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हाथरस- विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए प्रयास, ब्रह्माकुमारीज़ संस्था जो व्यसन मुक्ति के लिए प्रयासरत है, वर्ष 2012 से जारी है ‘‘मेरा भारत: व्यसन मुक्त भारत’’ अभियान’’

हाथरस। कौन कहता है कि आसमाँ में छेद नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारो। यह पंक्तियाँ लगातार प्रेरित करती हैं बहुत मुश्किल कार्य में भी लगातार प्रयास करते रहने के लिए। यूं तो प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के ब्रह्मावत्सों का सात्विक भोजन, सात्विक वृत्ति और सात्विक कर्मों के लिए समाज में एक अलग ही स्थान है और मेडल प्राप्त कोई भी ब्रह्मावत्स किसी भी प्रकार के खाद्य नशे का प्रयोग भारत ही नहीं संगठन के 140 देशों में व्याप्त किसी भी देश में नहीं करता।
समाज उसमें भी खासकर युवा पीढ़ी को नशे से दूर रखने के लिए प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय नामक आध्यात्मिक एवं सामाजिक संगठन के 20 प्रभागों में से एक चिकित्सा सेवा प्रभाग द्वारा ‘‘मेरा भारत - व्यसन मुक्त भारत’’ अभियान चलाया जा रहा है। 2006 से व्यसनों के खिलाफ शुरू हुआ साईकिल यात्रा, 2007 में मोटर साईकिल यात्रा के बाद वर्ष 2012 से ‘‘मेरा भारत व्यसन मुक्त भारत’’ का सफर अब तक सैकड़ों की संख्या में गाँवों, सामाजिक संस्थाओ, शहर की तमाम शैक्षणिक संस्थाओं और सरकारी कार्यालयों तक पहुँचा है और यह क्रम आज भी जारी है।
हाथरस में अभियान की कोर्डीनेटर और अलीगढ़ रोड स्थित आनन्दपुरी कालोनी केन्द्र व्यवस्थापिका एवं राजयोग शिक्षिका बी.के. शान्ता बहिन ने बताया कि कई वर्षों से लगातार केन्द्र और राज्य सरकारों के साथ पत्राचार के माध्यम से दो अनुरोध किये गये थे जिसमें एक तो देश के सभी विश्वविद्यालयों में व्यसन मुक्ति के कार्यक्रम कराये जाने तथा दूसरा प्रत्येक विद्यालय और महाविद्यालय में नशे से होने वाली हानियों की जानकारी देने सम्बन्धी पाठ्यक्रम शामिल था। अब जाकर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के सचिव प्रोफेसर जसपाल सिंह संघू द्वारा काॅलेजों में नशे को लेकर जागरूकता कार्यक्रम चलाने का सुझाव दिया है और वार्षिक उत्सव, दीक्षांत समारोह में खासतौर पर इस प्रकार के आयोजन करने के लिए सूचना जारी की है। बी.के. शान्ता बहिन ने प्रोफेसर संधू को पत्र के माध्यम से बधाई प्रेषित की है और देश के प्रत्येक विश्वविद्यालय में नशे से सम्बन्धित पाठ्यक्रम लागू करने का अनुरोध भी किया है तथा पाठ्यक्रम और कार्यक्रमों के लिए प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के मेडीकल विंग की सेवाओं को लेने का आव्हान भी दिया है। यह जानकारी उन्होंने प्रातःकालीन राजयोग सत्र के माध्यम से ब्रह्मावत्सों को दी।

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