हाथरस। दिल्ली पब्लिक स्कूल, हाथरस में समय-समय पर विभिन्न त्योहारों पर छात्रों द्वारा की जाने वाली विशेष सभाओं के माध्यम से हमारी संस्कृति को जीवंत बनाए रखने का प्रयास किया जाता रहा है। साथ ही ये सभाएँ भावी पीढ़ी को इन त्योहारों के महत्त्व से अवगत कराने का प्रयास भी करती हैं।
विद्यालय के छात्र-छात्राओं द्वारा दिवाली, गोवर्धन पूजा, भाईदूज के उपलक्ष्य में सुविचार, रोचक तथ्य, सामान्य-ज्ञान, भाषण, व लघु नाटिका आदि का आयोजन किया गया। छात्र-छात्राओं ने इन सबके माध्यम से दीपावली मनाए जाने के प्रमुख कारण (श्रीराम का अयोध्या आगमन) से अवगत कराया। साथ ही लघु नाटिका आदि के माध्यम से छात्रों ने हरित दिवाली मनाने का संदेश देते हुए पटाखों आदि को न चलाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती नीना चक्कु जी ने छात्रों को दिवाली, गोवर्धन-पूजा, भाईदूज की अग्रिम बधाई देते हुए कहा कि जिस प्रकार हम दिवाली पर दीपकों की रोशनी से अँधेरे को दूर कर उल्लसित होते हैं, उसी तरह हमें ज्ञान रूपी प्रकाश से अपने अन्तर्तम के अज्ञान व बुराइयों के अंधकार को दूर कर अपने जीवन को उज्ज्वल बनाना होगा तभी हम दिवाली को सही मायनों में मना पाएँगे। उन्होंने छात्र-छात्राओं से पटाखों का प्रयोग न करने का आह्वान किया और साथ ही मिट्टी के दीपकों का प्रयोग कर पर्यावरण को स्वच्छ बनाए रखने के लिए प्रेरित भी किया।
विद्यालय के छात्र-छात्राओं द्वारा दिवाली, गोवर्धन पूजा, भाईदूज के उपलक्ष्य में सुविचार, रोचक तथ्य, सामान्य-ज्ञान, भाषण, व लघु नाटिका आदि का आयोजन किया गया। छात्र-छात्राओं ने इन सबके माध्यम से दीपावली मनाए जाने के प्रमुख कारण (श्रीराम का अयोध्या आगमन) से अवगत कराया। साथ ही लघु नाटिका आदि के माध्यम से छात्रों ने हरित दिवाली मनाने का संदेश देते हुए पटाखों आदि को न चलाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती नीना चक्कु जी ने छात्रों को दिवाली, गोवर्धन-पूजा, भाईदूज की अग्रिम बधाई देते हुए कहा कि जिस प्रकार हम दिवाली पर दीपकों की रोशनी से अँधेरे को दूर कर उल्लसित होते हैं, उसी तरह हमें ज्ञान रूपी प्रकाश से अपने अन्तर्तम के अज्ञान व बुराइयों के अंधकार को दूर कर अपने जीवन को उज्ज्वल बनाना होगा तभी हम दिवाली को सही मायनों में मना पाएँगे। उन्होंने छात्र-छात्राओं से पटाखों का प्रयोग न करने का आह्वान किया और साथ ही मिट्टी के दीपकों का प्रयोग कर पर्यावरण को स्वच्छ बनाए रखने के लिए प्रेरित भी किया।

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