघंटा है। देवी के माथे पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र होने के कारण उन्हे चंद्राघंटा कहा जाता है। अपने मस्तक पर घंटे के आकार के अर्धचन्द्र को धारण करने के कारण मां चंद्राघंटा नाम से पुकारी जाती है। अपने वाहन सिंह पर सवार मां यह स्वरूप युद्व व दुष्टों का नाश करने के लिये तत्पर रहती है। तो वही शहर के प्रमुख देवी में गिनी जाने वाली देवी हाथरसी मैया ढकपुरा गांव के निकट बसी हुई है। जहां जो भी भक्त मन से अपनी मनोकामना मांगेंगा उसकी मनोकामना अवश्य पूरी होगी। मुगलवार को हाथरसी मैया पर सुबह से ही भक्तों का तांता लगा हुआ था। और देवी मां के पूजा-अर्चना के लिये लाइन लगी हुई थी। वही जलेसर रोड़ स्थित चामुण्डा देवी पर भी भक्तों की मां के दर्शन करने के लिये भीड़ लगी हुई थी। तो शाम को शहर की बौहरे वाली देवी भक्तों द्वारा डंडौती भक्तों लगा रहे थे। रमनपुर वाली चामुण्डा देवी पर महा हवन यज्ञ का आयोजन चल रहा है।
एक टिप्पणी भेजें
जयहिंद मीडिया नेटवर्क में अपनी बात रखने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद।